Miscarriage Problem: बार-बार गर्भपात होने से बढ़ सकता है टाइप-2 डायबिटीज का खतरा
हाल ही में हुए एक अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि बार-बार जिन महिलाओं को गर्भपात होता है, उन्हें डायबिटीज खासकर टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है।
Miscarriages Side Effects : महिला के लिए मां बनना एक सुखद अहसास होता है। मां बनने से जितनी खुशी मिलती है, शायद ही किसी और चीज से उतनी खुशी मिलती हो। कुछ महिलाएं मां बनने के लिए तरस जाती हैं। बार-बार मिसकैरेज या गर्भपात होना, प्रेग्नेंसी में समस्याएं आने से वो मां बनने का सुख देर से ले पाती हैं या मां बन ही नहीं पाती हैं। कई बार शारीरिक कमजोरी, कम उर्म में गर्भ धारण करना, अविकसित गर्भ, भ्रूण का सही से विकास ना होना जैसी कई वजहों से गर्भपात (Miscarriages Side Effects) हो जाता है।
बार-बार गर्भपात होना भी एक महिला के शरीर के लिए ठीक नहीं है। इससे शारीरिक कमजोरी आती है। शरीर में खून की कमी हो सकती है। मानसिक समस्याएं जैसे स्ट्रेस, चिंता, डिप्रेशन आदि आपको घेर सकती हैं। हाल ही में एक अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि बार-बार जिन महिलाओं में गर्भपात (Miscarriages Side Effects) होता है, उन्हें डायबिटीज होने का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है।
क्या कहता है शोध
यह शोध डेनमार्क की कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी में किया गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि महिलाओं के लिए एक से अधिक बार मिसकैरेज, उनमें डायबिटीज होने की संभावनाओं (Miscarriages and Diabetes) को बढ़ा सकता है। यह शोध डायबेटोलॉजिया जर्नल में प्रकाशित किया गया है। इसमें शोधकर्ताओं ने कहा है कि यदि महिला के पेरेंट्स में से किसी को भी डायबिटीज की समस्या पहले से ही है, तो महिला के भी डायबिटीज से ग्रस्त होने का खतरा दोगुना हो जाता है।
गर्भपात और टाइप-2 डायबिटीज
शोधकर्ताओं ने कहा कि यदि पहली बार किसी महिला का मिसकैरेज होता है, तो उसमें 18 प्रतिशत तक टाइप-2 डायबिटीज का होने का खतरा रहता है। दो बार गर्भपात होता है, तो 38 प्रतिशत और तीन बार होता है, तो फिर लगभग 71 प्रतिशत तक टाइप-2 डायबिटीज के होने की संभावना बढ़ जाती है।
ब्लड शुगर की जांच से चला पता
शोध में उन महिलाओं को शामिल किया गया जिन्हें 2 से 3 बार गर्भपात हो चुका है। इन सभी महिलाओं के ब्लड शुगर लेवल की जांच कई बार की गई। इस शोध पर प्रमुख रूप से काम कर रहे शोधकर्ता के अनुसार, अधिक वजन होने से गर्भपात और टाइप-2 डायबिटीज के बीच संबंध देखा गया है।
24, 700 महिलाओं पर किया गया शोध
इस शोध में डेनमार्क की रहने वाली लगभग 24,700 महिलाओं को शामिल किया गया। इनका जन्म वर्ष 1957 से 1997 के बीच हुआ है। इनमें 1977 से 2017 के बीच टाइप-2 डायबिटीज होने की बात कही गई है। शोध में कुछ ऐसी महिलाओं को भी शामिल किया गया, जिन्हें डायबिटीज की समस्या नहीं थी। इनकी भी जन्मतिथि डायबिटीज से ग्रस्त महिलाओं के समान ही थी। शोध के परिणाम के अनुसार, जिन महिलाओं में जितनी बार गर्भपात हुआ था, उनमें डायबिटीज होने का खतरा उतना ही अधिक पाया गया। यदि आपके परिवार में किसी को भी डायबिटीज है, तो मिसकैरेज होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। बार-बार गर्भपात होने से इम्यून सिस्टम (Immune system) भी प्रभावित होती है, जिससे भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा भी काफी हद तक बढ़ सकता है।
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