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प्रेगनेंसी में एक्सरसाइज़ करने से होते हैं ये 5 फायदे!

कसरत करने से डिलिवरी और लेबर के दौरान होनेवाले तनाव से मिल सकती है राहत।

सोहा अली खान इन दिनों इंटरनेट पर छायी हुई हैं, जिसकी वजह है इन्स्टाग्राम पर उनकी प्रेगनेंसी वर्कआउट वाली तस्वीरें। और हो भी क्यों नहीं, वह अपनी इन तस्वीरों के ज़रिए सभी गर्भवती महिलाओं को फिट होने के लिए प्रेरित कर रही हैं। अब अगर आपको कसरत पसंद नहीं है, तो आप प्रेगनेंसी के दौरान भी इसे शुरु कर सकती हैं। क्योंकि एक्सरसाइज़ करने से आपको लेबर पेन (प्रसव के दौरान होनेवाला दर्द) से राहत मिल सकती है। व्यायाम आपको गर्भावस्था और लेबर की आवश्कताओं से निपटने में मदद करता है, और यह बात काफी पहले से कही जा रही है जिसके पर्याप्त सबूत भी उपलब्ध हैं। तो चलिए हम बताते हैं कि एक्सरसाइज कैसे मदद करती है।

  1. सहनशक्ति में सुधार: लेबर मानसिक और शारीरिक रूप से तकलीफदायक हो सकता है। यह कई घंटों तक महसूस हो सकता है और बहुत अधिक मुश्किलभरा भी लग सकता है। कार्डियोवैस्कुलर गतिविधियों से आपकी सहनशक्ति में सुधार हो सकता है और लेबर पेन को सहन करने की आपकी क्षमता भी बढ़ जाती है। [1]।
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  1. पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों की मज़बूती: व्यायाम पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को सपोर्ट करने में मदद कर सकता है, जो आपके वैजाइना, मूत्राशय या ब्लैडर, मलाशय या रेक्टम और मूत्रमार्ग या यूथ्रेरा को सपोर्ट करते हैं। जब आप लेबर में होती हैं, तो बर्थ कैनल से भ्रूण के आसानी से निकलने के लिए आपको अपने पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को आराम देना ज़रूरी होता है।[2] इसलिए अपने पेल्विक फ्लोर फर्श की मांसपेशियों से जुड़ी एक्सरसाइज़ करने से आपको लेबर पेन कम करने में मदद मिल सकती है।

Pregnancy- exercise-THS

  1. लेबर के तनाव से जूझने के लिए जांघ की मांसपेशियों को मज़बूती:जी हां, यही वजह है कि आपको अपनी कीगल एक्सरसाइज़ (Kegal exercises) अच्छी तरह करने की सलाह दी जाती है। अपने पेल्विक फर्श की मांसपेशियों के अलावा यह आपकी जांघों की मांसपेशियों को लेबर के तनाव का सामना करने के लिए मज़बूत बनाते हैं। अक्सर लेबर के दौरान जांघ की मांसपेशियां थक जाती हैं।[3] और ऐसे में डॉक्टर अक्सर सी-सेक्शन का फैसला लेते हैं क्योंकि गर्भवती महिला भारी थकान महसूस करती है और डिलीवरी में समय लगता है।

  1. गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक वजन बढ़ने से रोकता है: आपकी उम्र और वजन जैसे कई कारक लेबर के पहले चरण को प्रभावित कर सकते हैं। नियमित व्यायाम से गर्भावस्था के दौरान वजन बहुत अधिक बढ़ने की संभावना को कम किया जा सकता है, और नतीजतन आपके लेबर के पहले स्टेज की तकलीफों को आसानी से कम किया जा सकता है।[4]

  1. लेबर के बाद तेज़ रिकवरी: गर्भावस्था के दौरान शारीरिक रुप से सक्रिय रहने से आपको डिलीवरी के बाद तेज़ी से रिकवर करने में मदद मिल सकती है।[5] इसी तरह आप गर्भावस्था से पहले जैसा वजन भी प्राप्त कर सकती हैं।

संदर्भ-:

[1] Hammer, R. L., Perkins, J., & Parr, R. (2000). Exercise During the Childbearing Year. The Journal of Perinatal Education, 9(1), 1–14. http://doi.org/10.1624/105812400X87455

[2] Marques, A., Stothers, L., & Macnab, A. (2010). The status of pelvic floor muscle training for women. Canadian Urological Association Journal, 4(6), 419–424.

[3] Bahadoran, P., Asefi, F., Oreyzi, H., & Valiani, M. (2010). The effect of participating in the labor preparation classes on the maternal vitality and positive affect during the pregnancy and after the labor. Iranian Journal of Nursing and Midwifery Research, 15(Suppl1), 331–336.

[4] MOTTOLA, M. F., GIROUX, I., GRATTON, R., HAMMOND, J.-A., HANLEY, A., HARRIS, S., … SOPPER, M. M. (2010). Nutrition and Exercise Prevent Excess Weight Gain in Overweight Pregnant Women. Medicine and Science in Sports and Exercise, 42(2), 265–272. http://doi.org/10.1249/MSS.0b013e3181b5419a

[5] Bogdanis, G. C. (2012). Effects of Physical Activity and Inactivity on Muscle Fatigue. Frontiers in Physiology, 3, 142. http://doi.org/10.3389/fphys.2012.00142

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अनुवादक-Sadhana Tiwari

चित्रस्रोत- sakpataudi/Instagram

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