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ब्राजील की मॉडल और फिल्म 'देसी बॉयज़' की अभिनेत्री ब्रूना अब्दुल्ला मां बनने वाली हैं। प्रसव के लिए उन्होंने किसी भी तरह की कृत्रिम तकनीक की मदद न लेने का फैसला किया है। इसके लिए वे वॉटर बर्थ डिलीवरी(Water Birth Delivery) को अपनाएंगी। इसकी जानकारी उन्होंने एक साक्षात्कार में दी। आइए जानते हैं कि क्या है वॉटर बर्थ डिलीवरी (Water Birth Delivery)। क्यों मानी जाती है यह कम दर्द वाली तकनीक।
ब्राज़ील से आई 32 साल की ये मॉडल अब मां बनने वाली है। इसकी जानकारी उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर फोटो पोस्ट करके दी। ब्रूना वैसे तो बतौर टूरिस्ट भारत आईं थी लेकिन यहां जब उन्हें मॉडलिंग और फिल्मों में काम करने के ऑफर मिले तो वो यहीं रुक गईं। बीते साल ब्रूना ने अपने स्कॉटिश मूल के बॉयफ्रेंड के साथ शादी कर ली। वे फिल्म 'देसी बॉयज़' में अक्षय कुमार के साथ भी काम कर चुकी हैं।
ब्रूना जल्दी ही मां बनने वाली हैं। वे अपने बच्चे का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहीं हैं। उन्होंने नवंबर, 2018 की अपनी फ्लैट टमी और जून 2019 की अपनी बेबी बम के साथ दो फोटो एक साथ शेयर की हैं। वे लिखती हैं हमारा शरीर खूबसूरत है। पर हमें पता ही नहीं चलता कि कब इसके भीतर एक सुंदर मनुष्य आकार लेने लगता है। बच्चे के जन्म के लिए उन्होंने वॉटर बर्थ डिलीवरी (Water Birth Delivery) को चुनने का फैसला किया है। वे कहती हैं कि मैं अपने बच्चे को जन्म देने के लिए किसी तरह की डॉक्टरी मदद नहीं लूंगी। इसकी जगह मैं 'वाटर बर्थ डिलीवरी' तकनीक का इस्तेमाल करना चाहूंगी।
इस प्रक्रिया के लिए एक गुनगुने पानी का बर्थिंग पूल बनाया जाता है। और इस पुरे पूल का तापमान एक जैसा रखने के लिए इसमें कई उपकरण भी लगे रहते हैं। जैसे कि इन्फेक्शन को रोकने के लिए, वाटर प्रूफ उपकरण इत्यादि। बर्थिंग पूल की क्षमता लगभग 400 लीटर होती है। यह पूल तकरीबन ढाई से तीन फ़ीट का हो सकता है। यह महिला के शरीर के अनुसार एडजस्ट हो सकता है। प्रसव पीड़ा शुरू होने के तीन से चार घण्टे के बाद महिला को इसमें ले जाया जाता है।
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गरम पानी के भीतर होने के कारण मां के शरीर में एंड्रोफिन हार्मोन रिलीज़ ज़्यादा मात्रा में होता है। जिसके कारण पीड़ा बहुत कम हो जाती है। ©Shutterstock.[/caption]
गरम पानी के भीतर होने के कारण मां के शरीर में एंड्रोफिन हार्मोन रिलीज़ ज़्यादा मात्रा में होता है। जिसके कारण पीड़ा बहुत कम हो जाती है। जिससे एनेस्थीशिया और अन्य पेन किलर देने की ज़रूरत लगभग आधी हो जाती है। इतना ही नहीं गर्म पानी के कारण एंग्जायटी भी नहीं होती और ब्लड प्रेशर भी नियंत्रण में रहता है। वाटर बर्थ के लिए मां का फिट होना भी अत्यंत आवश्यक है। अगर महिला पूरी तरह से स्वस्थ है, तो किसी भी महिला विशेषज्ञ द्वारा वाटर बर्थ डिलीवरी करवाई जा सकती है।
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मां और शिशु दोनों को ही इन्फेक्शन होने का ख़तरा बहुत कम हो जाता है। इससे योनि में होने वाला खिंचाव और थकान भी कम होती है। ©Shutterstock.[/caption]
वाॅॅटर बर्थ डिलीवरी नार्मल डिलीवरी का ही एक आधुनिक प्रकार है। इसके जरिये प्रसव के दौरान होने वाली पीड़ा को कम किया जा सकता है। एक अध्यन में यह पाया गया है, कि वाटर बर्थ डिलीवरी में नार्मल डिलीवरी से 40% कम पीड़ा होती है। इसी के साथ-साथ मां और शिशु दोनों को ही इन्फेक्शन होने का ख़तरा बहुत कम हो जाता है। इससे योनि में होने वाला खिंचाव और थकान भी कम होती है। गरम पानी के संपर्क में आने से टिश्यू बहुत सॉफ्ट हो जाते हैं। वाटर बर्थ डिलीवरी के समय महिला गरम पानी में रहती है, जिसकी वजह से शरीर में तनाव भी कम हो जाता है।