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डिलीवरी के बाद त्वचा क्यों बदल जाती है? जानें इसके कारण और देखभाल के तरीके

आप में से बहुत सी महिलाएं प्रेग्नेंसी के बाद अपनी स्किन पर कई बदलावों को देख चुकी होंगी। जैसे: स्किन का लटकना, झाइयां और डार्क स्पॉट्स आदि। यह क्यों होता है और कैसे ठीक किया जा सकता है? आइए डॉक्टर से जानते हैं।

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Written By: Vidya Sharma | Published : July 2, 2026 1:13 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Jayanthy Ravindran

बच्चे को जन्म देने के बाद महिलाओं की त्वचा में कई बदलाव आते हैं। भले ही प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही में चमकदार बाल और दमकती त्वचा से ऐसा लग सकता है कि यह किसी सपने जैसा है, लेकिन डिलीवरी के बाद होने वाले शारीरिक बदलावों के बारे में आपको कोई नहीं बताता है और तैयार करता है। कोई नहीं बताता कि बच्चा होने के बाद लंबे समय तक आपकी नींद पूरी नहीं होती है, आपकी स्किन और बाल पहले जैसे हेल्दी और चमकदार नहीं रहते हैं। लाइफ इतनी बिजी हो जाती है कि थोड़ा-सा स्किन केयर करने का समय भी नहीं मिल पाता है।

ऐसे में आपकी त्वचा में अचानक बदलाव होने लगते हैं। इसमें सिर्फ स्ट्रेच मार्क्स या पेट की स्किन को वापस पहले जैसा होने में लगने वाला समय ही शामिल नहीं है, बल्कि फोरहेड या गालों पर गहरे, एक जैसे दिखने वाले धब्बे भी हो सकते हैं। स्किन पर होने वाले ये बदलाव अक्सर बच्चे के जन्म के बाद शरीर में होने वाले हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण भी हो सकते हैं। लेकिन डिलीवरी के बाद त्वचा की देखभाल कैसे की जाए? आइए हम तामिरा लाइफ में कार्यरत और बोर्ड-सर्टिफाइड प्लास्टिक और कॉस्मेटिक सर्जन डॉक्टर जयंती रवींद्रन से जानते हैं।

प्रेग्नेंसी के बाद स्किन में बदलाव क्यों होते हैं?

अधिकतर महिलाएं बच्चे को जन्म देने के बाद अपनी त्वचा में बदलाव महसूस करती हैं, जोकि साफ-साफ दिखाई भी देता है। इन बदलावों का मुख्य कारण हार्मोन का अचानक कम होना है, प्रेग्नेंसी में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का लेवल तेजी से बढ़ना है। लेकिन प्लेसेंटा के बाहर आने के बाद बॉडी में हार्मोन लेवल तेजी से गिरना शुरू हो जाता है। जिसका सीधा असर बॉडी पर होता है। त्वचा में तेल का अधिक उत्पादन, स्किन सेल्स का टर्नओवर, स्किन टोन व टेक्सचर में बदलाव आना, बाल झड़ना, खुजली, स्ट्रेच मार्क्स का रंग बदलना, स्किन डल हो जाती है और डार्क सर्कल्स का बढ़ना आदि।

डॉक्टर बताती हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान बढ़ा हुआ ब्लड वॉल्यूम नॉर्मल हो जाता है, जो त्वचा की नेचुरल चमक कुछ समय के लिए कम होने का जिम्मेदार हो सकता है। साथ ही, नींद की कमी और कोर्टिसोल का बढ़ना भी इस असर को बढ़ा सकता है, जिससे डिलीवरी के बाद त्वचा से जुड़ी समस्याएं ज्यादा साफ दिखने लगती हैं।

डिलीवरी के बाद कौन सी स्किन प्रॉब्लम हो सकती है?

डॉक्टर बताती हैं "बच्चे की डिलीवरी के बाद हाइपरपिग्मेंटेशन यानी मेलास्मा महिलाओं में देखी जाने वाली सबसे आम समस्या है। बच्चे के जन्म के बाद हार्मोन्स में अस्थायी उतार-चढ़ाव के कारण यह अक्सर चेहरे पर ज्यादा दिखाई देता है। हालांकि यह एक समस्या नहीं है, बल्कि कई महिलाएं जॉलाइन पर अचानक गंभीर एक्ने होने और स्किन बहुत ज्यादा संवेदनशील होने जैसी समस्याओं का सामना भी करती हैं।"

डॉक्टर आगे बताती हैं कि अगर महिला ब्रेस्टफीडिंग करा रही है, तो शरीर दूध बनाने के लिए हाइड्रेशन का इस्तेमाल करता है, जिससे चेहरा बहुत ज्यादा ड्राई महसूस हो सकता है। वहीं, कुछ महिलाओं को त्वचा में ढीलापन महसूस हो सकता है, जिससे त्वचा की ऊपरी परत पतली और कम मजबूत हो जाती है, या त्वचा पर झुर्रियां पड़ सकती हैं। यह सिर्फ सामान्य लोशन लगाने से ठीक नहीं होती।

डिलीवरी के बाद त्वचा की देखभाल कैसे करें?

डॉक्टर जयंती रवींद्रन हाल में मां बनी महिलाओं को पोस्ट-प्रेग्नेंसी स्किन केयर टिप्स देती हैं। वह बताती हैं डिलीवरी के बाद स्किन केयर के लिए पेशेंस और सही एक्टिव इंग्रेडिएंट्स के बीच बैलेंस बनाना बहुत जरूरी है।

  • पिग्मेंटेशन के मामले में, दाग-धब्बों को और गहरा होने से बचाने के लिए रोजाना मिनरल सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है। 
  • पिंपल्स या ब्रेकआउट्स से निपटने के लिए, लाइट फोमिंग फेसवॉश और मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें, क्योंकि ये रेडनेस को कम करने और बंद पोर्स को खोलने में मदद करते हैं।

डॉक्टर कहती हैं कि जहां गर्भावस्था के दौरान बने कुछ गहरे निशान अक्सर बिना ज्यादा कोशिश के गायब हो जाते हैं, वहीं स्ट्रेच मार्क्स को हल्का होने और धीरे-धीरे मिटने में समय लग सकता है। हाइड्रेटेड रहने, रोजाना सनस्क्रीन लगाने और खास समस्याओं के लिए प्रोफेशनल ट्रीटमेंट लेने जैसे बेसिक रूटीन को अपनाकर, आप धीरे-धीरे अपनी त्वचा को मजबूत बना सकते हैं और अपने शरीर को लेकर ज्यादा आत्मविश्वास महसूस कर सकते हैं।

डिस्क्लेमर: आपकी स्किन एक ही दिन में पहले जैसी ठीक नहीं होगी, इसलिए यह उम्मीद करना कि वह तुरंत पहले जैसी हो जाए, सही नहीं है। बॉडी के इंटरनल चेंजेस को स्टेबल होने और शरीर की नेचुरल प्रोटेक्टिव बैरियर को पूरी तरह ठीक होकर अंदर से हेल्दी महसूस करने में 6 महीने से लेकर एक साल तक का समय लग सकता है।