इनफर्टिलिटी दूर करने के लिए दवाएं भी काम न कर पाएं तो क्या है इसके बाद विकल्प?
Infertility Treatment IVF: खराब जीवनशैली, बढ़ता तनाव और अनहेल्दी डाइट हैबिट्स कहीं न कहीं इनफर्टिलिटी जैसी समस्याओं को भी बढ़ा रही हैं। इस समस्या से निपटने के लिए सही ट्रीटमेंट की जानकारी होना बेहद जरूरी है।
Infertility And Its Management: रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार दुनियाभर में लगभग 12 से 18 प्रतिशत लोग इनफर्टिलिटी की समस्या से जूझ रहे हैं, जो सिर्फ एक शारीरिक समस्या है बल्कि उन्हें भावनात्मक और मानसिक रूप से भी बीमार बना रही है। आज भारत के कई हिस्से हैं जहां गर्भधारण न कर पाने के कारण महिलाओं या पुरुषों को अलग नजर से देखा जाता है। मेडिकल साइंस ने निसंतानता की समस्या से निपटने के लिए कई अलग-अलग तरीके अपनाएं हैं, जो अलग-अलग कारणों पर निर्भर करते हैं। लेकिन किस कपल को क्या ट्रीटमेंट चाहिए यह सिर्फ एक्सपर्ट्स व जांच की मदद से ही पता लगाया जा सकता है। लेकिन यह सच है कि आवीएफ ने दुनियाभर में अनगिनत कपल्स को खुशियां प्रदान की हैं और यह इनफर्टिलिटी से जूझ रहे लोगों के लिए सबसे ज्यादा सफल और प्रभावी ट्रीटमेंट में से एक है। लेकिन इसकी सही जानकारी होना भी बहुत जरूरी है। गायनेकोलॉजिस्ट और ऑब्सटेट्रिक्स डॉ. श्रुति सलामपुरिया-सावंत Aksigen IVF ने इस बारे में काफी महत्वपूर्ण जानकारियां दी, जिनके बारे में हम आगे इस लेख में जानेंगे।
इनफर्टिलिटी और उसके कारण
डॉ. श्रुति सलामपुरिया सावंत ने बताया कि कई कपल्स के लिए माता-पिता बनना आसान नहीं होता। दुनियाभर में लगभग 12–18% कपल्स इनफर्टिलिटी की समस्या से जूझते हैं, जिनके पीछे स्वास्थ्य से जुड़ी कोई न कोई समस्या होती है जैसे पीसीओएस, एंडोमेट्रियोसिस, फेलोपियन ट्यूब का ब्लॉकेज या लो स्पर्म काउंट। जबकि कुछ मामले ऐसे भी हो सकते हैं, जिनमें इनफर्टिलिटी के पीछे के कारण का पता ही नहीं चल पाता है। वैसे तो बहुत से ट्रीटमेंट है, लेकिन आवीएफ तकनीक को इनफर्टिलिटी के लिए सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है, लेकिन इसके बारे में भी सही जानकारी होना जरूरी है।
इन विट्रो फर्टिलाइजेशन को समझें
डॉ. सावंत ने बताया कि आईवीएफ इनफर्टिलिटी से परेशान कपल्स के लिए एक नई उम्मीद है, जो गर्भधारण में मदद करता है। यह प्रक्रिया सुरक्षित होने के साथ-साथ प्रभावी भी मानी जाती है। आईवीएफ ऐसी तकनीक है, जिसमें अंडाणु (Egg) और शुक्राणु (Sperm) को शरीर के बाहर लैब में मिलाया जाता है और बने हुए भ्रूण (Embryo) को गर्भाशय में रखा जाता है। यह प्रक्रिया बोलने में थोड़ी देर लगती है, लेकिन बहुत जटिल होती है और इसे अलग-अलग स्टेप्स में किया जाता है जो इस प्रकार हैं -
- ओवेरियन स्टिमुलेशन (Ovarian Development) - हार्मोनल दवाओं से ओवरी को एक से ज्यादा एग बनाने के लिए तैयार किया जाता है। यह प्रक्रिया अल्ट्रासाउंड से नियमित मॉनिटरिंग के दौरान की जाती है।
- एग रिट्रीवल (Egg Retrieval) - एग तैयार होने पर हल्की बेहोशी में एग रिट्रीवल प्रोसेस शुरू की जाती है, जो एक छोटी और सुरक्षित प्रक्रिया होती है।
- फर्टिलाइजेशन (Fertilization) - इस प्रोसेस की मदद से लैब में एग और स्पर्म को मिलाया जाता है। कुछ मामलों में ICSI तकनीक से एक स्पर्म सीधे एग में डाला जाता है, जो पुरुष बांझपन में मददगार होता है।
- एंब्रियो डेवलपमेंट (Embryo Development) - एग फर्टिलाइज होने 3 से 5 दिनों के बाद एंब्रियो बनने लगता है।
- एम्ब्रियो ट्रांसफर (Embryo Transfer) - स्वस्थ एम्ब्रियो को गर्भाशय में रखा जाता है और अतिरिक्त एम्ब्रियो भविष्य के लिए फ्रीज किए जा सकते हैं।
- प्रेग्नेंसी टेस्ट (Pregnancy Test) - लगभग दो हफ्ते बाद ब्लड टेस्ट से गर्भावस्था की पुष्टि होती है।
कब दी जाती है आईवीएफ की सलाह
इनफर्टिलिटी की कंडीशन को दूर करने के लिए पहले मेडिसिन व अन्य सामान्य ट्रीटमेंट शुरू किए जाते हैं, लेकिन जब वे भी सफल नहीं हो पाते हैं तो डॉक्टर आईवीएफ की सलाह दे सकते हैं। उम्र और स्वास्थ्य के आधार पर इसकी सफलता दर लगभग 40-50% तक हो सकती है। सही जानकारी मरीज की चिंता कम करती है और उन्हें इलाज से जुड़े फैसलों में सक्रिय रूप से शामिल होने में मदद करती है।
IVF खासतौर पर तब मददगार है जब फेलोपियन ट्यूब डैमेज हों, गंभीर पुरुष बांझपन हो, जेनेटिक बीमारियों से बचना हो, कैंसर उपचार से पहले फर्टिलिटी सुरक्षित करनी हो या लंबे समय से बिना कारण बांझपन हो।
आईवीएफ की सही तकनीक होना जरूरी
डॉक्टर एम्ब्रियो ट्रांसफर को सावधानी से नियंत्रित करते हैं ताकि मल्टीपल प्रेगनेंसी का जोखिम कम हो और सुरक्षा बढ़े। सफल IVF सिर्फ प्रेग्नेंसी तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीज की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है। हर मरीज के लिए उम्र, मेडिकल हिस्ट्री और स्वास्थ्य के अनुसार पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान बनाया जाता है ताकि जोखिम कम रहे। इसलिए आपको सबसे पहले किसी अच्छे आईवीएफ सेंटर या अस्पताल में सही सलाह जरूर लेनी चाहिए।
सिर्फ एक प्रोसेस नहीं आईवीएफ
IVF उम्मीद और खुशी लेकर आता है, लेकिन इसके साथ तनाव भी हो सकता है। इसलिए काउंसलिंग, सपोर्ट ग्रुप और डॉक्टर से खुलकर बातचीत इस यात्रा को आसान बनाते हैं। IVF सिर्फ एक मेडिकल प्रक्रिया नहीं बल्कि भरोसे, जानकारी और भावनात्मक मजबूती की यात्रा है। जब मरीज अपने इलाज को समझते हैं और सहयोग महसूस करते हैं, तो वे ज्यादा आत्मविश्वास के साथ सही फैसले ले पाते हैं।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।