IVF ट्रीटमेंट क्या है? जानें इसकी प्रक्रिया, सफलता दर, जोखिम और खर्चा

IVF Treatment in Hindi: जो कपल्स नेचुरल तरीके से कंसीव नहीं कर पाते हैं, उनके लिए आईवीएफ एक बेस्ट ऑप्शन साबित हो सकता है। जानें, क्या है इसकी प्रक्रिया, सफलता दर और खर्चा-

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Written By: Anju Rawat | Updated : July 25, 2025 10:27 AM IST

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Medically Verified By: Dr. Shobha Gupta

IVF Treatment: आजकल ज्यादातर लोग 30 की उम्र के बाद शादी कर रहे हैं। ज्यादा उम्र में शादी के बाद कई तकलीफों से गुजरना पड़ता है। इसमें सबसे आम है-इनफर्टिलिटी। यानी ज्यादा उम्र में शादी करने के बाद महिलाओं को कंसीव करने में मुश्किल हो रही है। यही वजह है कि आज के दौर में कई पति-पत्नियों को प्राकृतिक तरीके से संतान सुख नहीं मिल पा रहा है। सालों से कोशिश करने के बाद भी वे नेचुरल तरीके से कंसीव नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा, कुछ स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से भी कंसीव करना मुश्किल हो जाता है। जो कपल प्राकृतिक तरीके से पेरेंट्स नहीं बन पाते हैं, उनके लिए आईवीएफ ट्रीट्रमेंट (IVF Treatment) को बेस्ट ऑप्शन माना जाता है। आजकल कई कपल्स पेरेंट्स बनने या संतान सुख पाने के लिए आईवीएफ का सहारा ले रहे हैं।

आपको बता दें कि IVF (In Vitro Fertilization) में महिला और पुरुष के अंडाणु (एग) और शुक्राणु (स्पर्म) को शरीर से बाहर निकालकर लैब में एक साथ मिलाया जाता है। जब यह भ्रूण तैयार हो जाता है, तो महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है। आईवीएफ में इसी प्रक्रिया के जरिए महिला को प्रेग्नेंट किया जाता है। यह ट्रीटमेंट कई कपल्स के लिए उम्मीद की किरण है। हालांकि, यह प्रक्रिया काफी लंबी और खर्चीली हो सकती है। आज भी कई लोग आईवीएफ के बारे में ज्यादा जागरूक नहीं है। यही वजह है कि ईवीएफ के बारे में लोगों के बीच में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 25 जुलाई को विश्व आईवीएफ दिवस (World IVF Day) मनाया जाता है। आइए, आज इसी मौके पर वृंदावन और नई दिल्ली स्थित मदर्स लैप आईवीएफ सेंटर की चिकित्सा निदेशक, स्त्री रोग और आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. शोभा गुप्ता से जानते हैं आईवीएप की प्रक्रिया, सफलता दर, खर्चा और जोखिम के बारे में विस्तार से-

आईवीएफ की प्रक्रिया- IVF Treatment Process in Hindi

आईवीएफ के कई चरण होते हैं। आइए, इसके बारे में विस्तार से जानते हैं-

फर्टिलिटी की जांच

आईवीएफ ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले महिला और पुरुष, दोनों की मेडिकल जांच होती है। इसमें डॉक्टर फर्टिलिटी की जांच करते हैं। सबसे पहले हार्मोन, अंडाणु, शुक्राणु और बच्चेदानी की स्थिति चेक की जाती है। इसके बाद ही आईवीएफ की प्रक्रिया को शुरू किया जाता है।

अंडाणु बनाना

फर्टिलिटी की जांच के बाद महिला को हार्मोनल इंजेक्शन लगाए जाते हैं। हार्मोनल इंजेक्शन से अंडाशय में एक बार में ही कई अंडाणु बनते हैं। हालांकि, आमतौर पर महिला के शरीर में एक ही एग बनता है। लेकिन, आईवीएफ के दौरान ज्यादा एग्स की जरूरत होती है। इसलिए महिला को इंजेक्शन दिए जाते हैं।

IVF process

अंडाणु निकालना

जब अंडाशय में अंडाणु तैयार हो जाते हैं, तो डॉक्टर एक छोटी सर्जरी की मदद से इन एग्स को बाहर निकाल देते हैं। अंडाणु निकालने की प्रक्रिया में महिला को एनेस्थीसिया दिया जाता है।

शुक्राणु लेना

इसके बाद पुरुष से शुक्राणु का सैंपल लिया जाता है। फिर इसमें से कुछ हेल्दी शुक्राणुओं को चुना जाता है। ताकि इन्हें अंडाणु के साथ निषेचित किया जा सके।

भ्रूण बनाना

जब अंडाणु और शुक्राणु, दोनों को निकाल दिया जाता है तो फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसमें लैब में अंडाणु और शुक्राणु को एक साथ मिलाया जाता है। जब दोनों मिल जाते हैं, तो भ्रूण तैयार हो जाता है। इसके बाद भ्रूण को 3 से 5 दिनों तक लैब में विकसित होने दिया जाता है।

भ्रूण ट्रांसफर करना

जब भ्रूण विकसित हो जाता है, जो उसे महिला के गर्भाशय में डाला जाता है। यह प्रक्रिया दर्दरहित होती है। इसमें ज्यादा समय नहीं लगता है।

प्रेग्नेंसी टेस्ट

जब भ्रूण को गर्भाशय में ट्रांसफर कर दिया जाता है, तो उसके 12-14 दिन बाद महिला का प्रेग्नेंसी टेस्ट होता है। अगर सारी चीजें सही रहती है, तो प्रेग्नेंसी पॉजिटिव आ जाती है।

IVF की सफलता दर कितनी है?

जब भी कोई कपल आईवीएफ करवाना चाहता है, तो उनके मन में सबसे पहला सवाल सफलता दर को लेकर होता है। तो आपको बता दें कि आईवीएफ की सफलता दर 100 फीसदी नहीं है। लेकिन, ज्यादातर मामलों में आईवीएफ ट्रीटमेंट सफल होता है। कई कपल्स को आईवीएफ की मदद से पेरेंट्स बनने का सुख प्राप्त हुआ है। इसके अलावा, सफलता दर महिला की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति पर भी निर्भर करती है।

  • 30 साल से कम उम्र में सफलता दर: 50- 60 फीसदी
  • 30-35 साल में: 40- 50 फीसदी
  • 35-40 साल में: 30- 40 प्रतिशत
  • 40 से ऊपर: 20 प्रतिशत या उससे कम

कई बार पहली बार में सफलता नहीं मिल पाती। लेकिन, दूसरी या तीसरी बार आईवीएफ करवाने से सफलता मिल जाती है। आईवीएफ फेल होने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।

IVF में क्या-क्या जोखिम हो सकते हैं?

वैसे तो आईवीएफ ट्रीटमेंट काफी सुरक्षित है। लेकिन, आईवीएफ करवाने के कुछ दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं।

  1. हार्मोनल रिएक्शन: आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान महिला को अंडाणु बनने के इंजेक्शन दिए जाते हैं। इस दौरान महिला को पेट फूलना, उल्टी या भारीपन जैसा महसूस हो सकता है।
  2. ओवेरियन हाइपरस्टिम्यूलेशन सिंड्रोम (OHSS): यह एक ऐसी स्थिति है, जब ओवरी जरूरत से ज्यादा अंडाणु बना लेती है। इसकी वजह से अंडाशय में सूजन आ सकती है।
  3. जुड़वां या तीन बच्चों की संभावना: आईवीएफ में एक से ज्यादा भ्रूण गर्भाशय में ट्रांसफर किए जाते हैं, इसकी वजह से जुड़वा या तीन बच्चों की संभावना ज्यादा रहती है।
  4. तनाव: आईवीएफ ट्रीटमेंट के दौरान शारीरिक ही नहीं, मानसिक तनाव से भी गुजरना पड़ता है। आईवीएफ की असफलता कपल्स में तनाव पैदा कर सकता है।

IVF ट्रीटमेंट में कितना खर्चा आता है?

आईवीएफ ट्रीटमेंट का खर्चा कई चीजों पर निर्भर करता है। आप किस देश, शहर और क्लिनिक से करवा रहे हैं, इस पर खर्चा निर्भर करता है। लेकिन, अगर सामान्य आईवीएफ के खर्चे की बात की जाए, तो यह 3 लाख तक हो सकता है। अगर दूसरी और तीसरी बार आईवीएफ करवाया जाता है, तो यह महंगा हो सकता है।

IVF ट्रीटमेंट किन लोगों के लिए फायदेमंद है?

  • जो कपल्स प्राकृतिक तरीके से पेरेंट्स बनने में असमर्थ हैं, उनके लिए आईवीएफ तकनीक बेहद फायदेमंद साबित हो रही है।
  • जो कपल्स एक साल से ज्यादा समय से कोशिश कर रहे हैं, लेकिन नेचुरल तरीके से बच्चा नहीं हो रहा है।
  • अगर महिला की फॉलोपियन ट्यूब ब्लॉक है, तो आईवीएफ ट्रीटमेंट लिया जा सकता है।
  • शुक्राणु कम या कमजोर होने पर भी आईवीएफ तकनीक का सहारा लिया जा सकता है।
  • अगर बार-बार गर्भपात हो रहा है, तो भी आईवीएफ लिया जा सकता है।
  • महिला को एंडोमेट्रियोसिस या PCOS जैसी समस्याएं होने पर भी आईवीएफ लेना अच्छा विकल्प है।
  • अगर आपको उम्र 35 साल से ज्यादा है, तो प्रेग्नेंसी के लिए आईवीएफ का ऑप्शन लिया जा सकता है।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

FAQs

आईवीएफ में कितने इंजेक्शन लगते हैं?

आईवीएफ में आमतौर पर 10 से 20 इंजेक्शन लग सकते हैं।

एक महिला कितनी बार आईवीएफ करवा सकती है?

वैसे तो एक महिला आईवीएफ कई बार करवा सकती है, अगर वह शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार हो। लेकिन, डॉक्टर सेहत और उम्र के अनुसार ही आईवीएफ करवाने की सलाह देते हैं।

आईवीएफ के बाद पीरियड कब आता है?

अगर प्रेग्नेंसी नहीं होती है, तो आईवीएफ के बाद पीरियड आमतौर पर 1-2 सप्ताह के भीतर आ जाता है।

आईवीएफ कितने दिनों में होता है?

आईवीएफ की पूरी प्रक्रिया में आमतौर पर 4 से 6 सप्ताह लग जाते हैं।

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