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Written By: Editorial Team | Published : October 26, 2017 6:35 PM IST
भारत में प्रेगनेंट महिलाओं को आज भी कई पुरानी परंपराओं को मानने को कहा जाता है। वास्तव में इसे गर्भसंस्कार कहते हैं जिसका मतलब है कि गर्भ में पल रहे बच्चे को शिक्षा देना। ऐसा माना जाता है कि इससे बच्चे का मानसिक और व्यवहारिक विकास गर्भ में ही शुरू हो जाता है। कहा जाता है कि गर्भवती महिला का बच्चे पर अधिक प्रभाव पड़ता है। यानि अगर वो स्ट्रेस लेती है, तो इससे बच्चे पर बुरा असर पड़ता है। वास्तव में मां की जरिये ही बच्चे में पॉजिटिव वाइब्स ट्रांसफर होती हैं।
गर्भावस्था के चौथे महीने से बच्चे की सुनने की क्षमता में सुधार होता है और वो मां की आवाज सुन सकता है और जवाब दे सकता है। यही कारण है कि महिलाओं को कुछ मंत्रों का जाप करने के लिए कहा जाता है। कहते हैं कि इससे मां को सकारात्मक भावनाएं पैदा होती हैं, जो बच्चे में पास होती हैं। इन मंत्रों में इस्तेमाल होने वाले शब्दों में ओम, क्लीं, ह्रीम, श्रीम, नम, सम, हरम शामिल हैं, जिनका भ्रूण पर सुखदायक प्रभाव पड़ता है।
ऐसा तब भी होता है, जब कोई मधुर वाद्य जैसे सितार या संतूर बजाया जाता है जिससे म्यूजिकल वाइब्रेशन निकलती हैं। यह वाइब्रेशन किसी टेप रिकॉर्डर से ज्यादा बेहतर होती हैं और दिमाग को उत्तेजित करती हैं। बच्चे के दिमाग को उत्तेजित करने का एक अन्य तरीका गर्भ के पास घंटी बजाना भी है।
घंटी बजाने का सही तरीका
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अनुवादक – Usman Khan
चित्र स्रोत - Shutterstock
सन्दर्भ- (Inputs are taken from Garbhasanskar in Pregnancy by Dr Vikram Shah and Dr Geetanjali Shah)