प्रगनेंसी में बच्चे का वजन अचानक कम क्यों होने लगता है? गर्भवती को कब परेशान होना चाहिए?

गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रेशर बढ़ने से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे प्लेसेंटा तक खून का बहाव कम हो जाता है। यह IUGR का सबसे बड़ा कारण है।

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Written By: Rashmi Upadhyay | Published : May 19, 2026 5:31 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Anjila Aneja

गर्भावस्था के दौरान हर मां अपने गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत और उसके विकास को लेकर बेहद संवेदनशील होती है। डॉक्टर हर चेकअप में बच्चे के वजन और ग्रोथ को चेक करते हैं, ताकि अगर कोई समस्या दिखे तो उसे समय पर पहचानकर इलाज शुरू किया जा सके। लेकिन कई बार ऐसी स्थितियां आ जाती हैं जब गर्भ में बच्चे का वजन बढ़ना धीमा या पूरी तरह से बंद हो जाता है। मेडिकल भाषा में इस स्थिति को IUGR या FGR कहा जाता है। द वुमेन्स हॉस्पिटल की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, ऑब्स्टेट्रिक्स, गायनेकोलॉजी एंड मिनिमल एक्सेस एंड रोबोटिक सर्जन डॉ. अंजिला अनेजा आज इस आर्टिकल के माध्यम से उन कारणों को बता रही हैं जिनमें प्रेगनेंसी में बच्चे का वजन बढ़ना बंद या कम हो जाता है।

किन कारणों या स्थितियों में बच्चे का वजन बढ़ना बंद हो जाता है?

गर्भ में शिशु का विकास पूरी तरह से मां के शरीर, प्लेसेंटा और बच्चे के अपने स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। वजन न बढ़ने के मुख्य निम्न 3 कारण हो सकते हैं:

1. प्लेसेंटा की समस्याएं

प्लेसेंटा ही वह जरिया है जिससे मां के शरीर से ऑक्सीजन और सभी जरूरी पोषक तत्व बच्चे तक पहुंचते हैं। यदि प्लेसेंटा कमजोर हो जाए या सही तरीके से गर्भाशय की दीवार से न जुड़ा हो, तो बच्चे तक पर्याप्त पोषण नहीं पहुंच पाता। इसमें प्लेसेंटा डिलीवरी से पहले ही गर्भाशय से अलग होने लगता है, जिससे बच्चे का विकास रुक जाता है।

2. मां की सेहत और लाइफस्टाइल

गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रेशर बढ़ने से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे प्लेसेंटा तक खून का बहाव कम हो जाता है। यह IUGR का सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा, यदि मां के भोजन में पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन्स और कैलोरी नहीं हैं, तो बच्चे का वजन नहीं बढ़ेगा डॉ अनेजा कहती हैं कि यदि मां को पहले से डायबिटीज, किडनी की बीमारी, दिल की बीमारी या एनीमिया है तो भी बच्चे की ग्रोथ प्रभावित होती है। प्रेगनेंसी ठहरते ही गर्भवती को धूम्रपान, शराब और अपनी मर्जी की दवाएं लेना एकदम बंद कर देना चाहिए।

3. शिशु से जुड़ी समस्याएं

क्रोमोसोमल असामान्यताएं जैसे डाउन सिंड्रोम या अन्य आनुवंशिक दोष भी बच्चे की ग्रोथ को कम या बंद कर सकते हैं। यदि मां को प्रेगनेंसी के दौरान टॉक्सोप्लाज्मोसिस, रूबैला, या साइटोमेगालोवायरस जैसा कोई इन्फेक्शन हो जाए, तो इसका सीधा असर बच्चे के विकास पर पड़ता है। जुड़वां या एक से ज्यादा बच्चे होने पर गर्भाशय में जगह और पोषण बंट जाता है, जिससे वजन कम रह सकता है।

गर्भवती को कब परेशान होना चाहिए?

गर्भावस्था में हर छोटी-बड़ी समस्या पर पैनिक होने की जरूरत नहीं है, लेकिन कुछ ऐसे 'Red Flags' होते हैं जिन्हें नजरअंदाज बिल्कुल नहीं करना चाहिए:

  1. अगर बच्चे की हलचल कम हो जाए तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज न करें। अगर आपको महसूस हो कि बच्चा सामान्य दिनों के मुकाबले कम लात मार रहा है या उसकी मूवमेंट अचानक बहुत कम हो गई है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  2. हर विजिट में अक्सर डॉक्टर मां के पेट को नापते हैं। अगर गर्भावस्था के हफ्तों के हिसाब से पेट का उभार नहीं बढ़ रहा है, तो यह बच्चे के धीमे विकास का संकेत है।
  3. यदि लगातार दो अल्ट्रासाउंड में बच्चेका वजन उसकी जेस्टेशनल एज के 10वें पर्सेंटाइल से कम आता है तो भी परेशानी की बात होती है।
  4. बच्चे के आस-पास का पानी कम होना इस बात का संकेत है कि बच्चे को पर्याप्त पोषण और ऑक्सीजन नहीं मिल रही है।
  5. यदि दूसरी और तीसरी तिमाही में मां का वजन बढ़ने के बजाय घटने लगे तब भी डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी केवल आपकी जागरुकता के लिए हैं। अगर आपको कोई खास लक्षण महसूस हो तो परेशान न हो, समय पर डॉक्टर को दिखाकर जांच कराएं।

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