
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : February 18, 2021 3:37 PM IST
Ultrasound during Pregnancy: अल्ट्रासाउंट या सीटी स्कैन जैसी तकनीक प्रेगनेंसी में बहुत महत्वपूर्ण होती है। क्योंकि, इसकी मदद से भ्रूण के विकास के बारे में समझने में मदद होती है। इसी तरह पेट में बच्चे की गतिविधियों को देखने का अनोखा अनुभव भी अल्ट्रासाउंड की मदद से ही होता है। आमतौर पर अल्ट्रासाउंड पहली और दूसरी तिमाही में किया जाता है। लेकिन, ज़रूरत के आधार पर पहली और तीसरी तिमाही में भी डॉक्टर अल्ट्रासाउंड की सलाह दे सकते हैं। लेकिन, अक्सर सवाल उठता है कि अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) कराने से बच्चे की सहत पर कोई बुरा असर तो नहीं पड़ता। क्या किसी विशेष अवधि के बाद अल्ट्रासाउंड नहीं कराना चाहिए ? इन सवालों का जवाब आपको मिलेगा यहां। आइए जानते हैं कितना सेफ है प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड कराना । (Ultrasound during Pregnancy)
अल्ट्रसाउंड की मदद से भ्रूण के विकास के बारे में समझने में मदद होती है। इसी तरह पेट में बच्चे की गतिविधियों को देखने का अनोखा अनुभव भी अल्ट्रासाउंड की मदद से ही होता है।
कुछ स्टडीज़ की मदद से भ्रूण पर अल्ट्रासाउंड के प्रभाव को समझने की कोशिशें की गयी। इन स्टडीज़ में विभिन्न आयु वर्ग के बच्चों पर ध्यान दिया गया और एक्सपर्ट्स ने पाया कि प्रेगनेंसी के दौरान अल्ट्रासाउंड तकनीक का इस्तेमाल भ्रूण के विकास पर कोई बुरा असर नहीं डालता। स्टडी में कुछ ऐसे बच्चों क भी शामिला किया गया था, जिनका 5 बार तक अल्ट्रासाउंड किया जा चुका था। (Ultrasound during Pregnancy, is it safe?)
वैसे कुछ स्टडीज में यह भी पाया गया कि बच्चे के दिमागी विकास, व्यवहार और भाषाई ज्ञान के ऊपर अल्ट्रासाउंड की वजह से कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ा है। पर, भ्रूण के लिए अल्ट्रासाउंड से नुकसान की आशंका बनी रहती है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, प्रेगनेंसी के पहली तिमाही (18 सप्ताह) में बार-बार अल्ट्रासाउंड करने से भ्रूण पर इसका असर पड़ सकता है। लेकिन, यह प्रभाव बहुत साधारण होता है और इससे बच्चे के दिमागी विकास में अड़चन नहीं आती। चूंकि, किसी भी प्रेगनेंट महिला को पहले ट्राईमेस्टर में एक से 2 बार अल्ट्रासाउंड कराना ही पड़ता है। इसीलिए, मानसिक रूप से इसके लिए तैयार रहें। वहीं, दूसरे ट्राईमेस्टर यानि 3-6 महीने के गर्भ के दौरान बच्चे के विकास का पता लगाने के लिए भी अल्ट्रासाउंड किया जाता है। आमतौर पर अल्ट्रासाउंड 6वें महीने में किया जाता है, ताकि बच्चे के समुचित विकास को समझा जा सके। कुछ विशेष स्थितियों जैसे माता का किसी बीमारी से पीड़ित होने पर या भ्रूण में किसी प्रकार की समस्या होने पर एक से ज़्यादा बार भी अल्ट्रासाउंड कराना पड़ सकता है।
कुछ विशेष स्थितियों जैसे माता का किसी बीमारी से पीड़ित होने पर या भ्रूण में किसी प्रकार की समस्या होने पर एक से ज़्यादा बार भी अल्ट्रासाउंड कराना पड़ सकता है।
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