
अंजू रावत
अंजू रावत एक अनुभवी हेल्थ, फिटनेस, रिलेशनशिप, ब्यूटी और लाइफस्टाइल लेखक हैं, जिन्हें इन विषयों पर लिखने ... Read More
Written By: Anju Rawat | Published : February 7, 2026 1:07 PM IST
Medically Verified By: Dr. Archana Dhawan Bajaj
पेट में बच्चे की हलचल शुरू हो गई है? आपको बच्चे की मूवमेंट फील होने लगी है? तो आपको बता दें कि ऐसा प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही से शुरू हो जाता है। इस तिमाही में शिशु का विकास काफी हद तक हो चुका होता है और इसे अल्ट्रासाउंट की मदद से देखा जा सकता है। अगर आप भी प्रेग्नेंट हैं या भविष्य में कंसीव करने का प्लान कर रही हैं? तो यह लेख आपके लिए बेहद जरूरी है।
Pregnancy Second Trimester: जब एक कपल की शादी होती है, तो उसका सबसे पहला सपना होता है माता-पिता बनना। यह जीवन के सबसे खूबसूरत अहसासों में से एक होता है। इसके लिए कपल प्रेग्नेंसी प्लान करता है और फिर जब महिला कंसीव कर लेती है, तो वह प्रेग्नेंसी की जर्नी को बेहद खुशनुमा बनाने की पूरी कोशिश करती है। लेकिन, इस दौरान हार्मोनल बदलावों की वजह से महिला को कई तरह के शारीरिक और मानसिक बदलावों से गुजरना पड़ता है। प्रेग्नेंसी के पूरे सफर (9 महीने) को तीन तिमाही में बांटा गया है। इसमें सबसे पहले पहली तिमाही आती है, जो बेहद संवेदनशील होती है और यह 12 सप्ताह की होती है। इसके बाद, प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही आती है, जिसमें शिशु विकसित हो चुका होता है और वह हलचल करना भी शुरू कर देता है। इस तिमाही में मां, अपने बच्चे की मूवमेंट को महसूस कर सकती है। इस दौरान सब लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि दूसरी तिमाही में शरीर में क्या-क्या बदलाव आते हैं? दूसरी तिमाही में शिशु का कितना विकास हो जाता है? दूसरी तिमाही में क्या लक्षण महसूस होते हैं? आइए, नर्चर की स्त्री रोग विशेषज्ञ और आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ. अर्चना धवन बजाज (Dr. Archana Dhawan Bajaj, Gynaecologist and IVF Expert at Nurture) से जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब-

प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही आमतौर पर 13वें से 27वें सप्ताह तक होती है। ज्यादातर महिलाओं के लिए दूसरी तिमाही को बेहद आरामदायक माना जाता है। यानी इस तिमाही में ज्यादा मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ता है। कुछ महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दूसरी तिमाही में उल्टी, मतली और थकान जैसा भी महूसस हो सकता है। हालांकि, इस तिमाही में शरीर में ऊर्जा का स्तर बना रहता है। हार्मोनल बदलावों की वजह से शरीर में दर्द हो सकता है। दूसरी तिमाही में शिशु की हलचल महसूस होने लगती है। इसलिए इस तिमाही में महिला को विशेष ध्यान देना और सावधानी बरतनी जरूरी होती है। इस दौरान महिलाओं को कुछ मेडिकल टेस्ट भी करवाने जरूरी होते हैं, जिनसे शिशु का विकास दिखता है और मां की सेहत का पता चलता है।
डॉ. अर्चना धवन बताती हैं, "प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही में, पहली तिमाही की तुलना में कम दिक्कतें होती हैं। दूसरी तिमाही में उल्टी, मतली और दर्द भी कम हो जाता है। हालांकि, इस दौरान गर्भाशय का आकार बढ़ जाता है। इसकी वजह से आपको बैठने-उठने में मुश्किल हो सकता है और पेल्विक एरिया पर दर्द महसूस हो सकता है। प्रेग्नेंसी के दौरान रेगुलर एक्सरसाइज जरूर करनी चाहिए, इससे डिलीवरी के समय होने वाले दर्द को कम किया जा सकता है। साथ ही, अपनी डाइट का भी पूरा ख्याल रखें।"
प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही में सबसे पहला लक्षण बढ़ता हुआ पेट दिख सकता है। दूसरी तिमाही में गर्भाशय का आकार बढ़ने लगता है। इसकी वजह से पेट बाहर निकलने लगता है और स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगता है। इस तिमाही में पेट में स्ट्रेच मार्क्स भी नजर आ सकते हैं।
प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही में त्वचा पर बदलाव नजर आ सकते हैं। इस दौरान चेहरे पर काले-धब्बे (मेलास्मा) हो सकते हैं। दूसरी तिमाही में महिला के चेहरे पर काले धब्बे नजर आ सकते हैं, जो लंबे समय तक बने रहते हैं। इसके अलावा, पेट के बीच में एक काली रेखा दिखाई दे सकती है।
दूसरी तिमाही में शिशु की हलचल महसूस होने लगती है। लगभग 16 से 20वें सप्ताह के बीच पेट पर थोड़ी-थोड़ी हलचल महसूस हो सकती है। यह मूवमेंट हर महिला के जीवन को खुशियों से भर देता है।

प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही में शरीर के विभिन्न हिस्सों में दर्द होना शुरू हो जाता है। इस दौरान पेट, कूल्हों और जांघों में ऐंठन महसूस हो सकती है। दूसरी तिमाही में गर्भाशय का आकार बढ़ जाता है। इसलिए इस दौरान कमर दर्द और पेल्विक एरिया में दबाव महसूस हो सकता है।
इस दौरान स्तनों के आकार में बदलाव नजर आ सकता है। स्तनों का आकार बढ़ सकता है। निप्पल के आस-पास का हिस्सा गहरा हो जाता है। कभी-कभार स्तनों में हल्का दर्द उठ सकता है। इस संकेत के महसूस होने पर डरने की जरूरत नहीं है।
दूसरी तिमाही में महिला को पाचन से जुड़ी समस्याएं जैसे-गैस, एसिडिटी, अपच और कब्ज आदि से परेशान होना पड़ सकता है। अगर आपको कब्ज की गंभीर दिक्कत होती है, तो एक बार डॉक्टर से जरूर मिलें। कब्ज से छुटकारा पाने के लिए अपनी डाइट में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को जरूर शामिल करें।
दूसरी तिमाही में ग्लूकोज स्क्रीनिंग कराना बहुत जरूरी होता है। इस टेस्ट की मदद से गर्भकालीन डायबिटीज की जांच की जाती है। इस टेस्ट को 24 से 28वें सप्ताह में किया जाता है। इस टेस्ट की मदद से पता चलता है कि शरीर में ग्लूकोज को किस तरह से प्रोसेस कर रहा है। दरअसल, प्रेग्नेंसी में डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इस दौरान समय-समय पर ब्लड शुगर लेवल की जांच भी करवाते रहना चाहिए। इसके अलावा, थायराइड की जांच भी जरूर करानी चाहिए।
प्रेग्नेंसी की हर तिमाही में हीमोग्लोबिन की जांच की जाती है। इससे खून की कमी का पता लगाया जाता है। हीमोग्लोबिन से पता चलता है कि महिला को एनीमिया है या नहीं। अगर हीमोग्लोबिन का स्तर कम होता है, तो इस स्थिति में डॉक्टर आयरन सप्लीमेंट लिख सकते हैं। हीमोग्लोबिन कम होने पर अपनी डाइट में आयरन से भरपूर चुकंदर, अनार, पपीता और नट्स जरूर शामिल करें।

इस टेस्ट को 15 से 22वें सप्ताह में किया जाता है। यह एक ब्लड टेस्ट है, इसकी मदद से डाउन सिंड्रोम और जेनेटिक समस्याओं के जोखिम का आकलन किया जाता है।
अल्ट्रासाउंड लेवल 2 को, एनोमली स्कैन कहा जाता है। इस अल्ट्रासाउंड को 18 से 22वें सप्ताह के बीच किया जाता है। यह टेस्ट शिशु के सिर से पैर तक के सभी अंगों की संरचनात्मक जांच करता है। इस अल्ट्रासाउंड की मदद से पता चलता है कि बच्चे को किसी तरह का जन्मजात दोष तो नहीं है।
दूसरी तिमाही में रेगुलर चेकअप भी करावाया जाता है। इसमें वजन, रक्तचाप और पेशाब में प्रोटीन की जींच की जाती है।
दूसरी तिमाही में शिशु बेहद सक्रिय हो जाता है। शिशु पूरी तरह से हलचल करना शुरू कर देता है। हाथ-पैर हिलाता है और करवटें बदलता है। 20वें सप्ताह के आसपास शिशु अंगड़ाई लेना शुरू कर देता है।
दूसरी तिमाही में शिशु की इंद्रियों का विकास शुरू हो जाता है। 16 से 20वें सप्ताह के बीच में शिशु के सुनने की क्षमता विकसित हो जाती है। वह मां की आवाज पहचानने लगता है। पलकें और भौहें भी विकसित हो जाती हैं।

दूसरी तिमाही में त्वचा और बालों का विकास भी तेजी से होना शुरू हो जाता है। शिशु की त्वचा पर वर्निक्स नामक एक सफेद, सुरक्षात्मक परत और लानुगो नामक महीने बाल आने लगते हैं। इस दौरान शिशु पूरी तरह से विकसित हो रहा होता है।
इस दौरान हड्डियों का विकास होता है और हड्डियां सख्त होने लगती हैं। फेफड़े विकसित होते हैं। शिशु का पाचन-तंत्र काम करना शुरू कर देता है। 20वें सप्ताह तक शिशु के अंग पूरी तरह से बन जाते हैं।

प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही में कुछ सावधानियां जरूर अपनानी चाहिए।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।