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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 6:09 PM IST
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अनुवादक- Shabnam Khan
प्रेगनेंसी के दौरान कैल्शियम बहुत जरूरी होता है। इससे न सिर्फ गर्भस्थ शिशु की हड्डियों का विकास होता है, बल्कि मां भी स्वस्थ रहती है। प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं के जोड़ों में जो दर्द होता है, खाने में कैल्शियम की मात्रा बढ़ाकर उस दर्द को कम किया जा सकता है। कैल्शियम से शरीर के जोड़ लचीले हो जाते हैं, शरीर अपने आपको डिलीवरी के लिए तैयार करता है। कैल्शियम की कमी से दर्द झेलना पड़ सकता है।
इन वजहों से गर्भवती महिलाओं को दूध पीने की सलाह दी जाती है। कई बार उन महिलाओं को भी ज़बरदस्ती दूध पिलाया जाता है जो लैक्टोज़ इनटॉलेरेंट होती हैं। जबकि, ऐसा नहीं होना चाहिए। अगर आपको दूध पसंद नहीं है या सूट नहीं करता तो कोई बात नहीं। आप दूध न पियें। कई और तरीकों से आप कैल्शियम की जरूरत को पूरा कर सकते हैं।
प्रेगनेंसी के दौरान डेयरी प्रॉडक्ट्स बहुत जरूरी होते हैं। कैल्शियम के अलावा भी इसमें कई मैक्रो और माइक्रो न्यूट्रीशन होते हैं जो बेबी और उसकी मां के लिए फायदेमंद होते हैं। अंतर्राष्ट्रीय रूप से प्रमाणित लैक्टेशन और चाइल्ड न्यूट्रीशन काउंसलर सोनाली शिवलानी बताती हैं, ‘होने वाली मां को अपनी डायट से 1200 मिलीग्राम/प्रतिदिन कैल्शियम की जरूरत होती है। जब ऐसा होता है कि गर्भवती महिला डायट से इस जरूरत को पूरा नहीं कर पाती तो डॉक्टर सप्लीमेंट की सलाह देते हैं। हालांकि इतना काफी नहीं है। प्रेगनेंसी के दौरान दिन में तीन बार दूध या डेयरी प्रॉडक्ट और सप्लीमेंट लेना चाहिए।’
अगर गर्भवती महिला प्राइमरी लैक्टोज़ इनटॉलेरेंस से पीड़ित है, तो वो शायद दूध नहीं ले पाएगी। अगर सेकेंडरी इनटॉलेरेंस है तो दही, चीज़ जैसे डेयरी प्रॉडक्ट ले सकती है। दूध के अलावा, सफेद तिल, पालक, हरी मूंग दाल, गुड़, नाचनी आदि से भी कैल्शियम प्राप्त किया जा सकता है।
चित्र स्रोत - Shutterstock