
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Published : June 4, 2026 11:13 AM IST
Medically Verified By: Dr. Madhavi Reddy Vennapusa
Pregnancy
प्रेग्नेंसी का दौर हर एक महिला के लिए बहुत ही खास होता है। इस दौरान महिलाओं को खानपान, एक्सरसाइज और आराम से जुड़ी कई सलाह दी जाती हैं। इनमें सबसे आम सलाह होती है कि प्रेग्नेंसी में बाईं करवट सोना चाहिए। लेकिन क्या यह हर प्रेग्नेंट महिला के लिए जरूरी है? क्या बाईं करवट में सोने से स्वास्थ्य को फायदे होते हैं? क्या बाईं करवट सोने से बच्चे को किसी तरह का फायदा होता है? इन सभी सवालों का जवाब हैदराबाद स्थित यशोदा हॉस्पिटल्स की सीनियर कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिशियन और गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी रेड्डी वेन्नापुसा देने जा रही हैं। आइए डॉक्टर से विस्तार से समझते हैं प्रेग्नेंसी में बाईं करवट सोने से क्या होता है?
डॉ. माधवी का कहना है कि प्रेग्नेंसी के के 20वें सप्ताह के बाद बाईं करवट सोना अधिक फायदेमंद हो सकता है। इस समय तक गर्भाशय का आकार काफी बढ़ जाता है और वह पेट के अंदर मौजूद कुछ महत्वपूर्ण ब्लड वेसेल्स पर दबाव डाल सकता है। बाईं करवट सोने से यह दबाव कम होता है और रक्त संचार बेहतर बना रहता है।
बाईं करवट सोने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे इन्फीरियर वेना कावा नामक बड़ी नस पर दबाव कम पड़ता है। यह नस शरीर के निचले हिस्से से रक्त को वापस हृदय तक पहुंचाने का काम करती है। जब इस नस पर दबाव नहीं पड़ता, तो प्लेसेंटा और गर्भ में पल रहे शिशु तक रक्त और ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर तरीके से हो पाता है। इससे बच्चे के विकास के लिए जरूरी पोषक तत्वों की आपूर्ति भी सुचारु रहती है।
गर्भावस्था के दौरान कई महिलाओं को पैरों, टखनों और पंजों में सूजन की समस्याहोती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बाईं करवट सोने से किडनी की कार्यक्षमता बेहतर बनी रहती है, जिससे शरीर अतिरिक्त तरल पदार्थ और अपशिष्ट को अधिक प्रभावी तरीके से बाहर निकाल पाता है। इससे सूजन की समस्या कुछ हद तक कम हो सकती है।
हर महिला के लिए पूरी रात एक ही करवट में सोना आसान नहीं होता। यदि बाईं करवट सोने में परेशानी महसूस हो, तो शरीर को हल्का-सा तिरछा रखकर भी सोया जा सकता है। आराम बढ़ाने के लिए पेट के नीचे और घुटनों के बीच एक-एक तकिया रखने की सलाह दी जाती है। इससे रीढ़ की हड्डी को बेहतर सपोर्ट मिलता है और शरीर पर दबाव कम पड़ता है।
एक्सपर्ट का कहना है कि लंबे समय तक पीठ के बल सोने से बचना चाहिए। इस स्थिति में बढ़ा हुआ गर्भाशय महत्वपूर्ण रक्त वाहिकाओं पर दबाव डाल सकता है। इसके कारण कुछ महिलाओं को चक्कर आना, सांस लेने में असहजता या रक्त संचार में कमी जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं।
नींद के दौरान करवट बदलना बिल्कुल सामान्य बात है। यदि आप रात में कभी दाईं करवट या पीठ के बल जाग जाती हैं, तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि आपको पर्याप्त और आरामदायक नींद मिले। शरीर अक्सर खुद ही ऐसी स्थिति चुन लेता है, जिसमें उसे सबसे अधिक आराम महसूस होता है।
Disclaimer : अगर आपकी प्रेग्नेंसी नॉर्मल है, तो बाईं करवट सोना एक अच्छा ऑप्शन माना जाता है। हालांकि, यदि आपको हाई ब्लड प्रेशर, जुड़वा गर्भावस्था या कोई अन्य चिकित्सीय समस्या है, तो अपनी स्थिति के अनुसार सलाह लेने के लिए अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श जरूर करें। स्वस्थ गर्भावस्था के लिए पर्याप्त आराम, संतुलित आहार और नियमित डॉक्टर चेकअप भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।