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Written By: Anshumala | Published : August 13, 2018 1:22 PM IST
प्रेगनेंसी के नौ महीने काफी सावधानी बरतने की जरूरत होती है क्योंकि यह पूरे नौ महीने काफी मुश्किलों भरा समय हो सकता है। इस दौरान खाने-पीने से लेकर सही समय पर दवाइयों का सेवन आदि करना बहुत जरूरी है। कुछ बातों का ख्याल रखकर आप इस मुश्किल समय को भी अच्छी यादों में बदल सकती हैं। शोधकर्ताओं की मानें तो हेल्दी बच्चा और सुरक्षित डीलवरी के लिए अगर इन पांच चीजों पर ध्यान रखें तो प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने खुशनुमा बीतेंगे।
तनाव खुद पर न होने दें हावी
इजरायल के वेजमान इंस्टीट्यूट में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि प्रेगनेंट महिलाओं को अधिक तनाव लेना उनके साथ-साथ उनके गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। अधिक तनाव लेने से बच्चे के बड़े होने पर ज्यादा खाने की आदत पड़ जाती है। चूहों पर हुए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि मां के चिंता में रहने से चूहों में कुछ आनुवांशिक बदलाव देखे गए, जो चूहों के परिपक्व होने पर उनमें ज्यादा खाने की आदत को जन्म देते हैं।
धूप से बचना ठीक नहीं
एक स्टडी के अनुसार, गर्भधारण और हेल्दी प्रेगनेंसी के लिए सूरज की रोशनी में रहना जरूरी है। शोधकर्ताओं के अनुसार, जिन महिलाओं में विटामिन डी कमी थी, उनके मुकाबले जिनमें विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा मिली, उनके गर्भ गिरने के बाद दोबारा गर्भधारण की संभावना ज्यादा पाई गई।
खानपान का ध्यान रखें
गर्भावस्था के दौरान आपने कैसी डायट ली है, इसका असर आपके बच्चे पर भी होता है। मां के खानपान की आदतों और चयापचय का सीधा असर बच्चे के विकास पर पड़ता है इसलिए डॉक्टर गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्यवर्धक चीजें खाने की सलाह देते हैं। फल, सब्जी, दालें, अनाज, दूध, दही, मांस-मछली, अंडा, दूध से बने खाद्य पदार्थ आदि का भरपूर सेवन करें।
एक्सरसाइज भी है जरूरी
कई महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान एक्सरसाइज करने से घबराती हैं, पर स्पेन मं हुए एक अध्ययन में यह कहा गया है प्रेगनेंसी में भी आप डॉक्टर की सलाह से एक्सरसाइज कर सकती हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, एक्सरसाइज का लाभ मां के साथ-साथ बच्चे पर भी होता है। साथ ही जितना आप काम करेंगी, शारीरिक रूप से एक्टिव रहेंगी उतना ही आपकी डीलवरी आसानी से होगी।
वजन न बढ़ने दें
प्रेगनेंसी से पहले आपका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) बच्चे की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है। शोधकर्ताओं ने गर्भावस्था से पहले मां के बीएमआई और बच्चे के चयापचय के बीच संबंध देखा। शोधकर्ता यह मानते हैं कि मां के मोटापे की वजह से बच्चे की चयापचय क्रिया प्रभावित होती है। इससे पहले हुए अध्ययनों में शोधकर्ताओं ने गर्भावस्था के दौरान बच्चे को होने वाली बीमारी, मसलन सेरेब्रल पाल्सी, मिर्गी और अन्य प्रमुख जन्म दोषों का मोटापे के बीच संबंध पाया।
चित्रस्रोत: Shutterstock.
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