... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Yogita Yadav | Published : July 18, 2018 7:00 PM IST
नॉर्मल डिलीवरी की तुलना में सिजेरियन डिलीवरी में मां को बहुत कम दर्द झेलना पड़ता है। डिलीवरी के दर्द से बचने के लिए भी कुछ महिलाएं सिजेरियन का फैसला करती हैं। जबकि कई को क्रिटिकल कंडीशन के चलते सिजेरियन करवाना पड़ता है। जिनका पहला बच्चा सिजेरियन से हुआ हो, उनके दूसरे बच्चे में सिजेरियन के चांस 90 फीसदी तक बढ़ जाते हैं। पर क्या आप जानती हैं कि एक मां के लिए बार-बार सिजेरियन करवाना ठीक नहीं है।इसलिए पहली डिलीवरी में ही बहुत सोच समझ कर लें सिजेरियन का फैसला।
डॉक्टरों का मानना है कि हर एक सिजेरियन के बाद, महिला पर खतरा बढ जाता है। फिर भी एक या दो सिजेरियन यानी सी-सेक्शन ठीक हैं, लेकिन तीसरे के बाद मुश्किल काफी बढ़ी है। हालांकि हर महिला के शारीरिक क्षमता और गठन अलग-अलग होता है, लेकिन फिर भी यह खतरनाक तो है ही।
हर बार सिजेरियन के निशान पेट पर रह जाते हैं। सी-सेक्शन से पेट की त्वचा घनी हो जाती है क्योंकि नए टिश्यू बनते हैं। इस तरह उस जगह की स्किन फिर से एक बड़ा कट झेलने लायक नहीं बचती। इससे डॉक्टर बड़ी मुश्किल से इस प्रक्रिया को पूरा कर पाते हैं और खतरा भी बढ़ जाता है।
मूत्राशय में चोट की समस्या भी इस तरीक से हो सकती है। पहली या दूसरी बार के सी-सेक्शन से अमूमन इस तरह की समस्या नहीं होती लेकिन बार बार सी-सेक्शन कराने से यह मुश्किल आ सकती है। शरीर के अंदर जो कट लगता है उससे यूटेरस ब्लैडर से कनेक्ट हो सकता है और चोट लग सकती है।
चित्रस्रोत: Shutterstock.