
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Updated : April 22, 2026 1:21 PM IST
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Abortion And Women's Mental Health: अबॉर्शन यानी गर्भपात हमारे देश में एक ऐसा टॉपिक बनकर रहा है, जिसके बारे में लोग बात करने से डरते थे। आज के समय में जहां महिलाओं के स्वास्थ्य को इतनी गंभीरता से लिया जाता है और जहां महिलाएं अपनी हेल्थ कंडीशन के बारे में खुलकर बात कर लेती हैं लेकिन गर्भपात फिर भी एक हिचकिचाहट का विषय बनकर रह गया है। किसी भी हेल्थ कंडीशन के बारे में अगर लोग खुलकर बात नहीं करेंगे तो उसका इलाज करना उतना ही जटिल होगा और उससे होने वाली हेल्थ प्रॉब्लम्स यानी कॉम्प्लिकेशन उतनी ही ज्यादा बढ़ेंगी। हाल ही बीते फरवरी में भारत में कुछ खास कंडीशन्स को ध्यान में रखते हुए अबॉर्शन लीगल कर दिया गया है (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट- MTP) 1971)। महिलाओं को गर्भपात से जुड़ी जानकारियां दी जाती हैं, गावों में रहने वाली महिलाओं को भी गर्भपात से जुड़ी ज्यादा से ज्यादा जानकारियां देने की कोशिश की जाती है, ताकि गर्भपात की स्थिति में डर न लगे बल्कि उससे जुड़ी पर्याप्त जानकारी हो।
फाउंडेशन फॉर रिप्रोडक्टिव हेल्थ सर्विसेज इंडिया (FRHS India) और प्रतिज्ञा कैंपेन की मीडिया के साथ बातचीत के दौरान गर्भपात से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई जैसे गर्भपात कराने के फैसले से महिलाओं को मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता असर। एफआरएचएस इंडिया के सीईओ आशुतोष कौशिक, एफआरएचएस इंडिया की प्रोग्राम ऑपरेशन मैनेजर नेहा श्रीवास्तव, जेंडर इक्वालिटी एक्टिविस्ट देबांजना चौधरी और इपास डेवलपमेंट फाउंडेशन की सीटीओ डॉ. संगीता बत्रा ने मीडिया के साथ भारत में गर्भपात से जुड़ी स्थितियों पर चर्चा की, जिसमें कई महत्वपूर्ण बातें सामने निकल कर आई।
विशेषज्ञों की मीडिया के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि गर्भपात को महिलाओं के लिए किसी स्टिग्मा यानी एक कलंक की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। गर्भपात करा रही महिला को “मां” कहकर और गर्भ में पल रहे “भ्रूण” कहकर संबोधित नहीं किया जाना चाहिए। गर्भपात करा रही महिला को मेडिकल हेल्थ सपोर्ट के साथ-साथ मेंटल और इमोशनल सपोर्ट भी दिया जाना चाहिए।
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जब भारत सरकार ने गर्भपात को लीगल कर दिया है, तो भारत के हर हिस्से में उस स्वास्थ्य सुविधा की पहुंच होनी चाहिए जो गर्भपात के लिए जरूरी है। भारत में मेडिसिन बेस्ड अबॉर्शन बढ़ रहा है, जो महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक है।
मेडिसिन बेस्ड अबॉर्शन भी डॉक्टर व हेल्थ एक्सपर्ट्स की निगरानी में ही किया जाना चाहिए और इसके चलन को कम करने के लिए रूढ़िवादी सोच को हटाने पर काम करना होगा। साथ ही भारत के दिन हिस्सों में मेडिकल हेल्थ एक्सेस की कमी है, उसे भी जल्द से जल्द कम करना होगा।
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विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में अभी भी गर्भपात से जुड़ी सही जानकारी का काफी अभाव है और अबॉर्शन से जुड़ी कॉम्प्लिकेशन्स को कम करने के लिए सबसे पहले जानकारी के इस अभाव को खत्म करना होगा। उन्होंने आगे बताया कि प्रतिज्ञा कैंपेन की मदद से हम महिलाओं और यहां तक कि स्कूलों में जाकर बच्चों को भी गर्भपात और महिला के स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य जानकारियां देने की कोशिश कर रहे हैं।
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