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Written By: Jitendra Gupta | Published : May 11, 2023 12:46 PM IST
प्रेगनेंसी में पीरियड्स डेट का पता होना कितना जरूरी? जानें महिला के रिप्रोडक्टिव सिस्टम से जुड़ी जरूरी जानकारी
फर्टीलिटी के बारे में जागरुकता, महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य को समझने के लिए बेहद ज़रूरी है। महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य एवं माहवारी चक्र को समझ कर फर्टीलिटी के बारे में बेहतर जाना जा सकता है और गर्भावस्था में महिलाओं के स्वास्थ्य को सुनिश्चित किया जा सकता है। नोएडा स्थित जेपी हॉस्पिटल, डिपार्टमेन्ट ऑफ आईवीएफ एंड इंफर्टिलिटी, कंसलटेंट, डॉ. अमरीन सिंह का कहना है कि महिलाओं के प्रजनन तंत्र में ओवरीज, फैलोपियन ट्यूब्स, यूट्रस, सर्विक्स और वजाइना होते हैं। ओवरीज में अण्डे बनते हैं, जिन्हें फैलोपियन ट्यूब के जरिए यूट्रस में लाया जाता है, जहां अण्डा फर्टिलाइज हो कर गर्भ (बच्चे) में बदल जाता है। सर्विक्स के जरिए शुक्राणु यूट्रस में आते हैं।
माहवारी एक जटिल प्रक्रिया है, जो शरीर के गर्भधारण के लिए तैयार करती है। यह चक्र मासिक धर्म के पहले दिन शुरू होकर 28वें दिन खत्म होता है। माहवारी चक्र के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरान हार्मोन बनते हैं, जिनकी वजह से यूट्रस की भीतरी सतह मोटी होकर अण्डे के विकसित होने की तैयारी कर लेती है। अगर फर्टीलाज़ेशन नहीं होता तो यूट्रस (गर्भाश्य) का अस्तर झड़ जाता है, इसी को मासिक धर्म कहते हैं।
फर्टीलिटी का अर्थ है गर्भधारण करने की क्षमता, जिसके बाद महिला गर्भवती हो जाती है। जिस समय ओवरी से अण्डे निकल कर यूट्रस में आते हैं, उस समय महिला में गर्भधारण की संभावना सबसे अधिक होती है। ऐसा अक्सर माहवारी चक्र के बीच में होता है, हालांकि यह समय हर महिला में अलग हो सकता है।
ये वे तरीके हैं जिनके द्वारा महिला के माहवारी चक्रपर निगरानी रखी जाती है और उन दिनों को पहचाना जा सकता है जब महिला में फर्टीलिटी यानि गर्भधारण करने की संभावना सबसे अधिक होती है।
1-बेसल बॉडी टेम्परेचर चार्टिंगः इसमें हर सुबह शरीर के तापमान की जांच की जाती है, अक्सर ओव्यूलेशन (अण्डा जब यूट्रस में आता है) तक तापमान थोड़ अधिक होता है।
2-सरवाइकल म्यूकस पर निगरानीः इसमें माहवारी चक्र के दौरान सर्वाइकल के म्यूकस में होने वाले बदलावों पर निगरानी रखी जाती है और उन दिनों का पता लगाया जाता है जब म्यूकस सबसे ज्यादा फर्टाइल हो।
3-ओव्यूलेशन प्रेडिक्टर किटः यह किट ल्यूटिनाइज़िंग हॉर्मोन में बढ़ोतरी को पहचान लेता है, ऐसा ओव्यूलेशन से ठीक पहले होता है। इससे पता चल जाता है कि अगले 12-36 घण्टे में ओव्यूलेशन हो जाएगा।
4-सिम्प्टोथर्मल तरीका- इसमें बीबीटी चार्टिंग, सरवाइकल म्यूकस माॅनिटरिंग और ओव्यूलेशन प्रेडिक्टर किट का संयोजन काम में लिया जाता है। ताकि यह पता लगाया जा सके कि माहवारी चक्र के दौरान गर्भधारण की संभावना कब सबसे अधिक है।
इन तरीकों के बारे में जागरुकता या जानकारी का उपयोग परिवार नियोजन में किया जा सकता है। इससे पता चल जाता है कि माहवारी चक्र के कौनसे दिनों में गर्भधारण की संभावना सबसे अधिक है। और अगर आप अभी गर्भधारण नहीं करना चाहती हैं तो इन दिनों के दौरान आप सुरक्षित यौन संबंध बना सकती हैं। इस दौरान यौन संबंध बनाने से गर्भधारण की संभावना को बढ़ाया जा सकता है।