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क्या गर्भवती महिला ग्रीन टी पी सकती है?

क्या प्रेगनेंसी में ग्रीन टी बिल्कुल नहीं पीना चाहिए?

वेट लॉस और इम्यूनिटी के लिए ग्रीन टी को काफी पसंद किया जाता है। लेकिन क्या प्रेगनेसी में ग्रीन टी पीना चाहिए, यह सवाल कई लोगों के दिमाग में आता है। हालांकि प्रेंगनेसी में ग्रीन टी पीना सुरक्षित है या नहीं यह साबित करनेवाली कोई विशेष स्टडी या रिसर्च तो अभी सामने नहीं आयी है,लेकिन अगर इस बात पर ध्यान दिया जाए तो ग्रीन टी में भी कैफीन होता है। जैसा कि यह साबित किया जा चुका है कि बहुत अधिक मात्रा में कैफीन लेने से गर्भवती मां और उसके बच्चे दोनों को नुकसान पहुंच सकता है, इसीलिए ग्रीन टी में कैफीन होना निश्चित ही प्रेगनेंसी में इसे पीने से पहले आपको सोचने पर मज़बूर कर सकती है।

मेटाबॉलिज्म रेट बढ़ जाती है- एक्सपर्ट्स के मुताबिक प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर का मेटाबॉलिज़्म खुद-ब-खुद बढ़ जाता है, ऐसे में ग्रीन टी पीने से शरीर की चयापचय दर यानि मेटाबॉलिज़्म रेट बहुत ज़्यादा बढ़ जाती है। इससे गर्भवती महिला के मानसिक और शारीरिक बदलाव के हिसाब से सही नहीं हैं और इसके चलते कई अन्य समस्याएं भी शुरु हो सकते हैं।

शरीर के फॉलिक एसिड अवशोषण की प्रक्रिया में रूकावट- प्रेगनेंसी में फॉलिक एसिड की गोलियां खाने की सलाह दी जाती है क्योंकि इससे पेट में पल रहे बच्चे को सुरक्षा मिलती है। फॉलिक एसिड की कमी से शिशु के मस्तिष्क और मेरुदण्ड का सही तरह से विकास नहीं हो पाता है।

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आयरन के अवशोषण में में परेशानी- सिर्फ ग्रीन टी ही नहीं, किसी भी प्रकार की हर्बल टी ज़्यादा मात्रा में पीने से रक्त कोशिकाओं के लिए आयरन का अवशोषण मुश्किल हो जाता है। इसके चलते हिमोग्लोबीन का उत्पादन नहीं हो पाता है और गर्भवती महिला को एनिमिया होने का खतरा बढ़ जाता है।

तो क्या प्रेगनेंसी में ग्रीन टी बिल्कुल नहीं पीना चाहिए?

प्रेंगनेंसी में हर दिन 200 मिली ग्रीन टी की मात्रा संतुलित मानी जाती है। मतलब यह है कि अगर आप ग्रीन टी पीना ही चाहती हैं तो दिन में दो कप कॉफी, चाय या आपकी मनपसंद ग्रीन टी लेना सेफ होगा।

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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