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High-Risk Pregnancy: किन महिलाओं की प्रेग्नेंसी हाई रिस्क होती है? डॉक्टर से जानें कारण और संकेत

अक्सर कुछ महिलाएं अपनी गर्भावस्था के दौरान कई तरह की परेशानियों का सामना करती हैं, जिसके लिए कभी बच्चे, कभी मां या फिर दोनों को खास केयर की जरूरत होती है। इसे हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी कहा जाता है।

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Written By: Vidya Sharma | Published : July 27, 2026 9:34 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Arti Singh

प्रेग्नेंसी किसी भी महिला की जिंदगी का सबसे खूबसूरत दौर होता है, जो उम्मीदों और उत्साह से भरा होता है। हालांकि ज्यादातर प्रेग्नेंसी नॉर्मली ही आगे बढ़ती हैं, लेकिन कुछ मामलों में महिलाओं को कॉम्पलीकेशन्स के बढ़ते जोखिम के कारण मेडिकल निगरानी की जरूरत होती है। ऐसे में हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी का मतलब यह नहीं है कि कुछ गलत ही होगा। इसका बस इतना मतलब है कि सेफ प्रेग्नेंसी और डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए मां, बच्चे या दोनों को एक्सट्रा केयर और निगरानी की जरूरत है।

रीजेंसी हॉस्पिटल, कानपुर की ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी की डॉ. आरती सिंह कहती हैं कि मां की बेहतर सेहत, शुरुआती पहचान, नियमित एंटीनेटल चेकअप और समय पर इलाज की मदद से, हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी वाली ज्यादातर महिलाएं स्वस्थ बच्चों को जन्म देती हैं। इसलिए सबसे जरूरी है जोखिम के कारणों को जल्दी पहचानना और चेतावनी वाले संकेतों को कभी नजरअंदाज न करना। आइए अब डॉक्टर से ही जानते हैं कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी किन कारणों से होती है और शुरुआत में कौन से संकेत दिखते हैं।

हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी क्या होती है?

कई मेडिकल स्थितियां और प्रेग्नेंसी से जुड़े फैक्टर कॉम्प्लिकेशन होने की संभावना बढ़ा सकते हैं। डॉक्टर कहती हैं कि प्रेग्नेंसी को हाई-रिस्क माना जा सकता है अगर गर्भवती महिला को इनमें से कोई समस्या हो, जैसे-

  • हाई ब्लड प्रेशर या प्री-एक्लेम्पसिया होना
  • डायबिटीज, चाहे पहले से हो या जेस्टेशनल डायबिटीज
  • थायरॉयड, किडनी या दिल की बीमारी
  • ऑटोइम्यून विकार जैसे ल्यूपस
  • बार-बार मिसकैरेज, स्टिलबर्थ या समय से पहले डिलीवरी का हिस्ट्री
  • एक से ज्यादा बच्चे, जैसे जुड़वां या तीन बच्चे
  • मां की उम्र 18 साल से कम या 35 साल से ज्यादा होना
  • मोटापा या गंभीर एनीमिया

यह भी याद रखना जरूरी है कि जिन महिलाओं की पिछली प्रेग्नेंसी सामान्य रही हो, उनमें भी कभी-कभी जटिलताएं विकसित हो सकती हैं। इसीलिए हर गर्भवती महिला के लिए नियमित एंटीनेटल देखभाल जरूरी है, चाहे उसका मेडिकल इतिहास कैसा भी हो।

इन चेतावनियों को कभी नजरअंदाज न करें

डॉक्टर बताती हैं कि गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं के अक्सर चेतावनी वाले लक्षण दिखते हैं, जिनके लिए तुरंत मेडिकल जांच की जरूरत होती है। डॉक्टर ने कुछ ऐसे लक्षण बताए हैं, जिन्हें गर्भवती महिलाओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। जैसे-

  • तेज सिरदर्द जो आराम करने पर भी ठीक न हो
  • धुंधला दिखना या रोशनी की चमक दिखाई देना
  • चेहरे, हाथों या पैरों में अचानक सूजन आना
  • योनि से बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होना
  • प्रसव पीड़ा शुरू होने से पहले योनि से पानी या तरल पदार्थ का रिसाव होना
  • पेट में तेज दर्द या लगातार संकुचन महसूस होना
  • बच्चे की नियमित हलचल शुरू होने के बाद हलचल कम होना या बिल्कुल न होना
  • लगातार तेज बुखार रहना
  • सांस लेने में तकलीफ़ या सीने में दर्द
  • दौरे पड़ना या बेहोश हो जाना

इन लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और न ही इनके लिए अगली अपॉइंटमेंट तक इंतजार करना चाहिए। शुरुआती मेडिकल मदद से गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है और मां व बच्चे दोनों के लिए बेहतर नतीजे मिल सकते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान रेगुलर चेक-अप क्यों जरूरी हैं?

प्रेग्नेंसी के दौरान रेगुलर चेकअप कितना जरूरी है?

प्रेग्नेंसी के दौरान रेगुलर चेक-अप सिर्फ एक आम जांच से कहीं ज्यादा हैं। इनसे संभावित समस्याओं का समय रहते पता चल जाता है, इससे पहले कि वे गंभीर रूप ले लें। इन विजिट के दौरान, हेल्थकेयर प्रोवाइडर ब्लड प्रेशर की जांच करते हैं, बच्चे की ग्रोथ और विकास को देखते हैं, जरूरी ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड करते हैं, दवाओं की समीक्षा करते हैं और सेहत से जुड़ी किसी भी नई समस्या की पहचान करते हैं। डॉक्टर मां की स्थिति और बच्चे की सेहत के आधार पर डिलीवरी का सबसे सुरक्षित समय और तरीका तय करने में भी मदद करते हैं।

प्रेग्नेंसी से जुड़ी कई दिक्कतें

जैसे प्री-एक्लेम्पसिया, जेस्टेशनल डायबिटीज, भ्रूण की ग्रोथ में रुकावट और एनीमिया, को रेगुलर प्रीनेटल केयर के जरिए जल्दी पता लगाकर असरदार ढंग से मैनेज किया जा सकता है। हालांकि हर दिक्कत को रोका नहीं जा सकता, लेकिन हेल्दी आदतें अपनाकर और सतर्क रहकर जोखिम को काफी कम किया जा सकता है।

हर गर्भवती महिला को ये करना चाहिए

  • तय समय पर सभी एंटीनेटल अपॉइंटमेंट्स में जरूर जाएं।
  • डॉक्टर की बताई दवाएं, आयरन, कैल्शियम और अन्य सप्लीमेंट्स रेगुलर लें।
  • अपने ऑब्सटेट्रिशियन (प्रसूति विशेषज्ञ) की सलाह के अनुसार बच्चे की हलचल पर नजर रखें।
  • संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लें और शरीर में पानी की कमी न होने दें।
  • अगर इलाज करने वाले डॉक्टर सलाह दें, तो शारीरिक रूप से एक्टिव रहें।
  • स्मोकिंग, शराब और नशीली दवाओं से दूर रहें।

डिस्क्लेमर: अगर आपके घर में कोई गर्भवति महिला है तो आप अपने नजदीकी इमरजेंसी अस्पताल की जानकारी जरूर रखें। और जरूरी मेडिकल रिकॉर्ड और इमरजेंसी कॉन्टैक्ट नंबर आसानी से मिल सकें, ऐसी जगह रखें। सावधानी, स्वस्थ जीवनशैली और नियमित मेडिकल देखरेख सुरक्षित गर्भावस्था सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।