नेचुरल कंसीव करने के लिए शरीर देता है ये संकेत, ओव्यूलेशन फेज की ऐसे करें पहचान

How to Identify Natural Fertility Cycle : अगर महिला का शरीर नेचुरल कंसीव करने के लिए तैयार है, तो बॉडी कुछ संकेत देती है। इन पर ध्यान दिया जाए, तो बिना टेस्ट के ही नेचुरल प्रेग्नेंसी हो सकती है। आइए आपको विस्तार से बताते हैं।

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Written By: Kishori Mishra | Published : November 3, 2025 1:22 PM IST

How can I check my fertility Naturally : आजकल महिलाओं को नेचुरली कंसीव करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। दरअसल, व्रक लाइफ का स्ट्रेस, अनहेल्दी खान-पान और बिजी लाइफस्टाइल ये सब चीजें महिलाओं के शरीर को प्रभावित करते हैं, जिससे हार्मोन्स अंसतुलित हो जाते हैं। ऐसे में कंसीव करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। पिछले कुछ सालों में महिलाओं में इन्फर्टिलिटी के बढ़ते केसेज देखे जा रहे हैं। खैर, जिन महिलाओं की बॉडी हेल्दी होती है और उनके हार्मोन्स बैलेंस व एक्टिव रहते हैं, तो उनका शरीर कुछ संकेत देता है, जिन पर ध्यान दिया जाए तो बिना टेस्ट के पता लगाया जा सकता है कि कौन से दिन आपके फर्टाइल डेज हैं। इस आर्टिकल में हम आपको उन संकेतों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो नेचुरली कंसीव करने के लिए बेस्ट फर्टाइल डेज के बारे में बताते हैं।

ओव्यूलेशन पर ध्यान देना

ओव्यूलेशन वह प्रक्रिया है, जब अंडा ओवम से निकलकर फैलोपियन ट्यूब तक पहुंचता है। यहीं पर एग्स और स्पर्म का मिलन होता है। कंसीव करने के लिए ओव्यूलेशन पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। जब ओव्यूलेशन होता है, तो सर्वाइकल म्यूकस काफी पतला और ट्रांसपेरेंट होता है। साथ ही अगर आप इसे दो उंगलियों के बीच रखकर खींचते हैं, तो यह एक लंबी तार की तरह दिखाई देता है। अगर पीरियड्स टाइम पर आते हैं, तो ओव्यूलेशन अमूमन पीरियड्स के 12वे से 16वें दिन के बीच होता है।

हार्मोन्स का बैलेंस रहना

बता दें कि महिलाओं में प्रेग्नेंसी हमेशा हार्मोन्सपर टिकी होती है। यदि एक महिला के शरीर में हार्मोन्स का लेवल सामान्य है और गर्भधारण करने में अन्य कोई समस्या नहीं है, तो आसानी से कंसीव हो जाता है। दरअसल, कंसीव करने के लिए प्रोजेस्टेरोन हार्मोन काफी अहम होता है, जो प्रेग्नेंसी को सपोर्ट करता है। यह ओव्यूलेशन के बाद एक्टिव होता है।

बेसल बॉडी टेम्परेचर

आप अपने फर्टाइल डेज में हैं या नहीं, यह जानने के लिए आप अपने शरीर के तापमान पर भी नजर रख सकती हैं। दरअसल, ओव्यूलेशन से एक-दो दिन पहले से बॉडी का तापमान हल्का सा बढ़ा हुआ होता है। हालांकि, यह बुखार जैसा नहीं होता है। यह तापमान ओव्यूलेशन के एक-दो दिन बाद तक बना रह सकता है।

पेट में हल्का का दर्द

जब एग रिलीज होता है, तब पेट के निचले हिस्से में एक तरफ हल्का सा दर्द महसूस होता है। यह एक खिंचाव यानी क्रैम्प्स की तरह होता है, जो कुछ घंटों या फिर एक दिन के लिए हो सकता है। इसके अलावा, ब्रेस्ट में हल्की सी सूजन भी देखने को मिल सकती है।

नेचुरल प्रेग्नेंसी के लिए पीरियड्स साइकल पर ध्यान रखना है जरूरी

यदि नेचुरली कंसीव करना चाहती हैं, तो इसके लिए अपने पीरियड साइकल पर ध्यान रखना बहुत है। अगर आपको पीरियड्स 28 से 32 दिन के बीच आते हैं, तो यह नॉर्मल है। डेट से एक-दो दिन पहले या बाद में होना भी सामान्य होता है। हालांकि, कभी-कभी बहुत पहले या फिर कई दिन लेट होना, यह सामान्य नहीं होता है। यह किसी सिस्ट, थायरॉइड या फिर हार्मोन्स के असंतुलन की वजह से हो सकता है। जो महिलाओं की फर्टिलिटी को प्रभावित करते हैं। ऐसे में अपने पीरियड्स साइकल को नियमित बनाने की कोशिश करें। यदि यह अनियमित है, तो एक बार डॉक्टर से जरूर संपर्क करें। इसके अलावा, अपने खान-पान पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।

Highlights

  • पीरियड्स डेट से कर सकते हैं ओव्युलेशन की पहचान
  • शरीर का तापमान अगर हल्का सा बढ़ा है, तो यह ओव्युलेशन की ओर संकेत कर सकता है।
  • कंसीव करने के लिए डाइट पर ध्यान देना जरूरी होता है।
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