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Written By: Jitendra Gupta | Updated : July 1, 2021 8:05 PM IST
IVF ट्रीटमेंट कराने से पहले महिला हो या पुरुष डाइट से लेकर लाइफस्टाइल में कर लें ये बदलाव, तभी पैदा होगा हेल्दी बच्चा
हम सभी जानते हैं कि शरीर पर जरूरत से ज्यादा चर्बी होना कितना हानिकारक होता है। शायद आपको न पता हो कि शरीर का अधिक वजन करीब 30 प्रतिशत बांझपन के मामलों से जुड़ा हुआ है। वे महिलाएं, जो मोटापे का शिकार हैं, उनमें सामान्य महिलाओं की तुलना में बांझपन की दर तीन गुना तक अधिक पाई गई है। हालांकि इन सबके बीच अच्छी खबर यह है कि, जिन महिलाओं का वजन अधिक है वे सिर्फ 5 प्रतिशत तक अपना वजन कम कर प्रजनन क्षमता में सुधार कर सकती हैं।
वहीं बात करें पुरुषों में तो मोटापा उनके शुक्राणुओं की संख्या, शुक्राणु की गुणवत्ता, टेस्टोस्टेरोन और अन्य हार्मोन को प्रभावित करता है। आपको बता दें कि लगभग 33 प्रतिशत पुरुष शुक्राणु संबंधी समस्याओं के कारण बांझपन का शिकार होते हैं। अगर आप भी ऐसी ही स्थिति से गुजर रहे हैं तो परेशान न हों। आप कुछ साधारण जीवनशैली की आदतों में बदलाव कर प्रजनन क्षमता की संभावनाओं को बढ़ा सकते हैं। इस लेख में हम आपको ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि किसी भी प्रकार के फर्टिलिटी उपचार के लिए जाने से पहले कुछ सरल टिप्स फॉलो कर लें।
कुछ अध्ययनों से ये सामने आया है कि स्वस्थ जीवनशैली को फॉलो कर और डाइट में कुछ छोटे-मोटे बदलाव कर पुरुष और महिलाएं दोनों ही बांझपन के जोखिम को 80 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं। आइए जानते हैं कौन से हैं ये बदलाव।
1-फुल फैट वाले दूध का सेवन शुरू कर दें, जो हेल्दी ओव्यूलेशन और ओवेरियन डिस्फंक्शन के कम जोखिम से जुड़ा हुआ है। बता दें कि लो फैट दूध ओवुलेटरी डिसफंक्शन के खतरे को बढ़ा सकता है।
2-ज्यादा से ज्यादा प्रोटीन युक्त आहार लें। मांस और सब्जियों से प्रोटीन इनटेक बढ़ाने की कोशिश करें। हालांकि आपको पशु से मिलने वाले प्रोटीन से बचना चाहिए क्योंकि इससे बांझपन का खतरा बढ़ सकता है।
3-सोया का सेवन करने से महिला प्रजनन क्षमता भी बढ़ सकती है। जबकि पुरुषों को सोया से बचना चाहिए क्योंकि इससे शुक्राणुओं की संख्या कम हो सकती है।
4-शुक्राणुओं की संख्या और ओव्यूलेशन को बढ़ाने के लिए अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करें।
5-पुरुषों को अपनी डेली डाइट में अखरोट जरूर शामिल करना चाहिए।
6-पुरुषों और महिलाओं दोनों को बीन्स खाने चाहिए।
7-ट्रांस फैट लेने से बचें क्योंकि वे प्रजनन क्षमता के उच्च जोखिम से जुड़ा हुआ है।
आपके एक्सरसाइज करने का तरीका भी आपके आईवीएफ उपचार को सफल बनाने में मदद कर सकता है। हां, ऐसा नहीं है कि आप बहुत सरल या फिर औसत किस्म की एक्सरसाइज कर रहे हैं, इससे आपके बांझपन का जोखिम बढ़ सकता हैं और शुक्राणु की गुणवत्ता में कमी आ सकती है। शुक्राणु की खराब गुणवत्ता से गर्भपात हो सकता है। 15 मिनट से कम एक्सरसाइज करने से बांझपन का खतरा बढ़ सकता है।
ओरल हेल्थ महत्वपूर्ण है। दांतों की कैविटी, मसूड़ों की बीमारी और पीरियोडोंटाइटिस भी आईवीएफ की सफलता दर को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
पुरुषों और महिलाओं को प्रजनन क्षमता दुरुस्त रखने के सही वजन बनाए रखना बहुत ही जरूरत है। अधिक वजन और कम वजन दोनों ही आपकी प्रजनन क्षमता को कम करने से जुड़े हुए हैं।
शराब भी आपकी प्रजनन क्षमता, गर्भधारण को प्रभावित कर सकती है फिर चाहे वो पुरुष हो या महिलाएं दोनों ही इससे प्रभावित होते हैं।
तनाव प्रजनन क्षमता को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। आप अपने तनाव को काबू में रखने के लिए योग, एक्यूपंक्चर, सांस लेने के व्यायाम, ध्यान जैसे अभ्यास कर सकते हैं।