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गर्भावस्‍था की तीसरी तिमाही में करें ये 5 योग, नार्मल डिलीवरी होगी आसान

Yoga for normal delivery: प्रेगनेंसी में योग करने से ना सिर्फ तन और मन को आराम मिलता है बल्कि, ये शरीर को नार्मल डिलीवरी के लिए तैयार करने में भी मदद कर सकता है।

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Written By: Pallavi | Published : June 21, 2022 2:17 PM IST

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही (Pregnancy third trimester) बाकी दो तिमाही से अलग और थोड़ी मुश्किल होती है। प्रेगनेंसी के इन महीनों में गर्भ में पल रहा बच्चा बड़ा हो रहा होता है और इसके कारण शरीर में कई परिवर्तन हो रहा होता है। साथ ही डिलीवरी का समय करीब आ रहा होता है। ऐसी स्थिति में योग फायदेमंद हो सकता है और नार्मल डिलीवरी में मदद कर सकता है। लेकिन इसके लिए आपको जानना होगा कि गर्भावस्‍था की तीसरी तिमाही (yoga for pregnant lady in third trimester) कौन सा योग करें? इसी बारे में हमने श्रावणी रायकर, Kshemavana से बात की।

गर्भावस्‍था की तीसरी तिमाही में करें ये 5 योग-Yoga for pregnant lady in third trimester in hindi

श्रावणी रायकर, Kshemavana कहती हैं कि गर्भावस्‍था की तीसरी तिमाही के दौरान योग आसन और प्राणायाम फायदेमंद होता है। दरअसल, तीसरी तिमाही के दौरान (third trimester) गर्भवती महिला को ज्यादा हीप ऑपनिंग (Hip opening) यानी कि कुल्हों को खोलने वाले योग का अभ्यास करना चाहिए। जैसे की

1. बद्ध कोणासन (Baddhakonasan)

बद्ध कोणासन कुल्हों और पैरों को खोलने में मदद करता है। इसलिए इसे हाफ और फुल बटरफ्लाई पोज़ भी कहते हैं। इसे करने कूल्हे के जोड़ को ढीला करने में मदद मिलती है और पेल्विक एरिया में ब्लड सर्कुलेशनबढ़ता है। ये जांघ की अंदरूनी मांसपेशियों और पैरों से तनाव को कम करता है और थकान में कमी लाता है। इस तरह ये एक महिला के शरीर को नार्मल डिलीवरी के लिए तैयार होने में मदद करता है।

2. उपविष्ठ कोणासन (Upavishtakonasan)

उपविष्ठ कोणासन कमर और भीतरी जांघों में लचीलापन पैदा करता है और साथ ही रीढ़, पीठ के निचले हिस्से, श्रोणि की मांसपेशियों को मजबूत करता है, यह मुद्रा ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करती है और गुर्दे को टोन करती है। ये गर्भाशय ग्रीवा फैलाता है और कूल्हों को खोलता है। साथ ही ये पीठ को आराम देता है और पैरों के तनाव को कम करने में भी मदद करता है।

3. त्रिकोणासन (Trikonasana)

ये आसन पेल्विक एरिया मजबूती देने के साथ शरीर के बाकी मांसपेशियों को भी आराम पहुंचाती है। ये पूरे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को उत्तेजित करती है और इसमें सुधार लाती है। ये पीठ, पैरों और पूरे शरीर के दर्द से राहत दिलाने में मदद करती है।

4. सेतु बंधासन (Setubandhasan)

सेतु बंधासन तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है। यह मुद्रा आपको बच्चे के जन्म के लिए शक्ति प्रदान करते हुए मन और शरीर को शांत करती है। ये तन और मन दोनों से गर्भवती महिला को नार्मल डिलीवरी के लिए तैयार करती है।

5. शवासन (Savasana)

इन तमाम योग को करने के बाद प्रेग्नेंट महिलाओं को शवासन भी करना चाहिए। ये गर्भावस्था के योग का एक अनिवार्य हिस्सा है जिसमें शरीर को रिलेक्स होने का मौका मिलता। साथ ही यह आपके बच्चे के साथ जुड़ने का एक विशेष समय हो सकता है।

इन तमाम आसन के अलावा प्राणायाम का अभ्यास महत्वपूर्ण होता है। श्रावणी रायकर बताती हैं कि लंबे समय तक किए जाने वाले श्वसन का अभ्यास करे सास लम्बी और गहरी तरीके से लें और धीरे से छोड़ें। अगर योग अभ्यास करते वक्त आपको थकान महसूस हो रही हो या किसी भी तरीके का तनाव / दर्द महसूस हो रहा हो तो अभ्यास रोक के कुछ देर के लिए आराम करें। योग प्रक्रिया को कोई ट्रेंन्ड योगा थैरेपिस्ट से ही सीखें ताकि आपको सहायता मिलेगी और सही गलत प्रक्रिया के बारे में जानकारी उपलब्ध होगी।