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Pregnancy Echo Test : प्रेग्नेंसी किसी भी महिला के जीवन का बेहद ही संवेदनशील और महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान मां और गर्भ में पल रहे शिशु का खासतौर पर ध्यान रखने की जरूरत होती है। मुख्य रूप से आज के समय में महिलाओं की प्रेग्नेंसी काफी ज्यादा हाई रिस्क हो रही हैं। ऐसे रिस्क को समय से पहले कम करने के लिए डॉक्टर्स समय-समय पर कुछ जरूरी टेस्ट और अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह देते हैं। ताकि अगर किसी तरह की परेशानी हो, तो समय पर इसका इलाज हो सके। इन्हीं टेस्ट में इको टेस्ट या फिटल इकोकार्डियोग्राफी (Fetal Echocardiography) भी शामिल है, जिसे काफी जरूरी अल्ट्रासाउंड माना जा रहा है। इस टेस्ट को कराने का उदेश्य समय से पहले बच्चे में हार्ट की किसी भी तरह की परेशानी की पहचान की जा सके। इस लेख की अधिक जानकारी के लिए हमने मुंबई सेंट्रल के वॉकहार्ट हॉस्पिटल के ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. केकिन गाला से बातचीत की है। आइए डॉक्टर से जानते हैं प्रेग्नेंसी में ईको टेस्ट क्यों किया जाता है और किस सप्ताह तक इस टेस्ट को करा लेना चाहिए, इस बारे में विस्तार से बताएंगे। आइए जानते हैं-
डॉक्टर डॉ. केकिन गाला का कहना है कि प्रेग्नेंसी अक्सर उम्मीद से भरी होती है, लेकिन साथ ही कई ऐसे सवाल भी होते हैं जो मन में दबे रहते हैं। माता-पिता की सबसे आम चिंताओं में से एक यह होती है कि क्या उनके बच्चे का दिल नॉर्मल तरीके से बढ़ रहा है। इस सवाल का साफ जवाब देने के लिए फीटल इकोकार्डियोग्राफी, जिसे फीटल इको टेस्ट भी कहते हैं। यह एक फोकस्ड अल्ट्रासाउंड है जो बच्चे के दिल, उसके चैंबर, वाल्व, मुख्य ब्लड वेसल और उनमें खून के बहने के तरीके की बारीकी से जांच करता है।
ईको का पूरा नाम इकोकार्डियोग्राफी (Echocardiography) होता है। यह एक अल्ट्रासाउंड है, जिसमें भ्रूण में पल रहे बच्चे के दिल की संरचना (structure) और इसके काम करने की क्षमता को देखा जाता है। साफ शब्दों में कहे, तो प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले Echo टेस्ट को फीटल ईको टेस्ट कहते हैं। इसमें गर्भ में पल रहे बच्चे के दिल की बनावट, धड़कन, वाल्व, नसें और ब्लड फ्लो को जांचा जाता है। यानि प्रेग्नेंसी में इस टेस्ट को करने का उद्देश्य यह जांच करना है कि बच्चे का दिल सही तरीके से बन रहा है या नहीं।
डॉ. केकिन गाला का कहना है कि प्रेगनेंसी में ईको टेस्ट आमतौर पर 18 से 24 सप्ताह के बीच किया जाता है। वहीं, अगर सबसे सही समय की बात करें, तो फीटल ईको टेस्ट 20 से 22 सप्ताह को सबसे बेहतर माना जाता है। क्योंकि इस समय बच्चे का दिल पूरी तरह विकसित हो चुका होता है और इस समय हार्ट का स्ट्रक्चर दूरी तरह से साफ दिखाई देता है।
हालांकि, कुछ मामलों में जरूरत पड़ने पर फीटल ईको 16 सप्ताह के बाद भी किया जा सकता है। ऐसे में अगर आपसे डॉक्टर फीटल ईको टेस्ट कराने के लिए कहे, तो तुरंत इस टेस्ट को करा लें।
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Echo test[/caption]
यह टेस्ट बिल्कुल अल्ट्रासाउंड की तरह किया जाता है। आइए जानते हैं इसके स्टेप्स-
मालूम हो कि इसमें किसी तरह का कोई दर्द नहीं होता है। यह टेस्ट पूरी तरह से सुरक्षित और रेडिएशन फ्री होता है। इस अल्ट्रासाउंड को करने में लगभग 20 से 40 मिनट का समय लग जाता है।
डॉक्टर्स ईको टेस्ट रिपोर्ट में हार्ट से जुड़ी लगभग सभी चीजों को देखते हैं, ताकि समय पर हार्ट डिजीज का पता लगाया जा सके।
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Echo Test[/caption]
अगर Echo टेस्ट में कोई हार्ट प्रॉब्लम पाई जाती है, तोड
| सामान्य अल्ट्रासाउंड | Echo टेस्ट |
| इस अल्ट्रासाउंड में बच्चे के पूरे शरीर की जांच होती है। | ईको टेस्ट में बच्चे के सिर्फ दिल की जांच की जाती है। |
| यह अल्ट्रासाइंड सिर्फ आपको बच्चे के शरीर की बनावट की बेसिक जानकारी देता है। | इसमें हार्ट का डीप एनालिसिस होता है, जिसमें हार्ट डिजीज का पता लगता है। |
| सामान्य अल्ट्रासाउंड लगभग हर प्रेग्नेंसी में हर एक महिलाओं को कराने की सलाह दी जाती है। | ईको टेस्ट किसी खास तरह के केस में कराने की सलाह दी जाती है, जैसे- डायबिटिक महिलाएं, थायराइड से पीड़ित महिलाएं, इत्यादि। |
फीटल इको में कितना खर्चा आएगा ये अस्पताल और एरिया पर निर्भर करता है। इसकी सामान्य लागत 2000 रुपये से लेकर 8500 रुपये के बीच हो सकती है। इसके अलावा टेक्नीक जैसे- 2D, 3D, 4D के आधार पर फीस अलग-अलग हो सकती है। वहीं, बड़े शहरों में खर्चा ज्यादा भी हो सकता है।
कई अल्ट्रासाउंड खाली पेट की जाती है। लेकिन फीटल ईको अल्ट्रासाउंड में खाली पेट की जरूरत नहीं होती है। आप इस टेस्ट को अच्छे से खा पीकर किसी भी समय करवा सकते हैं। मामलूल हो कि यह ईको टेस्ट एक सुरक्षित अल्ट्रासाउंड प्रोसेस है, जिसमें आपको किसी तरह की खास तैयारी की जरूरत नहीं पड़ती है। इतना ही नहीं, इस अल्ट्रासाउंड में आपको यूरिन होल्ड करने की भी आवश्यकता नहीं है।
लेकिन ध्यान रखें कि जब भी अल्ट्रासाउंड कराने जाएं, तो हमेशा ढीले कपड़े पहनें। यह टेस्ट आमतौर पर प्रेगनेंसी के 18 से 24 सप्ताह के बीच किया जाता है। जिस दिन अल्ट्रासाउंड कराने जाएं, उस दिन पेट पर लोशन या क्रीम न लगाएं।
जी नहीं, इको टेस्ट एक सुरक्षित अल्ट्रासाउंड प्रोसेस है, जिसमें आपको किसी भी तरह का दर्द महसूस नहीं होता है। यह सामान्य अल्ट्रासाउंड की तरह होता है।
प्रेग्नेंसी में ईको टेस्ट कराना पूरी तरह से सुरक्षित है। यह टेस्ट हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में काफी जरूरी होता है, ताकि बच्चे को अगर किसी तरह की परेशानी, हो तो फौरन इसका इलाज हो सके। इसलिए इस अल्ट्रासाउंड को बिना घबराए कराएं, ताकि आपको परेशानी न हो।