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प्रेगनेंसी में इको टेस्ट क्यों किया जाता है? जानिए प्रेगनेंसी में Echo Test से जुड़ी पूरी जानकारी

What is the purpose of an echo test during pregnancy : प्रेग्नेंसी में इको टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। इसके पीछे कई वजह हो सकती है। यह एक सुरक्षित अल्ट्रासाउंड प्रक्रिया है। आइए जानते हैं इस टेस्ट के बारे में विस्तार से-

प्रेगनेंसी में इको टेस्ट क्यों किया जाता है? जानिए प्रेगनेंसी में Echo Test से जुड़ी पूरी जानकारी
pregnancy Ultrasound
VerifiedVERIFIED By: Dr Kekin Gala

Written by Kishori Mishra |Updated : February 12, 2026 12:58 PM IST

Pregnancy Echo Test  : प्रेग्नेंसी किसी भी महिला के जीवन का बेहद ही संवेदनशील और महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान मां और गर्भ में पल रहे शिशु का खासतौर पर ध्यान रखने की जरूरत होती है। मुख्य रूप से आज के समय में महिलाओं की प्रेग्नेंसी काफी ज्यादा हाई रिस्क हो रही हैं। ऐसे रिस्क को समय से पहले कम करने के लिए डॉक्टर्स समय-समय पर कुछ जरूरी टेस्ट और अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह देते हैं। ताकि अगर किसी तरह की परेशानी हो, तो समय पर इसका इलाज हो सके। इन्हीं टेस्ट में इको टेस्ट या फिटल इकोकार्डियोग्राफी (Fetal Echocardiography) भी शामिल है, जिसे काफी जरूरी अल्ट्रासाउंड माना जा रहा है। इस टेस्ट को कराने का उदेश्य समय से पहले बच्चे में हार्ट की किसी भी तरह की परेशानी की पहचान की जा सके। इस लेख की अधिक जानकारी के लिए हमने मुंबई सेंट्रल के वॉकहार्ट हॉस्पिटल के ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. केकिन गाला से बातचीत की है। आइए डॉक्टर से जानते हैं प्रेग्नेंसी में ईको टेस्ट क्यों किया जाता है और किस सप्ताह तक इस टेस्ट को करा लेना चाहिए, इस बारे में विस्तार से बताएंगे। आइए जानते हैं-

डॉक्टर डॉ. केकिन गाला का कहना है कि प्रेग्नेंसी अक्सर उम्मीद से भरी होती है, लेकिन साथ ही कई ऐसे सवाल भी होते हैं जो मन में दबे रहते हैं। माता-पिता की सबसे आम चिंताओं में से एक यह होती है कि क्या उनके बच्चे का दिल नॉर्मल तरीके से बढ़ रहा है। इस सवाल का साफ जवाब देने के लिए फीटल इकोकार्डियोग्राफी, जिसे फीटल इको टेस्ट भी कहते हैं। यह एक फोकस्ड अल्ट्रासाउंड है जो बच्चे के दिल, उसके चैंबर, वाल्व, मुख्य ब्लड वेसल और उनमें खून के बहने के तरीके की बारीकी से जांच करता है।

क्या होता है Echo टेस्ट? - What is Echo Test

ईको का पूरा नाम इकोकार्डियोग्राफी (Echocardiography)  होता है। यह एक अल्ट्रासाउंड है, जिसमें भ्रूण में पल रहे बच्चे के दिल की संरचना (structure) और इसके काम करने की क्षमता को देखा जाता है।  साफ शब्दों में कहे, तो प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले Echo टेस्ट को फीटल ईको टेस्ट कहते हैं। इसमें गर्भ में पल रहे बच्चे के दिल की बनावट, धड़कन, वाल्व, नसें और ब्लड फ्लो को जांचा जाता है। यानि प्रेग्नेंसी में इस टेस्ट को करने का उद्देश्य यह जांच करना है कि बच्चे का दिल सही तरीके से बन रहा है या नहीं।

क्यों किया जाता है प्रेगनेंसी में इको टेस्ट? why is echo test done in pregnancy

  1. गर्भावस्था में ईको टेस्ट कराने का उद्धेश्य जन्म से पहले बच्चे में दिल से जुड़ी किसी भी तरह की बीमारी यानि कंजेनाइटल हार्ट डिजीज की पहचान करना है। आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से-
  2. इस टेस्ट के जरिए यह देखा जाता है कि दिल के चारों चेंबर सही बने हैं या नहीं, वाल्व ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं और ब्लड फ्लो सही दिशा में हो रहा है या नहीं।
  3. Echo टेस्ट के जरिए पहले ही यह पता लगाया जाता है कि बच्चों में जन्म से ही दिल में छेद, वाल्व की खराबी या नसों की गलत बनावट तो नहीं हो रही है न।
  4. हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में ईको टेस्ट काफी जरूरी माना जाता है।
  5. इसके अलावा अगर पहले बच्चे में दिल की समस्या रही हो, तो अगले समय गर्भ धारण करते समय Echo टेस्ट करवाना बहुत ही जरूरी हो जाता है।
  6. अगर मां को डायबिटीज, थायराइड, ऑटोइम्यून डिजीज या कोई वायरल इंफेक्शन हुआ है, तो ऐसे में बच्चे के दिल पर असर पड़ सकता है। इन स्थितियों में ईको टेस्ट बहुत ही जरूरी हो जाता है।

प्रेग्नेंसी के किस सप्ताह में इको टेस्ट किया जाता है? - Which week of pregnancy is Echo test done?

डॉ. केकिन गाला का कहना है कि प्रेगनेंसी में ईको टेस्ट आमतौर पर 18 से 24 सप्ताह के बीच किया जाता है। वहीं, अगर सबसे सही समय की बात करें, तो फीटल ईको टेस्ट 20 से 22 सप्ताह को सबसे बेहतर माना जाता है। क्योंकि इस समय बच्चे का दिल पूरी तरह विकसित हो चुका होता है और इस समय हार्ट का स्ट्रक्चर दूरी तरह से साफ दिखाई देता है।

हालांकि, कुछ मामलों में जरूरत पड़ने पर फीटल ईको 16 सप्ताह के बाद भी किया जा सकता है। ऐसे में अगर आपसे डॉक्टर फीटल ईको टेस्ट कराने के लिए कहे, तो तुरंत इस टेस्ट को करा लें।

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[caption id="attachment_1299834" align="alignnone" width="1200"]Echo test Echo test[/caption]

किन महिलाओं को Echo टेस्ट जरूर कराना चाहिए? - Which women should definitely undergo Echo test?

  • डॉक्टर का कहना है कि कुछ हाई रिस्क फैक्टर्स में फीटल ईको टेस्ट कराने की जरूरत पड़ती है, जो निम्न हैं-
  • अगर मां को डायबिटीज हो, तो इस स्थिति में फीटल ईको टेस्ट करा लेना चाहिए।
  • अगर गर्भवती महिलाओं को थायराइड की परेशानी है, तो उन्हें भी ईको टेस्ट जरूर करा लेना चाहिए।
  • अगर पहले बच्चे में दिल की बीमारी रही हो, तो दूसरे बच्चे में भी ईको टेस्ट करना जरूरी होता है।
  • अगर परिवार में किसी को जन्मजात हार्ट डिजीज हो, तो फीटल ईको अल्ट्रासाउंड करा लें।
  • प्रेगनेंसी में वायरल इंफेक्शन हुआ हो, तो इस टेस्ट को कराना जरूरी होता है।
  • इसके अलावा IVF प्रेगनेंसी में भी फीटल ईको कराने की सलाह दी जाती है।
  • वहीं, अल्ट्रासाउंड में दिल से जुड़ी कोई शंका दिखी हो, तो डॉक्टर आपको ईको टेस्ट कराने के लिए कह सकते हैं।

प्रेग्नेंसी में Echo टेस्ट कैसे किया जाता है? - How is Echo test done in pregnancy

यह टेस्ट बिल्कुल अल्ट्रासाउंड की तरह किया जाता है। आइए जानते हैं इसके स्टेप्स-

  • सबसे पहले ईको टेस्ट में पेट पर जेल लगाया जाता है।
  • इसके बाद मशीन से दिल की इमेज ली जाती है।
  • फिर स्क्रीन पर बच्चे का दिल देखा जाता है।
  • डॉक्टर दिल की धड़कन, वाल्व, नसें और ब्लड फ्लो जांचते हैं।

मालूम हो कि इसमें किसी तरह का कोई दर्द नहीं होता है। यह टेस्ट पूरी तरह से सुरक्षित और रेडिएशन फ्री होता है। इस अल्ट्रासाउंड को करने में लगभग 20 से 40 मिनट का समय लग जाता है।

क्या Echo टेस्ट सुरक्षित होता है? - Is Echo test safe?

  • डॉक्टर की मानें, तो ECho टेस्ट पूरी तरह से सुरक्षित होता है।
  • ईको में कोई रेडिएशन नहीं होता है, यह पूरी तरह से सुरक्षित है।
  • इस टेस्ट में मां या बच्चे को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है।
  • ईको टेसस्ट अल्ट्रासाउंड तकनीक पर आधारित होता है।
  • इसमें किसी तरह का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है।

Echo टेस्ट रिपोर्ट में क्या देखा जाता है? - What is seen in the Echo test report?

डॉक्टर्स ईको टेस्ट रिपोर्ट में हार्ट से जुड़ी लगभग सभी चीजों को देखते हैं, ताकि समय पर हार्ट डिजीज का पता लगाया जा सके।

[caption id="attachment_1299831" align="alignnone" width="1200"]Echo Test Echo Test[/caption]

  • हार्ट चेंबर सही से बने हैं या नहीं।
  • हार्ट वाल्व है या नहीं।
  • हार्ट बीट सही है या नहीं।
  • दिल में ब्लड फ्लो सही से हो रहा है या नहीं।
  • आर्टरी और वेन्स सही है या नहीं।
  • हार्ट की पोजिशन सही है या नहीं।
  • हार्ट साइज बड़ा या छोटा तो नहीं है।

अगर Echo टेस्ट में कोई समस्या मिले तो क्या होता है? - What happens if the Echo test finds a problem?

अगर Echo टेस्ट में कोई हार्ट प्रॉब्लम पाई जाती है, तोड

  • मां को काउंसलिंग दी जाती है।
  • स्पेशलिस्ट डॉक्टर से सलाह कराई जाती है।
  • डिलीवरी प्लान तैयार किया जाता है
  • जन्म के बाद इलाज की तैयारी होती है।
  • जरूरत हो तो NICU फैसिलिटी वाले अस्पताल में डिलीवरी करवाई जाती है
  • इससे बच्चे की जान बचाने की संभावना बहुत बढ़ जाती है।

Echo टेस्ट और सामान्य अल्ट्रासाउंड में अंतर क्या है? - Difference between an Echo test and a normal ultrasound?

सामान्य अल्ट्रासाउंड Echo टेस्ट
इस अल्ट्रासाउंड में बच्चे के पूरे शरीर की जांच होती है।ईको टेस्ट में बच्चे के सिर्फ दिल की जांच की जाती है।
यह अल्ट्रासाइंड सिर्फ आपको बच्चे के शरीर की बनावट की बेसिक जानकारी देता है।इसमें हार्ट का डीप एनालिसिस होता है, जिसमें हार्ट डिजीज का पता लगता है।
सामान्य अल्ट्रासाउंड लगभग हर प्रेग्नेंसी में हर एक महिलाओं को कराने की सलाह दी जाती है।ईको टेस्ट किसी खास तरह के केस में कराने की सलाह दी जाती  है, जैसे- डायबिटिक महिलाएं, थायराइड से पीड़ित महिलाएं, इत्यादि।

फीटल इको टेस्ट में कितना खर्च होता है? - What is the cost of fetal echo in pregnancy?

फीटल इको में कितना खर्चा आएगा ये अस्पताल और एरिया पर निर्भर करता है। इसकी सामान्य लागत 2000 रुपये से लेकर 8500 रुपये के बीच हो सकती है। इसके अलावा टेक्नीक जैसे- 2D, 3D, 4D के आधार पर फीस अलग-अलग हो सकती है। वहीं, बड़े शहरों में खर्चा ज्यादा भी हो सकता है।

इको टेस्ट खाली पेट होता है क्या? - Is echo test done on empty stomach

कई अल्ट्रासाउंड खाली पेट की जाती है। लेकिन फीटल ईको अल्ट्रासाउंड में खाली पेट की जरूरत नहीं होती है। आप इस टेस्ट को अच्छे से खा पीकर किसी भी समय करवा सकते हैं। मामलूल हो कि यह ईको टेस्ट एक सुरक्षित अल्ट्रासाउंड प्रोसेस है, जिसमें आपको किसी तरह की खास तैयारी की जरूरत नहीं पड़ती है। इतना ही नहीं, इस अल्ट्रासाउंड में आपको यूरिन होल्ड करने की भी आवश्यकता नहीं है।

लेकिन ध्यान रखें कि जब भी अल्ट्रासाउंड कराने जाएं, तो हमेशा ढीले कपड़े पहनें। यह टेस्ट आमतौर पर प्रेगनेंसी के 18 से 24 सप्ताह के बीच किया जाता है। जिस दिन अल्ट्रासाउंड कराने जाएं, उस दिन पेट पर लोशन या क्रीम न लगाएं।

क्या इको टेस्ट में दर्द होता है?  - Is the Echo test painful?

जी नहीं, इको टेस्ट एक सुरक्षित अल्ट्रासाउंड प्रोसेस है, जिसमें आपको किसी भी तरह का दर्द महसूस नहीं होता है। यह सामान्य अल्ट्रासाउंड की तरह होता है।

क्या गर्भावस्था में इकोस सुरक्षित हैं? - Is echo test safe during pregnancy

प्रेग्नेंसी में ईको टेस्ट कराना पूरी तरह से सुरक्षित है। यह टेस्ट हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में काफी जरूरी होता है, ताकि बच्चे को अगर किसी तरह की परेशानी, हो तो फौरन इसका इलाज हो सके। इसलिए इस अल्ट्रासाउंड को बिना घबराए कराएं, ताकि आपको परेशानी न हो।

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Highlights

  • प्रेग्नेंसी में फीटल इको 18 से 24 सप्ताह के बीच कराना चाहिए।
  • यह एक सुरक्षित अल्ट्रासाउंड प्रक्रिया है।
  • अल्ट्रासाउंड के लिए हमेशा ढीले कपड़े पहनकर जाएं।