साधारण प्रेगनेंसी और आईवीएफ में क्‍या अंतर है, जानिए हेल्दी आईवीएफ प्रेगनेंसी के लिए एक्‍सपर्ट की सलाह

आजकल अधिकांश लोग इनफर्टिलिटी के लिए आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) की मदद ले रहे हैं। मगर कुछ बाते हैं, जिन्‍हें आईवीएफ कराने वालों को पता होनी चाहिए।

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Written By: Atul Modi | Published : May 25, 2021 7:11 PM IST

दुनिया में 8 में से एक महिला को गर्भधारण करने के लिए मदद की आवश्यकता होती है। आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) ऐसे केसों में सबसे अधिक प्रभावी और प्रसिद्ध तरीका माना गया है। इसकी मदद से कपल्स बायोलॉजिकल बेबी पा सकते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान महिला को पहले ऐसी दवाइयां दी जाती हैं जिससे महीने में उसकी ओवरीज और अधिक अंडे बना सके। इसके बाद महिला के शरीर से मैच्योर एग को एक साधारण प्रक्रिया के द्वारा निकाल कर उसके पार्टनर के स्पर्म के साथ फर्टिलाइज करवाया जाता है और फिर एंब्रियो को महिला के शरीर में वापिस रख दिया जाता है। आईवीएफ एक बहुत लंबी प्रक्रिया होती है और इसमें बहुत समय लग सकता है और इसमें आपको बहुत धैर्य और हिम्मत की जरूरत होती है। इसके कारण आप शारीरिक के साथ-साथ मानसिक रूप से भी कमजोर हो सकते हैं। इसलिए हेल्दी प्रेगनेंसी के लिए यहां हम आपको कुछ एक्‍सपर्ट टिप्‍स शेयर कर रहे हैं।

आईवीएफ की प्रेगनेंसी और साधारण प्रेगनेंसी में अंतर है?

कुछ तरीकों में आईवीएफ प्रेगनेंसी साधारण प्रेगनेंसी से बहुत अलग हो सकती है। गर्भधारण की प्रक्रिया की शुरुआत से ही लें, यह आपके लिए एक साधारण प्रक्रिया से बहुत अलग महसूस करवा सकती है। शारीरिक रूप से भी और मानसिक रूप से भी। ऐसा तब अधिक होता है जब कपल बहुत लम्बे समय से गर्भ धारण करने में असफल हो रहे हों। जबकि, सामान्य प्रेगनेंसी में मां को एक या दो महीने तक कई बार पता भी नहीं चलता है कि वह प्रेग्नेंट है। लेकिन आईवीएफ में मां को जब उसके अंदर भ्रूण रखा जाता है तब से ही पता चल जाता है।

आईवीएफ प्रेगनेंसी वाली महिला को अधिक चिंता रहती है और वह प्रेगनेंसी के दौरान काफी नाजुक और कमजोर स्थितियों से भी गुजरती है। आईवीएफ प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत अधिक मेडिकल मॉनिटरिंग से गुजरना पड़ता है। लेकिन सामान्य प्रेगनेंसी में ऐसा नहीं होता है। अगर यह प्रेगनेंसी 10 हफ्तों तक सफल हो जाती है तो आगे फिर आपको एक नॉर्मल प्रेगनेंसी के जैसा ही महसूस होगा। 10 हफ्तों से पहले के समय में आईवीएफ की प्रेगनेंसी में भी आपको वही चीजें करनी चाहिए या नहीं करनी चाहिए जो एक सामान्य प्रेगनेंसी महिला करती हैं।

पहले 10 हफ्तों में हेल्दी आईवीएफ प्रेगनेंसी के लिए एक्‍सपर्ट टिप्स

आईवीएफ प्रेगनेंसी के दौरान डाइट टिप्‍स: आपके शरीर को हेल्दी रखने के लिए एक संतुलित डाइट जिसमें फल, सब्जी और प्रोटीन की अच्छी खासी मात्रा हो वह जरूरी होती है। आपको होल ग्रेन जैसे क्विनोआ, फलियां, डेयरी उत्पाद, नट आदि जैसे हेल्दी फैट भी अपनी डाइट में शामिल करने चाहिए। रेड मीट, रिफाइंड ग्रेन और प्रोसेस्ड फूड से दूर रहें। कैफेन, नमक, शराब आदि से भी दूर रहें।

आईवीएफ प्रेगनेंसी के दौरान वर्क आउट करना: बहुत सी महिलाओं का मानना है कि आईवीएफ प्रेगनेंसी के दौरान वर्क आउट नहीं करना चाहिए। लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो आपको अगर कोई गंभीर कठिनाइयां नहीं है तो नियमित रूप से एक्सरसाइज करना चाहिए। इस दौरान आप वॉकिंग, योग और स्ट्रेचिंग कर सकती हैं।

इन केमिकल्स को अवॉयड करें: इस प्रेगनेंसी के दौरान आपको वह चीजें अवॉइड करनी चाहिए जिसमें एंडोक्राइन डिसर्पिंग केमिकल्स होते हैं। यह केमिकल आपके हार्मोन, रिप्रोडक्टिव हेल्थ के लिए सही नहीं होते हैं।

  • फॉर्मलडिहाइड (नेल पॉलिश में पाया जाता है)
  • बीपीए और फिनोल (प्लास्टिक के कंटेनर और खाद्य पैकेजिंग)
  • ट्राइक्लोसन, बेंजोफेनोने, और पैराबेन (साबुन और सौंदर्य प्रसाधनों की जाँच करें और जिनमें ये केमिकल हैं उनसे बचें)
  • कपड़ों और फर्नीचर पर इस्तेमाल होने वाले ब्रोमिनेटेड फ्लेम रिटार्डेंट्स
  • नॉन-स्टिक कुकवेयर और दाग-प्रतिरोधी सामग्री में पाए जाने वाले परफ्लुओरिनेटेड कंपाउंड
  • प्लास्टिक में पाए जाने वाले पी एच थैलेट्स

नींद: शोध के मुताबिक जो महिलाएं 8 घंटे सोती हैं वह उन महिलाओं से अधिक हेल्दी प्रेगनेंसी का अनुभव करती हैं जो इससे अधिक या कम सोती हैं। स्वस्थ गर्भधारण के लिए हर रात एक आरामदायक नींद लें।

(Inputs: Doctor Durga Rao, Co-Founder and Medical Director, Oasis Fertility.)

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