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Written By: Kishori Mishra | Published : September 11, 2020 12:47 PM IST
After about 20 weeks of pregnancy, the fetus’ kidneys begin producing most of the amniotic fluid.
Spotting During Pregnancy : गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को कई बार स्पॉटिंग की शिकायत होती है। यह स्पॉटिंग पीरियड्स की तरह दिखती हैं। प्रेग्नेंसी में पीरियड्स जैसे ब्लीडिंग का होना असामान्य होता है और यह महिलाओं के लिए परेशानी का कारण हो सकती है। इस वजह से महिलाएं स्पॉटिंग की वजह से काफी परेशान हो जाती हैं। प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग या स्पॉटिंग जैसा होना खतरे की निशानी हो सकती है, क्योंकि कई बार इसके कारण गर्भपात होने का खतरा बढ़ (Spotting During Pregnancy) जाता है।
एक्सपर्ट्स के मुबातिक, प्रेग्नेंसी में स्पॉटिंग होना बहुत ही आम बाता है। 30 से 40 प्रतिशत महिलाओं को सामान्यतौर पर गर्भावस्था के पहले या फिर तीसरे महीने में स्पॉटिंग की समस्या होती है। यह किसी बीमारी का संकेत नहीं होती, लेकिन कई बार यह खतरनाक साबित हो सकती है। स्पॉटिंग सामान्य और असामान्य भी हो सकती है। इसीलिए अगर आपको प्रेग्नेंसी के दौरान स्पॉटिंग की समस्या हो, तो तुरंत डॉक्टर (Spotting During Pregnancy) से संपर्क करें।
जिस तरह गर्भावस्था में सिर दर्द, मॉर्निंग सिकनेस, चक्कर आना और मतली जैसी समस्याएं होती हैं। उसी तरह ब्लीडिंग और स्पॉटिंग जैसे अनुभव होना भी इस दौरान आम बात है। कई बार गर्भवती महिलाएं इसे गर्भपात होना समझ लेती हैं। लेकिन, हर बार ऐसा होना जरूरी नहीं होता है। जब प्रेग्नेंट महिला का फर्टिलाइज़्ड एग गर्भाशय की दीवार पर इम्प्लांट होने की कोशिश करता है, तो इस तरह की स्पॉटिंग होने की संभावना हो सकती है।
प्लेसेंटल एबरप्शन
मिसकैरिज या गर्भपात
प्लेसेंटा प्रीविया
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