
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : August 11, 2025 1:12 PM IST
Medically Verified By: Dr. Archana Dhawan Bajaj
Weakness during breastfeeding- बच्चे के जन्म के बाद 6 साल तक बच्चे को केवल मां का दूध पिलाने की सलाह दी जाती है। ब्रेस्टफीडिंग की मदद से बच्चे के विकास (Breastfeeding helps in baby's growth and development) में मदद होती है। लेकिन, जानकारी की कमी के कारण कई बार महिलाओं को प्रेगनेंसी के बाद के इस महत्वपूर्ण दौर में कुछ परेशानियां भी आ सकती हैं। ब्रेस्टफीडिंग फेज में कई महिलाओं को बहुत अधिक थकान और कमजोरी महसूस (weakness and tiredness) होती है। क्या ब्रेस्टफीडिंग के कारण महिलाओं को वीकनेस हो सकती है या इस शारीरिक कमजोरी के कुछ और कारण हैं। लैक्टेशन एक्सपर्ट, गायनेकोलॉजिस्ट और आईवीएफ एक्सपर्ट और डॉ. अर्चना धवन बजाज (Dr. Archana Dhawan Bajaj, Gynaecologist and IVF Expert at Nurture, Delhi ) बता रही हैं कि क्यों महिलाओं को ब्रेस्टफीडिंग के दौरान कमजोरी महसूस होती है और इस कमजोरी से बचने के लिए क्या उपाय करने चाहिए।
स्तनपान केवल बच्चे के लिए ही नहीं, बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद जरूरी होता है। यह न सिर्फ बच्चे की इम्युनिटी मजबूत करता है बल्कि मां को कई बीमारियों से भी बचाता है। नियमित स्तनपान कराने से मां के शरीर में हार्मोन ऑक्सीटोसिन का स्राव होता है, जो डिलिवरी के बाद गर्भाशय को उसके सामान्य आकार में लाने में मदद करता है।
" ब्रेस्टफीडिंग से मां को कोई कमजोरी नहीं आती, बल्कि यह प्राकृतिक प्रक्रिया है जो मां के मेटाबोलिज्म को संतुलित करती है। हां, मां को इस दौरान पोषणयुक्त आहार की जरूरत होती है ताकि दूध उत्पादन बना रहे और शरीर में ऊर्जा की कमी न हो।" यह कहना है कि डॉ. अर्चना धवन बजाज का जिनके अनुसार, कई बार जो महिलाएं स्तनपान के दौरान कमजोरी महसूस करती हैं, उसका कारण हार्मोनल बदलाव या पर्याप्त पोषण न मिल पाने जैसे कारण होते हैं। इसलिए जरूरी है कि ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाएं अपनी डाइट में आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर फूड्स शामिल करें। इसके साथ ही रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से भी थकान और कमजोरी कम महसूस होती है।
कुछ परिवारों में यह भी माना जाता है कि लंबे समय तक स्तनपान कराने से महिला का शरीर ढीला पड़ जाता है या वो कमज़ोर दिखने लगती है। यह भी एक ग़लत धारणा है। असल में स्तनपान से वजन नियंत्रण में मदद मिलती है और कई रिसर्च बताते हैं कि इससे मां को ब्रेस्ट और ओवरी कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव होता है।
डॉक्टर अर्चना कहती हैं कि ब्रेस्टफीडिंग से कमजोरी नहीं आती, बल्कि यह मां और बच्चे दोनों के लिए जीवनभर हेल्दी रहने की नींव तैयार करता है। इसीलिए, अपनी जानकारी बढ़ाएं, अपने डॉक्टर की मदद लें और सही निर्णय लें।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
ब्रेस्टफीडिंग के दौरान महिलाओं को अपनी डाइट में आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर फूड्स शामिल करना चाहिए। साथ ही अधिक से अधिक मात्रा में पानी पीने से भी कमजोरी और थकान से बचने में मदद होती है।
ब्रेस्टफीडिंग कराने से न्यू मदर्स के शरीर में ऑक्सीटोसिन नामक हार्मोन रिलीज होता है। ये हार्मोन्स गर्भाशय को उसके सामान्य आकार में लाने में मदद करते हैं।