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प्रेगनेंसी के बाद कितनी जरूरी है महिला की देखभाल? एक्सपर्ट से जानिए 5 Points में

महिलाओं की जितनी देखभाल की जरूरत प्रेगनेंसी के दौरान होती है उतनी ही डिलीवरी के बाद भी होती है। आइए जानते हैं डिलीवरी के बाद मां की देखभाल कैसे करें।

प्रेगनेंसी के बाद कितनी जरूरी है महिला की देखभाल? एक्सपर्ट से जानिए 5 Points में
Photo: Freepik
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Written by Rashmi Upadhyay |Published : June 3, 2024 12:23 PM IST

प्रेग्नेंसी का सफर बहुत दिलचस्प होता है। पूरे 9 महीन तमाम तरह के उतार-चढ़ाव आने के बावजूद महिलाएं इस जर्नी को बहुत इन्ज्वॉय करती हैं। हालांकि डिलीवरी के बाद कई तरह की चुनौतियां आती हैं जिन्हें अगर सही तरीके से हैंडल किया जाए तो महिलाओं की दिक्कतें काफी कम हो सकती हैं। जितना जरूरी प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं की देखभाल करना है उससे भी ज्यादा जरूरी डिलीवरी के बाद महिलाओं की देखभाल करना है। एक बच्चे के संसार में आने के उत्साह के बीच कई बार खुद मां के स्वास्थ्य की अनदेखी हो जाती है। हम ये समझने में गलती कर देते हैं कि डिलीवरी के बाद अगर मां का स्वास्थ्य सही है, वो खुश है तो बच्चा भी कम्फरटेबल महसूस करता है। डॉक्टर्स कहते हैं कि डिलीवरी के बाद महिलाओं में पोस्टपार्टम डिप्रेशन (Post Partum Depression After Delivery) बहुत कॉमन है इसलिए जरूरी है कि मां के स्वास्थ्य के साथ किसी तरह की अनदेखी न की जाए। आइए सीनियर डॉक्टर से जानते हैं कि ये कैसे संभव है:

1. बच्चे के जन्म के बाद की देखभाल: (Regular Prenatal Care)

बच्चे को जन्म देने से बाद डॉक्टर कई तरह की जांच करते हैं, हॉर्मोनल असंतुलन के कारण महिलाएं परेशान भी हो सकती है। ऐसे में परिजनों का दायित्व बनता है कि वे महिला को समझा-बुझाकर जांच करवाने के लिए प्रोत्साहित करें बल्कि महिला के साथ आप खुद भी डॉक्टर के साथ जाएं। आपके साथ जाने से डॉक्टर की बात सुनने या उनके परामर्श को समझने में मदद मिलेगी। महिला के इस ​कठिन सफर में जब परिवार के लोग भी एक्टिव रहेंगे तो किसी भी समस्या का समाधान तलाशने में मदद मिलेगी। ऐसे में गर्भावस्था का यह सफर महिला को आसान लगने लगेगा।

2. संतुलित डाइट और हाइड्रेशन: (Balanced Diet and Hydration)

महिला का खाना ऐसा होना चाहिए जो पौष्टिक हो। उनके लिए बैलेंस्ड डाइट बनाएं ताकि उन्हें सभी जरूरी पोषण मिलें। फल, सब्जियां, लीन प्रोटीन और साबुत अनाज के साथ उनकी डाइट में ज्यादा से ज्यादा फाइबर शामिल करें। इसके अलावा महिला पूरे दिन हाइड्रेटेड रहें, इसके लिए उनके पानी पीते रहने की पर्याप्त व्यवस्था रखें।

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3. व्यायाम और आराम: (Exercise and Rest)

मां को सक्रिय रहने और असुविधाओं को कम करने में मदद करने के लिए हल्के व्यायाम, जैसे पैदल चलना या योग के लिए प्रोत्साहित करें, अगर संभव हो तो आप भी उनके साथ करें। उसके साथ पार्क में टहलने या फिटनेस क्लासेस में भाग लेने की कोशिश करें। मां को पर्याप्त आराम मिले, इसका ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। महिला के आराम करने के लिए एक शांतिपूर्ण वातावरण बनाएं। जब मां सो रही है तो परिवार जनों को बच्चा अपने पास रखना चाहिए ताकि उनकी नींद में किसी तरह की बाधा न आए।

4. भावनात्मक सहारे में न हो कई कमी: (Emotional Support:)

डिलीवरी के बाद महिलाओं को इमोशरल सपोर्ट की सबसे ज्यादा जरूर होती है। घर में ऐसा माहौल बनाएं कि महिला के आसपास किसी तरह की नेगेटिव बातें न हों। मां की भावनाओं को सुने—समझे और उन्हें आश्वस्त करें कि इस बदलावकारी समय के दौरान विभिन्न प्रकार की भावनाओं का अनुभव करना सामान्य है।

5. हानिकारक पदार्थों से बनाएं दूरी: (Avoid Harmful Substances)

शराब, तंबाकू और अन्य हानिकारक पदार्थों से दूर रहकर एक सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण बनाने में मां की मदद करें। ध्यान, मालिश या जो काम उन्हें पसंद है वो करने में उनकी मदद करें। इससे वो अच्छा महसूस करेंगी।

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डॉ हिमबिंदु वीरला, कंस्लटेंट प्रसूति रोग विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ और लेप्रोस्कोपिक सर्जन, बर्थराइट बाय रेनबो चिल्ड्रेन हॉस्पिटल, बंजारा हिल्स, हैदराबाद