Miscarriage problems: किस कारण से बढ़ रहा है मिसकैरेज का खतरा और कैसे करें इसकी रोकथाम, एक्सपर्ट्स ने दी सलाह

Miscarriage issues: आजकल बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं, जो मिसकैरेज के खतरे को बढ़ाती हैं। इस लेख में जानें बढ़ते मिसकैरेज के पीछे का कारण और उसकी रोकथाम करने के लिए कुछ आसान तरीके।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : May 15, 2024 11:56 AM IST

Causes and Prevention of miscarriage: मां बनाना किसी भी महिला के लिए दुनिया का सबसे सुखद एहसास है। गर्भावस्था उनके जीवन की सबसे यादगार अवस्था होती है जिसमें वह पूरे दिल और भावनात्मक रूप से अपने बच्चों से जुड़ जाती हैं। वह उसे महसूस करते हैं। कहते हैं पिता तो बच्चों के दुनिया में आने के बाद उसे गोद में उठाने के बाद पिता बनने की अनुभूति महसूस करता है। लेकिन जैसे ही माता के गर्भ में भ्रूण को स्थापित होता है। मां, मां बन जाती है और यह रिश्ता उसके पैदा होने के 9 महीने पहले से ही शुरू हो जाता है। मगर कई महिलाओं को मिसकैरेज जैसी बहुत ही मुश्किल स्थिति से भी गुजरना पड़ता है। जिस कारण माता को भावनात्मक रूप से बहुत गहरी चोट पहुंचती है वही पिता का दिल बिखर जाता है। किसी किसी परिस्थिति में मिसकैरेज होना मां के हाथ में नहीं होता। लेकिन किसी किसी स्थिति में वह कुछ बातों का ध्यान रखकर इस खतरे कम कर सकती है या रोक सकती है। लिए हम आपको इस आर्टिकल में बताते हैं कि आप किन बातों का ध्यान रखकर आप इस खतरे को रोक सकते हैं।

नियमित प्रीनेटल देखभाल

गर्भधारण के बाद मां समय-समय पर और हो सके छोटे-छोटे अंतराल पर ही प्रीनेटल केयर करती रहे। इससे किसी भी भावी परेशानी से बचा जा सकता है अगर भ्रूण में किसी भी तरह की परेशानी देखी जाएगी तो तुरंत उसे पहचान लिया जाएगा जिससे मिसकैरेज होने का खतरा न के बराबर रह जाता है।

सेहतमंद जीवन शैली

एक अच्छा जीवन जीने के लिए सेहत मत जीवन शैली अपनाना जरूरी है और अब तो आपके गर्भ में एक और जीवन पाल रहा है। ऐसे में एक स्वस्थ और अच्छी जीवन शैली को अपनाने की कोशिश करें कुछ भी ऐसा ना खाएं जिससे आपके बच्चे पर असर हो। आपकी यह सतर्कता मिसकैरेज के खतरे को रोकती हैं। आपको कभी भी गर्भधारण के समय अल्कोहल या धूम्रपान का सेवन नहीं करना चाहिए। पूरी तरीके से बंद करके आप मिसकैरेज के खतरे को बिल्कुल कम कर सकते हैं।

करें क्रॉनिक बीमारियों का प्रबंधन

अगर आप किसी भी क्रॉनिक बीमारियों से पीड़ित है तो गर्भधारण के बाद अपने डॉक्टर को इसके बारे में बताएं। वह गर्भ और आपको देखकर कुछ दवाइयां आपको देंगे जो आपके लिए और आपके दो बच्चे दोनों के लिए स्वास्थ्य कर होंगी। जिससे आप गर्भपात जैसी गंभीर और भावनात्मक प्रक्रिया से गुजरने से बच जाएंगे।

हाइजीन है जरूरी

बात अब केवल आपकी नहीं आपके बच्चे की भी है। इसलिए हाइजीन का पूरा ध्यान रखें कुछ भी ऊल जलूल ना खाएं और कोई भी चीज खाने से पहले अपने हाथों को और उसे चीज को वॉश करके ही खाएं। इससे आप अपने बच्चों को खोने से बच सकती हैं।

भावनात्मक सहयोग है सबसे जरूरी

गर्भधारण के समय मां का खुश रहना बहुत जरूरी है। मन खुश रहेगी तो बच्चा भी खुश रहेगा। इसलिए इस समय तनाव लेने, लड़ाई झगड़ा करने या फिर किसी भी विवाद में पढ़ने से पहले अपने बच्चों के बारे में सोचें। वही परिवार वालों को भी ध्यान देना चाहिए कि गर्भधारण की हुई महिला का पूर्ण रूप से ध्यान रखें उसे खुश रखें ताकि उसे मिसकैरेज जैसी परेशानी से न जूझना पड़े।

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