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Pregnancy symptoms in first month: प्रेगनेंसी का शुरूआती समय महिलाओं के लिए भावनात्मक स्तर पर एक बहुत ही स्पेशल समय होता है। इस दौर में महिलाएं खुशी, चिंता, डर और उत्साह जैसी फीलिंग्स महसूस होती है। हालांकि, प्रेगनेंसी की शुरूआत के लक्षणों (Early symptoms of pregnancy) का पता चलने के साथ ही महिलाओं को सावधान होने और अपनी हेल्थ का ख्याल रखने की सलाह दी जाती है। हालांकि, कई महिलाओं को प्रेगनेंसी का पता चलने तक लगभग 8-9 सप्ताह का समय लग सकता है। वहीं, शरीर में होनेवाले कुछ बदलाव प्रेगनेंसी के शुरूआती लक्षण (changes in body during start of a pregnancy) हो सकते हैं। लेकिन, कभी-कभी महिलाओं को गर्भावस्था के ये शुरूआती लक्षण (initial signs and symptoms of preganacy) समझ नहीं आते और पीरियड्स मिस होने (missing periods) के बाद जब वे टेस्ट कराती हैं तब उन्हें पता चलता है कि वे प्रेगनेंट हैं।
महिलाओं को प्रेगनेंसी के पहले सप्ताह से ही शरीर में कुछ बदलाव होने लगते हैं। अगर महिलाएं इन संकेतों पर ध्यान दें तो वे समझ सकती हैं कि वे प्रेगनेंट हैं। यहां पढ़ें प्रेगनेंसी के उन्हीं लक्षणों के बारे में जो पहले कुछ सप्ताह (Pregnancy signs visible after few weeks of conceiving) में दिखायी देते हैं।
प्रेगनेंसी का एक प्रमुख लक्षण है ब्लीडिंग या रक्तस्राव। महिलाओं की बच्चेदानी में जब फर्टिलाइज्ड एग सेटल होने लगता है तो इस दौरान कुछ कोशिकाएं फट जाती हैं। इस सेल्स के फटने से थोड़ी-बहुत ब्लीडिंग हो सकती है। यह ब्लड फ्लो माहवारी के दौरान होने वाली ब्लीडिंग से अलग होता है। इसीलिए, प्रेगनेंसी के दौरान आपको हल्की-फुल्की ब्लीडिंग और बच्चेदानी में तेज दर्द और मरोड़ें उठती हैं।
यह भी एक महत्वपूर्ण लक्षण है जो गर्भधारण के तुरंत बाद दिखायी दे सकता है। महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोन्स के उतार-चढ़ाव (Changes in hormones level in the body( की वजह से वेजाइनल वॉल्स मोटी होने लगती है और सेल्स का आकार भी तेजी से बढ़ने लगता है। इसी प्रक्रिया के दौरान डिस्चार्ज (Vaginal discharge causes) जैसे लक्षण भी दिखायी देने लगते हैं।
प्रेगनेंसी की वजह से यूट्रस का आकार बढ़ने लगता है और शरीर में खून का स्तर भी बढ़ जाता है। इन दोनों कारणों से ब्लैडर (Bladder) में अधिक मात्रा में तरल पदार्थ जमा होने लगते हैं जिससे बार-बार पेशाब करने जाना पड़ सकता है। इस स्थिति को फ्रीक्वेंट यूरिनेशन अर्ज (urge for frequent urination) भी कहा जाता है।
शरीर में हो रहे लगातार बदलावों के बीच महिलाओं की मेंटल हेल्थ भी प्रभावित होती है। इससे उन्हें, चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है। अचानक से महिलाएं बहुत इमोशनल हो जाती हैंं। हार्मोन्स के स्तर में उतार-चढ़ाव आने से महिलाओं को मूड स्विंग्स होते हैं वे अक्सर, थकी-थकी, परेशान और सुस्त दिखायी देती हैं।
प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में ब्रेस्ट भारी लगने लगते हैं, उनमें दर्द और टेंडरनेस महसूस होने लगती है। इस लक्षण के दिखने के बाद आप डॉक्टर से टेस्ट के लिए सम्पर्क कर सकती हैं।