
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : July 25, 2025 8:18 PM IST
Sleep and fertility- लो फर्टिलिटी रेट आज युवाओं में एक बड़ी समस्या है। लो फर्टिलिटी के कारण कपल्स के लिए फैमिली प्लानिंग मुश्किल हो सकती है। फर्टिलिटी कम होने के कारण हैं लेकिन, कई बार लोगों को इस बात की जानकारी नहीं होती कि वे क्या गलती कर रहे हैं जो उनकी फर्टिलिटी को कम कर सकता है। ऐसी ही एक गलती है रातभर जागना और नींद की कमी। वहीं, एक्सपर्ट्स की मानें तो नाइट शिफ्ट करने वाले लोगों में भी इंफर्टिलिटी का खतरा (Risk of infertility in people working in night shifts) बहुत अधिक होता है।
आजकल की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में कुछ लोगों को दिन की बजाय रात की शिफ्ट में भी काम करना पड़ता है। बार-बार नाइट शिफ्ट करने के कारण लोगों के सोने-जागने का पैटर्न बिगड़ जाता है। स्लीपिंग पैटर्न में आने वाले बदलाव के कारण मोटापा (Obesity) और दिल की बीमारियों का रिस्क (Risk of heart diseases) बढ़ जाता है। वहीं, रातभर जागकर काम करने से पुरुषों और महिलाओं, दोनों में इंफर्टिलिटी की समस्या भी बढ़ सकती है।
रात में जागने से शरीर में हार्मोन्स का असंतुलन बढ़ता है। इससे पुरुषों में जहां स्पर्म क्वालिटी में बदलाव आते हैं वहीं महिलाओं में ओव्यूलेशन की प्रक्रिया पर असर पड़ता है। इन दोनों ही स्थितियों में गर्भधारण कर पाना मुश्किल हो जाता है।
रात में जागने से शरीर की सर्केडियन क्लॉक (Circadian Clock) का काम प्रभावित होता है। यह क्लॉक नेचुरली आपके शरीर में हार्मोन्स, मेटाबॉलिज्म और नींद से जुड़ी गतिविधियों को प्रभावित करता है।
जब किसी की नींद पूरी नहीं होती है तो इससे शरीर में इंसुलिन का असंतुलन बढ़ सकता है। इससे प्रजनन से जुड़े हार्मोन्स (जैसे एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरॉन, और टेस्टोस्टेरोन) के लेवल में भी असंतुलन बढ़ सकता है। वहीं, मोटापा,हार्ट डिजिजेज और मूड स्विंग्स के साथ-साथ इंफर्टिलिटी की समस्या भी बढ़ सकती है।
नवी मुंबई के मदरहुड फर्टिलिटी एंड आयवीएफ हॉस्पिटल में सीनियर आयवीएफ कंसल्टेंट डॉ. रीता मोदी ने बताया कि,"मेलाटोनिन, नींद से जुड़े हुए हार्मोन्स हैं और ये पुरुषों में स्पर्म्स और महिलाओं में एग्ज को सुरक्षित रखते हैं। नाइट शिफ्ट करने वाले लोगों में मेलाटोनिन का लेवल बहुत कम हो जाता है। जिससे महिलाओं के एग्ज और पुरुषों में स्पर्म्स या शुक्राणुओं की क्वालिटी पर भी असर पड़ता है।
डॉक्टर सलाह देती हैं कि लम्बे समय तक नाइट शिफ्ट करने और रात में जागने की आदत के कारण आपकी फर्टिलिटी रेट लगातार प्रभावित हो सकती है। ऐसे में अपनी लाइफस्टाइल की मदद से आप अपनी फर्टिलिटी को सुरक्षित रखने की कोशिश करें। ऐसे ही कुछ उपाय हैं-
नवी मुंबई के मेडिकवर अस्पताल के सीनियर गायनोकोलॉजिस्ट और आयवीएफ कंसल्टेंट डॉ. अनुरंजिता पल्लवी ने कहा कि, "आज के समय में अलग-अलग शिफ्ट्स में काम करना एक आम बात है। इसलिए अच्छा वर्क-लाइफ बैलेंस बनाए रखना, क्वालिटी स्लीप और समय पर मेडिकल सपोर्ट लेना बहुत ज़रूरी है। जिन लोगों को नाइट शिफ्ट की वजह से कंसीव कर पाने में समस्या हो रही है वे आयूआय (IUI) या आयवीएफ (IVF) जैसे मेथड्स से प्रेगनेंसी के लिए भी प्लान कर सकते हैं। सही ट्रीटमेंट और गाइडेंस के साथ अलग-अलग शिफ्ट्स में काम करने वाले लोगों के लिए भी प्रेगनेंसी प्लान करना आसान हो सकता है।"
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।