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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 6:10 PM IST
स्तनपान कराने वाली महिलाओं की हमेशा यह शिकायत रहती है कि उनके ब्रेस्ट ढीले और लटक जाते हैं। आपको बता दें कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में बहुत से परिवर्तन होते हैं। जाहिर है स्तनों में भी परिवर्तन होता है। बेशक ब्रेस्टफीडिंग कराने से ब्रेस्ट ढीले हो सकते हैं लेकिन बावजूद इसके आप उन्हें शेप में ला सकती हैं। आपको बता दें कि लूज़ ब्रेस्ट को टाइट करने के कई तरीके हैं। चलिए जानते हैं कैसे-
1) सही खानपान है जरूरी
डिलीवरी के बाद स्तनपान के दौरान बहुत सी महिलाएं वजन घटाने के उद्देश्य से खानेपीने में कमी कर देती हैं। इससे स्किन को विशेषकर स्तनों के आसपास की स्किन को नुकसान हो सकता है। इससे स्तनपान कराने के दौरान खींचाव और दबाव के चलते उनके ब्रेस्ट का आकार और लोच खो सकती है। इसका कारण यह है कि स्तनों की कोशिका झिल्ली संतृप्त वसा (saturated fat )से बनी होती हैं। वास्तव में, संतृप्त वसा के सेवन से उन पर खिंचाव के कारण बनने वाले निशान को रोकने में मदद मिल सकती है। इसलिए इस दौरान संतृप्त वसा से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे अंडे, मीट आदि खूब खाने चाहिए।
2) बच्चे को सही समय पर दूध पिलाना छोड़ें
केवल इसलिए कि आपके ब्रेस्ट ढीले होने लगे हैं, बच्चे को अचानक दूध पिलाना नहीं छोड़ना चाहिए। इसके बजाय जब बच्चा दूध छुड़वाने लायक हो जाए, तभी ऐसा करें। लगभग आठ महीने की उम्र में अधिकतर बच्चे कम ठोस पदार्थ खाना शुरू कर देते हैं। वैसे बच्चे को दो साल तक की उम्र तक दूध पिलाना सही माना गया है।
3) फीडिंग कराते समय ब्रेस्ट पकड़कर रखें
फीडिंग कराते समय कमर को सपोर्ट देकर आराम की मुद्रा में बैठ जाएं। अगर आप बच्चे को लेफ्ट साइड से फीडिंग करा रही हैं, तो उसके सिर को अपने लेफ्ट हैंड में रख लें और राइट हैंड से ब्रेस्ट पकड़ लें। इसी तरह दूसरी तरफ से भी फीडिंग कराएं। इससे ब्रेस्ट के टिश्यू पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा और बच्चा आराम से फीडिंग कर सकेगा।
4) सर्जिकल उपाय
मस्टोपेक्सी (Mastopexy) या ब्रेस्ट लिफ्ट- नोवा स्पेशलिटी हॉस्पिटल में सीनियर कॉस्मेटिक सर्जन डॉक्टर विनोद विज के अनुसार, इस प्रक्रिया में ब्रेस्ट पर कट लगाकर अतिरिक्त फैट टिश्यू को हटाया जाता है। इससे ब्रेस्ट मजबूत लगते हैं और वे शेप में आ जाते है। इससे निप्पल का साइज़ भी कम हो जाता है, जोकि फीडिंग के दौरान बढ़ जाता है।
ब्रेस्ट इम्प्लान्ट्स- कई मामलों में ब्रेस्टफीडिंग के बाद ब्रेस्ट साइज़ में बदलाव हो सकता है, इस कंडीशन को सूडोपटॉसीस (pseudoptosis) कहते हैं। इसमें स्तन फूल जाते हैं और निप्पल नीचे की तरफ झुक जाते हैं। इस मामले में महिलाओं को ब्रेस्ट लिफ्ट से कोई फायदा नहीं होता है इसलिए इम्प्लान्ट्स बहुत जरूरी हो जाता है। आमतौर पर इम्प्लान्ट्स मसल्स के पीछे रखा जाता है और ब्रेस्ट के टिश्यू सुरक्षित रहते हैं। सवाल यह है कि क्या ब्रेस्ट इम्प्लांट के बाद ब्रेस्टफीडिंग मुमकिन है? आपको बता दें कि इस सर्जरी के बाद महिला दूसरी डिलीवरी के बाद भी ब्रेस्टफीडिंग करा सकती है।
5) लिपो फिलिंग (Lypo-filling)- अगर आप ब्रेस्ट में सुधार करने के लिए सर्जिकल प्रक्रिया से बचना चाहती हैं, तो लिपो फिलिंग या इंजेक्शन बेहतर उपाय है। इसमें फैट टिश्यू को ब्रेस्ट में ट्रांसफर किया जाता है जिससे वो बेहतर नजर आते हैं।
सर्जरी कराने से ब्रेस्ट के साथ हो सकता है यह सब
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अनुवादक – Usman Khan
चित्र स्रोत - Shutterstock