गर्भवती महिलाएं किन बातों का ध्यान रखें, जिससे सिजेरियन डिलीवरी की जगह नॉर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ जाएं
गर्भवती महिलाएं किन बातों का ध्यान रखें, जिससे सिजेरियन डिलीवरी की जगह नॉर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ जाएं
गर्भावस्था के दौरान आपकी कुछ छोटी-छोटी आदतें नॉर्मल डिलीवरी की संभावनाओं को कई गुना बढ़ा सकती हैं, सिजेरियन के दौरान होने वाला जोखिम भी कम हो सकता है। इस लेख में हम आयुर्वेदिक फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स से जानेंगे।
Written By:
Mukesh Sharma
| Published : July 26, 2026 10:29 AM IST
गर्भवती महिला के पास डिलीवरी के मुख्य रूप से दो तरीके होते हैं, नॉर्मल डिलीवरी या सी-सेक्शन डिलीवरी। हालांकि, सी-सेक्शन डिलीवरी पूरी तरह से सेफ होती है और कुछ महिलाएं नॉर्मल डिलीवरी की बजाय उसी को चुनती हैं, जबकि ज्यादातर महिलाएं नॉर्मल डिलीवरी को ही चुनती हैं, क्योंकि वह नेचुरल होती है। हालांकि, गर्भावस्था के दौरान अपने स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होती है, जिसकी मदद से नॉर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ जाते हैं और नॉर्मल डिलीवरी के दौरान किसी तरह की जटिलता होने का खतरा भी कम हो जाता है। दिल्ली के आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और फर्टिलिटी डॉ. चंचल शर्मा ने बताया कि अगर आपकी प्रेग्नेंसी सामान्य रूप से आगे बढ़ रही है और आप सिजेरियन डिलीवरी के बारे में सोच रही हैं, तो हमें उम्मीद है कि आप इस बात का ध्यान रखेंगी कि यह फैसला आपके बच्चे को जन्म देने के अनुभव पर कैसा असर डाल सकता है।
नार्मल डिलीवरी के चांस बढ़ने के उपाय
नॉर्मल डिलीवरी यानी प्रसव का प्राकृतिक तरीका जो कि पूरी तरह से नेचुरल होता है और सुरक्षित माना जाता है। लेकिन लगातार खराब हो रही जीवनशैली और खानपान से नॉर्मल डिलीवरी के चांस कम हो रहे हैं और जटिलताएं बढ़ रही हैं। ऐसे में कुछ तरीके हैं, जिनकी मददसे नॉर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ाए जा सकते हैं।
एक्टिव रहें - अगर प्रेग्नेंसी में कोई दिक्कत न हो, तो रोज़ हल्की सैर करें और प्रीनेटल योग करें। फिजिकली एक्टिव रहने से पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जिससे डिलीवरी के समय मदद मिलती है।
सामान्य वजन बनाएं रखें - बहुत ज्यादा वजन बढ़ने से बच्चा बड़ा हो सकता है और जेस्टेशनल डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ सकता है—ऐसी स्थितियां जिनमें सिजेरियन सेक्शन की ज़रूरत पड़ सकती है। "दो लोगों के लिए खाने" के बजाय, बैलेंस्ड और पोषक तत्वों से भरपूर डाइट पर ध्यान दें।
शरीर में पानी की कमी न होने दें - यह सुनिश्चित करें कि आपके शरीर में पानी की कमी न हो; सही हाइड्रेशन लेबर के दौरान एनर्जी लेवल बनाए रखने में मदद करता है।
रेगुलर चेक-अप और अल्ट्रासाउंड - अपने डॉक्टर के संपर्क में रहें, नौवें महीने में अल्ट्रासाउंड से पता चलता है कि बच्चा सिर-नीचे पोजीशन में है या नहीं और डिलीवरी के लिए पेल्विक बोन की स्थिति कैसी है। सही समय पर सही जानकारी होने से जोखिम कम करने में मदद मिलती है।
तनाव से बचें - बहुत ज्यादा चिंता या डर लेबर प्रोसेस पर असर डाल सकता है। गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज़ (जैसे लामाज तकनीक) और मेडिटेशन से मानसिक मजबूती बढ़ाएं।
सही हॉस्पिटल/डॉक्टर चुनें - अपनी पसंद के बारे में डॉक्टर से पहले ही बात करें और ऐसा मैटरनिटी हॉस्पिटल चुनें जहां नॉर्मल डिलीवरी का रेट अच्छा हो और अनुभवी गायनेकोलॉजिस्ट हों।
किन बातों का ध्यान रखें
गर्भवती महिलाओं को नार्मल डेलिवरी की कोशिश करनी चाहिए, जब तक कि सिजेरियन सेक्शन की कोई मेडिकल वजह न हो, क्योंकि सिजेरियन सेक्शन से ब्लैडर और आंतों में चोट लगने का जोखिम होता है, साथ ही भविष्य की प्रेगनेंसी में गंभीर जटिलताएं भी हो सकती हैं।
बच्चे की लिए जोखिम - डिलीवरी के बाद बच्चे को सांस लेने में तकलीफ़ होने और भविष्य में डायबिटीज, मोटापा और एलर्जी होने की संभावना बढ़ जाती है। जिससे बच्चे को माँ के साथ सीधे स्किन-टू-स्किन कॉन्टैक्ट और जल्दी ब्रेस्टफ़ीडिंग शुरू करने जैसे फ़ायदे भी नहीं मिल पाते हैं।
दर्दनाक अवधि - अगर मेडिकल तौर पर जरूरी न हो, तो सिर्फ़ लेबर पेन (प्रसव पीड़ा) के डर से सिजेरियन डिलीवरी का प्लान नहीं बनाना चाहिए। हालांकि सिजेरियन प्रक्रिया के दौरान आप दर्द से बच सकती हैं, लेकिन सर्जरी के बाद दर्द को संभालने के लिए आपको पेनकिलर लेने की जरूरत पड़ सकती है।
डॉ. चंचल शर्मा से जानें नेचुरल प्रेगनेंसी टिप्स
आयुर्वेद में माना गया है कि जितना जरूरी आपका शारीरिक स्वास्थ्य है उससे कई ज्यादा आपका मानसिक स्वास्थ्य जरूरी है, क्योंकि अगर आपका मन शांत रहेगा तभी आपका शरीर भी संतुलित रहेगा। प्रेग्नेंसी के आठवें महीने में जितना हो सके सोना चाहिए, क्योंकि यह एक उत्कृष्ट समय होता है। इस दौरान 'ओजस' नाम का सूक्ष्म तरल पदार्थ मां से बच्चे तक पहुंचता है, जो ऊर्जा और इम्यून सिस्टम के काम करने के लिए जरूरी होता है।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य नॉर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ाने और सिजेरियन डिलीवरी की जरूरत कम करने से जुड़ी जरूरी जानकारी देना है। इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और उसके लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
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