कल्कि कोचलिन हैं प्रेग्नेंट, गोवा में पानी में बच्चे को देंगी जन्म, जानें क्या है वॉटर बर्थ, फायदे और नुकसान

एक्ट्रेस कल्कि कोचलिन प्रेग्नेंट हैं और उनकी योजना है कि वह गोवा में बच्चे को पानी में जन्म देंगी। इस बर्थ टेक्नीक को ''वॉटर बर्थ'' कहते हैं।

WrittenBy

Written By: Anshumala | Updated : September 30, 2019 12:30 AM IST

कल्कि कोचलिन अपने पहले बच्चे के साथ प्रेग्नेंट हैं। 35 वर्षीय यह अभिनेत्री गर्भावस्था के पांचवें महीने में हैं और दिसंबर में बच्चे को जन्म देने के आसार हैं। कल्कि की योजना गोवा में बच्चे का जन्म पानी (water birth) में देने का है, जिसे वॉटर बर्थ (water birth) भी कहते हैं। कल्कि और उनके बॉयफ्रेंड गाय हैर्शबर्ग हैं, जो एक इजरायली शास्त्रीय पियानोवादक हैं। इस दौरान कल्कि अपना वक्त गाय के म्यूजिक को सुनकर, उनके साथ वॉक पर जाकर और योग कर बिता रही हैं। कल्कि ने इस वक्त मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी कम कर दिया है।

एच टी ब्रंच की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा, "मैं अभी से यह महसूस कर रही हूं कि चीजों के प्रति मेरी प्रतिक्रिया में बदलाव आ रहा है। जब मातृत्व का दौर आता है, तो यह इंसान की भावना में एक नई चेतना लाता है।" खबरों के मुताबिक, कल्कि का जन्म भी वॉटर बर्थ की प्रक्रिया के माध्यम से हुआ था और वह इसी तरह से अपने बच्चे को जन्म देना चाहती हैं।

कल्क‍ि ने अपनी पहली शादी बॉलीवुड फिल्म डायरेक्टर अनुराग कश्यप से की थी, जो ज्यादा चली नहीं और दोनों ने वर्ष 2015 में तलाक ले लिया था।

प्रेगनेंसी में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या कब हो सकती है जानलेवा

क्या है वॉटर बर्थ टेक्नीक (water birth technique)

वाटर बर्थ डिलीवरी हॉस्पिटल के लेबर रूप में डिलीवरी बेड पर बच्चे को जन्म देने से काफी अलग होता है। भारत की तुलना में विदेशों में यह डिलीवरी टेक्नीक काफी चलन में है। हालांकि, अब भारत में भी कुछ हॉस्पिटल्स और महिलाएं इस तरह के चाइल्ड बर्थ टेक्नीक को आजमाने लगी हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि वॉटर बर्थ टेक्नीक में प्रसव पीड़ा नॉर्मल डिलीवरी की अपेक्षा काफी कम होता है। वाटर बर्थ यानी बच्चे को पानी में जन्म देना। इसमें एक बड़े से टब में हल्के गुनगुने पानी को डालकर प्रेग्नेंट महिला को डिलीवरी के लिए बिठाया जाता है। इस प्रॉसेस को हॉस्पिटल और घर दोनों में किया जा सकता है। इस टेक्नीक में बेशक प्रसव पीड़ा कम हो, लेकिन काफी सतर्कता और सावधानी से इसे किया जाना चाहिए वरना बच्चे की सेहत को नुकसान पहुंच सकता है।

वॉटर बर्थ के फायदे भी जान लें (water birth benefits)

1 नेचुरल प्रॉसेस या नॉर्मल डिलीवरी करवाना जितना दर्द भरा होता है, उतना ही कम दर्द वॉटर बर्थ में होता है।

2 वॉटर बर्थ में घंटों लेबर पेन नहीं सहना पड़ता, कम समय और कम दर्द में ही आप बच्चे को जन्म दे सकती हैं। गर्म पानी दर्द निवारक भी होता है, जो प्रसव के दौरान दर्द का अहसास कम होने देता है। इससे डिलीवरी प्रॉसेस आसान हो जाती है।

3 इसमें किसी भी तरह की दवाओं का सेवन करने की जरूरत नहीं होती है। गर्म पानी मांसपेशियों को रिलैक्स करता है। गर्म पानी से ऑक्सीटोसिन में इजाफा होता है, जो शरीर को प्राकृतिक रूप से दर्द से राहत दिलाने में मदद करता है। इससे डिलीवरी भी बहुत जल्दी हो जाती है।

Yoga in Pregnancy : जांघों और पेट की मांसपेशियों में कसाव लाने के लिए करें ये 2 आसन

होते हैं कुछ नुकसान भी (water birth disadvantages)

इसमें शिशु के संक्रमित होने का डर बना रहता है। कई बार बच्चा पानी से बाहर नहीं आता है, लेकिन गर्भनाल टूट जाता है। ऐसा होना ठीक नहीं है। पानी में जन्म देने से कई बार शिशु के शरीर का तापमान बहुत ज्यादा या बहुत कम हो जाता है। बच्चा ठीक से सांस नहीं ले पाता। जरा सी भी लापरवाही बरती गई या प्रसव के दौरान आसपास कोई ना हुआ तो बच्चे के डूबने का डर रहता है। इसलिए घर में डिलीवरी की इस प्रक्रिया को अपनाते समय अपने साथ तीन-चार लोगों और किसी एक्सपर्ट, नर्स को जरूर रखें।

कब बचें वॉटर बर्थ टेक्नीक से

18 वर्ष से कम उम्र हो या 35 वर्ष से अधिक उम्र हो, तो यह टेक्नीक बिल्कुल ना ट्राई करें। यदि आपको प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज और प्रीक्लेम्पसिया यानी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, तो कभी भी वॉटर बर्थ ना करें। जब गर्भ में जुड़वां बच्चे हों। प्री-मैच्योर डिलीवरी, बच्चे का आकार बड़ा होना और महिला को कोई इंफेक्शन हो, तो वॉटर बर्थ कराने से बचने में ही आपकी और आपके बच्चे की भलाई है।

इनपुट: (आईएएनएस हिंदी)