
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Medically Verified By: Dr. Manju Goyal
uterine cleaning risks
कई बार मम्मी या दादी या फिर डॉक्टर को कहते सुना होगा कि फलां महिला को बच्चेदानी की सफाई करानी पड़ी। हम में से कई लोग इसे समझ नहीं पाते हैं और एक नॉर्मल सा प्रोसेस समझ बैठते हैं। लेकिन आपको बता दें कि यह कोई साधारण प्रोसेस नहीं होता है। मेडिकल भाषा बच्चेदानी की सफाई को डिलेशन एंड क्यूरेटेज (D and C) कहा जाता है। यह एक सर्जिकल प्रोसेस है। इसमें डॉक्टर गर्भाशय के अंदर मौजूद अतिरिक्त टिश्यूज को निकालते हैं। यह प्रोसेस आमतौर पर गर्भपात के बाद, असामान्य ब्लीडिंग या कुछ मेडिकल जांच के लिए की जाती है। लेकिन कई बार इसे लेकर लोगों में भ्रम रहता है कि यह एक सामान्य सफाई प्रक्रिया है, जबकि यह एक मेडिकल सर्जरी है जिसे सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही किया जाना चाहिए।
जयपुर स्थित नारायणा हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट गायनेक्लॉजिस्ट डॉ. मंजू गोयल का कहना है कि यह प्रोसेस तब करवाते हैं, जब शरीर में कोई मेडिकल समस्या हो। जैसे गर्भपात के बाद गर्भाशय में बचे हुए टिश्यू को निकालना या बहुत ज्यादा और अनियमित ब्लीडिंग की जांच करना। कभी-कभी यह टेस्ट के तौर पर भी किया जाता है ताकि बच्चेदानी के अंदर की स्थिति को समझा जा सके। इसका मतलब यह नहीं है कि हर महिला को इसकी जरूरत होती है।
हालांकि, यह प्रोसेस ज्यादातर मामलों में सुरक्षित होती है, लेकिन इसमें कुछ जोखिम भी हो सकते हैं। NCBI की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ प्रक्रिया के बाद महिलाओं को हल्का दर्द, कमजोरी या ब्लीडिंग हो सकती है, जो कुछ दिनों तक रहती है। अगर सही देखभाल न की जाए, तो इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ सकता है। 
कभी-कभी प्रोसेस के बाद गर्भाशय में बैक्टीरिया पहुंच सकते हैं, जिससे इंफेक्शन हो सकता है। इसके लक्षणों में बुखार, पेट में दर्द और बदबूदार डिस्चार्ज शामिल हो सकते हैं। इसलिए डॉक्टर साफ-सफाई और दवाओं का पूरा कोर्स लेने की सलाह देते हैं।
NCBI की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ दुर्लभ मामलों में प्रोसेस के दौरान उपकरणों से बच्चेदानी की दीवार में चोट लग सकती है, जिसे यूटरिन परफॉरेशन कहा जाता है। यह स्थिति बहुत कम होती है लेकिन गंभीर हो सकती है, इसलिए यह प्रक्रिया हमेशा विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा ही की जानी चाहिए।
रिसर्च के मुताबिक, बच्चेदानी की सफाई कराने के बाद कभी-कभी बच्चेदानी के अंदर स्कार टिश्यू बन जाता है, जिससे अंदरूनी परत चिपक सकती है। इसका असर पीरियड्स सर्कल और आगे होने वाली प्रेगनेंसी पर पड़ सकता है। हालांकि, यह स्थिति बहुत कम मामलों में देखी जाती है, लेकिन इसे गंभीर माना जाता है।
कुछ मामलों में बच्चेदानी का मुंह कमजोर हो सकता है, जिससे आगे चलकर प्रेगनेंसी में दिक्कत आ सकती है। इसके अलावा प्रक्रिया के दौरान दी जाने वाली बेहोशी से कुछ लोगों को चक्कर, उल्टी या कमजोरी भी महसूस हो सकती है।
अगर प्रक्रिया के बाद तेज बुखार, ज्यादा ब्लीडिंग, तेज पेट दर्द या बदबूदार डिस्चार्ज हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण संक्रमण या किसी जटिलता की ओर इशारा कर सकते हैं और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी होता है।
Disclaimer : बच्चेदानी की सफाई कोई नॉर्मल प्रोसेस नहीं है, बल्कि यह एक मेडिकल सर्जरी है। इसे सिर्फ डॉक्टर की सलाह और जरूरत के अनुसार ही करवाना चाहिए। गलत जानकारी या बिना वजह इस प्रक्रिया को कराना बच्चेदानी को नुकसान पहुंचा सकता है।