
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Updated : September 25, 2024 1:55 PM IST
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Water Bag Break During pregnancy : गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को कई तरह की परेशानियों को झेलना पड़ता है, जिसमें शरीर में कई तरह के पोषक तत्वों की कमी, हाथ-पैरों में परेशानी, सोने में दिक्कतें, मूड स्विंग्स इत्यादि। इसके साथ-साथ उल्टी होना, सिरदर्द होना, मतली जैसा अनुभव होना, खाने की इच्छा न होना जैसी समस्याओं का भी अनुभव होता है। ऐसे में महिलाओं को अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। हालांकि, इस तरह की परेशानी गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में अधिक होती हैं। वहीं, गर्भावस्था के अंतिम दिनों में महिलाओं को वॉटर ब्रेक की दिक्कत हो सकती है, जिसकी समय पर पहचान करना बहुत ही जरूरी हो जाता है। डॉक्टर्स का कहना है कि अगर आप समय से पहले वॉटर ब्रेक हो जाए, तो महिलाओं को कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं। इसलिए आपको थोड़ा अधिक सतर्क होना पड़ता है। आइए मदरलैंड हॉस्पिटल की गायोनोक्लॉजिस्ट डॉ. मनीषा सक्सेना से जानते हैं गर्भावस्था के दौरान वॉटर ब्रेक होने पर क्या दिक्कतें हो सकती हैं और किस तरह करें इसकी पहचान?
अगर आप समय पर वॉटर ब्रेक की पहचान नहीं कर पाते हैं, तो इससे कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं। आइए जानते हैं उन परेशानियों के बारे में-
पानी की थैली शिशु को प्रोटेक्ट करके रखता है। अगर यह फट जाए, तो इससे गर्भाशय में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। संक्रमण होने की स्थिति में महिलाओं को बुखार, असामान्य वजाइनल ब्लीडिंग, पेट के निचले हिस्से में दर्द और पल्स रेट काफी ज्यादा बढ़ सकता है। ऐसे में प्रीमैच्योर डिलीवरी हो सकती है।
समय से पहले अगर वॉटर ब्रेक हो जाए, इसकी वजह से तुरंत ही डिलीवरी करानी पड़ सकती हैं। क्योंकि थैली फटने की वजह से संक्रमण का खतरा होता है, जिससे कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं।
यह तब होता है जब प्रसव से पहले प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार से अलग हो जाता है। इस स्थिति में आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाना होता है।
पानी की थैली फटने की वजह से शिशुओं को गर्भनाल से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। इस तरह की परेशानी अक्सर वॉटर ब्रेक होने के बाद हो होती है।
यदि पानी की थैली फट जाए, तो रक्त वाहिकाएं फट सकती हैं, जिससे वजाइनल ब्लीडिंग शुरू हो सकती है। यह गर्भ में पल रहे शिशुओं के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
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फ्लूइड लीकेज : वॉटर ब्रेन होने पर आपको पानी जैसे लीकेज का अनुभव हो सकता है। यह रिसाव तेज या फिर धीमी-धीमी गति में महसूस होता है। फ्लूइड आमतौर पर साफ या हल्का पीले रंग का गंधहीन होता है।
सेशन सा महसूस होना : पानी की थैली फटने पर महिलाओं को हल्का सा चटकने जैसा एहसास हो सकता है या आपको कुछ भी महसूस नहीं हो सकता है।
संकुचन: प्रेगनेंसी में वॉटर टूटने के बाद आपको अधिक संकुचन का अनुभव हो सकता है।