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सेंकेंडरी इंफर्टिलिटी क्या है? फर्टिलिटी एक्सपर्ट से जानिए किन लोगों को हो रही है यह समस्या

कई बार कपल्स को पहली बार गर्भधारण करने में आसानी होती है लेकिन, दोबारा कंसीव करना उनके लिए मुश्किल हो जाता है। यह इंफर्टिलिटी का एक गम्भीर लक्षण भी हो सकता है जिसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 23, 2025 6:08 PM IST

Secondary infertility-सेकेंडरी इंफर्टिलिटी एक ऐसी कंडीशन है जिसमें ऐसे कपल्स जिन्हें पहले से कोई संतान हो और जब वे दोबारा गर्भधारण करने की कोशिश करें तो उन्हें कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इस स्थिति को सेंकेडरी इंफर्टिलिटी कहा जाता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस तरह के मामले बढ़ रहे हैं। कई बार कपल्स यह मानकर मेडिकल हेल्प नहीं लेते या टालते रहते हैं कि उन्हें फर्टिलिटी से जुड़ी कोई समस्या तो नहीं होगी क्योंकि उन्होंने पहली बार आसानी से कंसीव कर लिया था।  लेकिन डॉक्टरी मदद लेने में की गयी यही देरी कंडीशन को और बिगाड़ देती है। समय पर जांच, जीवनशैली में बदलाव और असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजीज (ART) तक पहुंच, इस समस्या से निपटने और दंपतियों को मातृत्व-पितृत्व का सपना पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

सेकेंडरी इंफर्टिलिटी को इस तरह परिभाषित किया जाता है कि जब कोई महिला पहले बिना किसी फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के बच्चे को जन्म दे चुकी हो, लेकिन उसके बाद गर्भधारण करने या गर्भ को पूरे समय तक बनाए रखने में असमर्थ हो।

सेंकेडरी इंफर्टिलिटी के कारण

नोएडा स्थित मदरहुड फर्टिलिटी एंड आईवीएफ की सीनियर स्पेशलिस्ट डॉ. मांडवी राय ने कहा कि, “सेकेंडरी इंफर्टिलिटी प्राइमरी इंफर्टिलिटी से अलग होती है और अक्सर दंपतियों को अचानक हैरान कर देती है, क्योंकि उन्हें लगता है कि दूसरी बार गर्भधारण में कोई दिक्कत नहीं होगी। इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे 35 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में फर्टिलिटी का कम होना, हार्मोनल समस्याएं (जैसे थायरॉइड या पीसीओएस), प्रजनन से जुड़ी दिक्कतें (जैसे ब्लॉक्ड फेलोपियन ट्यूब्स, एंडोमेट्रियोसिस या पुरुषों में कम स्पर्म काउंट)। जीवनशैली से जुड़ी आदतें जैसे तनाव, मोटापा, धूम्रपान, शराब और गलत खानपान भी इसका कारण बन सकती हैं। कभी-कभी पिछली प्रेग्नेंसी की जटिलताएं या संक्रमण भी असर डालते हैं।

सेकेंडरी इंफर्टिलिटी के लक्षण क्या हैं?

इसके मुख्य लक्षण है—लंबे समय तक कोशिश करने के बाद भी गर्भधारण न होना। महिलाओं को अनियमित पीरियड्स, पेल्विक दर्द या असामान्य ब्लीडिंग हो सकती है, जबकि पुरुषों में स्पर्म की क्वालिटी घट सकती है।

यह समस्या कपल्स में मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद पैदा कर सकती है और रिश्तों पर भी असर डालती है। सामाजिक दबाव से यह परेशानी और बढ़ जाती है। अगर पीसीओएस या एंडोमेट्रियोसिस जैसी बीमारियों का इलाज समय पर न किया जाए तो यह आगे चलकर और मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं।”

सेकेंडरी फर्टिलिटी से बचने के उपाय क्या हैं?

डॉ. राय ने आगे कहा कि, “जल्दी मेडिकल जांच कराना बहुत जरूरी है। डॉक्टर दोनों पार्टनर्स की फर्टिलिटी जांच करेंगे, जैसे हार्मोन टेस्ट, स्पर्म टेस्ट और स्कैन। समस्या के हिसाब से इलाज में जीवनशैली बदलना (खानपान और व्यायाम), तनाव कम करना, दवाइयां, छोटे ऑपरेशन या सहायक तकनीकें जैसे आययूआय और आईवीएफ शामिल हो सकती हैं। समय पर इलाज करने से सफलता की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए, अगर दंपति दूसरी बार गर्भधारण में दिक्कत का सामना कर रहे हैं, तो उन्हें देर किए बिना डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। सही समय पर इलाज और आधुनिक तकनीक के साथ सेकेंडरी इंफर्टिलिटी को अक्सर सफलतापूर्वक ठीक किया जा सकता है, जिससे दंपतियों को उम्मीद मिलती है।”

Disclaimer : प्र‍िय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्‍य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

FAQs

सेकेंडरी इंफर्टिलिटी के लक्षण क्या हैं?

गर्भधारण न कर पाना,  अनियमित पीरियड्स, पेल्विक दर्द और असामान्य ब्लीडिंग जैसी समस्याएं सेकेंडरी इंफर्टिलिटी का लक्षण हो सकती हैं।

महिलाओं में इंफर्टिलिटी के कारण क्या हैं?

हार्मोन्स इम्बैलेंस, तनाव, पीरियड्स से जुड़ी समस्याएं,  थायरॉइड और फाइब्रॉइड जैसी समस्याओं के कारण महिलाओं में इंफर्टिलिटी की समस्या बढ़ सकती है।