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Smoking risk for mother and baby- स्मोकिंग या धूम्रपान के नुकसान की बात करें तो आप सबने सुना होगा कि इससे फेफड़े या लंग्स खराब हो सकते हैं। वहीं, बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी होती है कि स्मोकिंग से महिलाओं की फर्टिलिटी पॉवर (woman’s fertility), प्रेगनेंसी हेल्थ (pregnancy health) और बच्चे के विकास (गर्भ में और जन्म के बाद भी) पर असर पड़ सकता (Smoking during pregnancy can affects baby’s development both before and after birth) है। जैसा कि प्रजनन करने की उम्र वाली महिलाओं में स्मोकिंग की आदत (women of reproductive age) में लगातार इजाफा हो रहा है ऐसे में स्मोकिंग से लंग्स को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ प्रेगनेंसी के दौरान कई तरह की समस्याएं भी बढ़ सकती है। इसीलिए, अगर आप प्रेगनेंसी प्लान कर रही हैं तो आपको स्मोकिंग की आदत छोड़ देनी चाहिए।
वहीं, अगर कोई महिला सिगरेट नहीं पीती लेकिन, सेंकेंड हैंड स्मोकिंग (second-hand smoke) की वजह से भी उन्हें इतना ही नुकसान पहुंच सकता है। इसीलिए, प्रेगनेंसी प्लान करने से पहले महिलाओं को अपनी हेल्थ और बच्चे की हेल्थ का ध्यान रखते हुए स्मोकिंग से बचना चाहिए।
पुणे को मदरहुड हॉस्पिटल में गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. पद्मा श्रीवास्तव (Dr Padma Srivastava, Consultant Obstetrician & Gynaecologist, Motherhood Hospitals, Lullanagar, Pune) कहती हैं कि, प्रेगनेंसी में स्मोकिंग की आदत से मां और बच्चे दोनों की सेहत को नुकसान पहुंच सकता है। सिगरेट में कई हानिकारक केमिकल्स पाए जाते हैं। सिगरेट में मौजूद निकोटिन ( nicotine), कार्बन डायऑक्साइड ( carbon monoxide) और टार (tar) जैसे केमिकल्स होते हैं जो प्लेंसेंटा की तरफ ऑक्सीजन की सप्लाई कम कर देता है। इससे भ्रूण के विकास पर असर पड़ सकता है। वहीं, स्मोकिंग के कारण इन स्थितियों का खतरा भी बढ़ सकता है-
इसके अलावा निकोटिन यूट्रस में ब्लड फ्लो को प्रभावित करता है। जिससे गर्भ में बच्चे की गतिविधियां कम हो जाती (restricted fetal development) हैं।
सिगरेट में पाया जाने वाला निकोटिन ब्रेस्ट मिल्क में भी मिक्स हो सकता है। यह दूध पीने से बच्चे को नींद से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं, बच्चों के न्यूरोडेवलपमेंट पर भी प्रभाव पड़ता है। डॉ. पद्मा के अनुसार स्मोकिंग करने वाली महिलाओं में एक्टोपिक प्रेगनेंसी (ectopic pregnancies) और डिलीवरी के समय दर्द और तकलीफ हो सकती हैं। वहीं, महिलाओं को आईवीएफ जैसी फर्टिलिटी ट्रीटमेंट्स (in vitro fertilization) की सफलता का चांस भी कम होता है।”