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अनुवादक: Mousumi Dutta
मैंने अपने दोस्तों से सुना है कि डिलीवरी के बाद विज़न प्रॉबल्म होता है। यानि आँखों का पावर बढ़ने की संभावना रहती है। इसलिए मुझे जानना है कि प्रेगनेंसी के दौरान या डिलीवरी के बाद कब आई चेकअप करवाना सही होता है?
डॉ. राहुल मनचंदा, कंसल्टेंट और हेड गायनाकॉलजिस्ट एण्ड एन्डोस्कॉपिक सर्जन, पी.एस.आर.आई हॉस्पिटल इस सवाज का जवाब़ दे रहे हैं।
प्रेगनेंसी के दौरान शरीर के हार्मोन में बहुत सारे बदलाव आते हैं, जिसके प्रभाव विज़न पर भी पड़ सकता है। लेकिन हर किसी के मामले में यह समस्या नहीं हो सकती है। वैसे ज्यादातर महिलाओं को आम तौर पर नजर के कमजोर होने की शिकायत रहती ही है। मेटाबॉलिज्म, हार्मोन, ब्लड सर्कुलेशन, फ्लुइड रिटेनशन में बदलाव के कारण विज़न में चेंज हो सकता है। फ्लूइड के रिटेनशन के कारण कॉर्निया के शेप और थिकनेस में बदलाव आ सकता है।
आपको ये जानकर खुशी होगी ज्यादातर मामलों में विज़न का प्रॉबल्म प्रेगनेंसी के बाद ठीक हो जाता है। अगर आप उसके बाद लेंस लगाते हैं या चश्मा लगाते हैं तो अच्छी तरह से नजर नहीं आता है। पावर में इतना कम बढ़ता या कम होता है कि नए चश्मा लेने की ज़रूरत नहीं पड़ती है। लेकिन कभी भी प्रेगनेंसी के दौरान लेज़र ट्रीटमेंट न करवायें क्योंकि कॉर्निया का शेप इस दौरान या डिलीवरी के बाद बदलता है।
कभी-कभी अस्पष्ट विज़न का प्रॉबल्म जेस्टैशनल डाइबिटीज़ के कारण भी होता है क्योंकि इस समय ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। इसलिए आई चेकअप करवाने से पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूर ले लें। इसलिए आई प्रॉबल्म प्रेगनेंसी के दौरान या डिलीवरी के दौरान होना व्यक्ति के शारीरिक अवस्था पर निर्भर करता है। अगर डिलीवरी के बाद आपको विज़न में बहुत प्रॉब्लम हो रहा है तो ऑपथॉमोलॉजिस्ट के ज़रूर संपर्क करें। उसके बाद ही कोई निर्णय लें।
चित्र स्रोत: Shutterstock