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Written By: Editorial Team | Updated : February 13, 2017 12:12 PM IST
वैसे तो ज्यादातर महिलायें नॉर्मल डिलीवरी में लेबर पेन की बात को लेकर बहुत चिंतित रहती हैं लेकिन कभी कभी समय की मांग के अनुसार कुछ अलग भी हो जाता है। क्योंकि लेबर रूम में क्या होगा ये किसी के हाथ में नहीं होता है। लेकिन कुछ ऐसी भी चीजें या बातें हैं जिनकी मदद से आपको सेफ और स्मूद डिलीवरी हो सकती है यहां तक कि भ्रूण का हेल्थ भी सही रहेगा, ब्लड प्रेशर और शरीर की स्थिति भी ठीक रहेगी वो भी बिना किसी चिकित्सकीय मदद के।
तो आप सोच रहे होंगे कि ऐसी क्या चीजें हैं जो लेबर के दौरान दर्द को सहनीय बनाने के साथ नॉर्मल डिलीवरी के प्रक्रिया को आसान बनायेगी-
एक्सरसाइज़ करने की आदत- अगर आपने कभी भी व्यायाम आदि नहीं किया है तो प्रेगनेंसी ऐसा समय है जब आपको बिना कोई बहाने बनाये इसको करना ही पड़ेगा।
कारण- एक्सरसाइज करने से आपको प्रेगनेंसी या लेबर की प्रक्रिया आसान हो जायेगी। कीगल एक्सरसाइज करने से पेल्विक और थाई के मसल्स इतने स्ट्रॉंग हो जाते हैं जिससे आप लेबर के दौरान के स्ट्रेस को सह पायेंगी। इससे लेबर के दौरान थाई के मसल्स नहीं थकते हैं। डॉक्टर का कहना है कि अक्सर थकान के कारण सी-सेक्शन करने की ज़रूरत पड़ जाती है। इसके लिए लोअर बॉडी एक्सरसाइज या स्क्वॉट करें जिससे की बॉडी लेबर के स्ट्रेस को लेने के लिए तैयार रहे। अगर आपको सही तरह से इस तरह के एक्सरसाइज करने की जानकारी नहीं है तो कभी भी बिना एक्सपर्ट के सलाह के या पैरेन्टल क्लासेस के डॉक्टर के सलाह के बिना न करें। जयापाली शेट्टी, हाइप्नोबर्थिंग प्रैक्टिशनर, मुम्बई का कहना है कि बिना किसी जानकारी के एक्सरसाइज करने से बेबी और मदर दोनों को नुकसान पहुँच सकता है।
खुद को रखें स्ट्रेसफ्री- जयापाली का कहना है कि स्ट्रेस को प्रेगनेंसी के दौरान दूर रखना ही बेहतर होता है जो कि सबसे मुश्किल भरा काम होता है। लेकिन बात ये है कि जिसने भी स्ट्रेस को कंट्रोल में करना सीख लिया वो डिलीवरी के दौरान भी इसको काबू में रख पायेगा। शायद आपको पता नहीं कि तनाव के कारण ऑक्सिटोसिन नामक एक हार्मोन का उत्पादन होता है जिसके कारण लेबर के दौरान सिकुड़न होता है जिससे लेबर का समय बढ़ जाता है। साथ ही इसका असर बेबी और शिशु के जन्म लेने की प्रक्रिया पर पड़ता है।
सही ब्रीदिंग टेक्निक्स का करें प्रैक्टिस- सही तरह का ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने से स्ट्रेस का लेवल कम होता है, एनर्जी बढ़ती है, बेबी का ग्रोथ भी अच्छा होता है। जयापाली का कहना है कि पर्याप्त मात्रा में ऑक्सिजन होने से लेबर के प्रक्रिया के दौरान बच्चे के जन्म लेने की प्रक्रिया आसान हो जाती है।
बर्थ हॉरर स्टोरी सुनने से रहे दूर- जयापाली का कहना है कि कई महिलाओं की आदत होती है कि वह प्रेगनेंट महिलाओं को प्रेगनेंसी हॉरर स्टोरी सुनाती है जो लेबर के समय मां के मन पर बुरा असर डालती हैं। इसलिए ऐसी कहानियों को सुनने से बचें।
सही खाना खायें- डायट का प्रभाव सचमुच प्रेगनेंसी, लेबर और बच्चे के जन्म के प्रक्रिया पर पड़ता है। जयापाली का कहना है कि कभी भी ऐसी बातों पर ध्यान न दें कि घी या तेल जैसी चीजें ज्यादा खाने से लेबर के दौरान बच्चा आसानी से निकल जाता है। याद रखें कि डाजेस्टिव ट्रैक का बर्थ कैनल से कोई संबंध नहीं होता है। हमेशा पौष्टिकता से भरपूर खाना खाना चाहिए जिससे कि भ्रूण का ग्रोथ और हेल्थ दोनों सही रहें। यहां तक कि पौष्टिकता से भरपूर खाना खाने से डिलीवरी की प्रक्रिया भी आसान हो जाती है। लेकिन हमेशा अपने वज़न का ख्याल रखें और जांच करवाते रहें।
प्रेगनेंसी और लेबर के बारे में सही जानकारी रखें- जयापाली की सलाह है कि लेबर और डिलीवरी के बारे में हाइप्नोबर्थिंग या पैरेन्टल क्लासेस से सही जानकारी ले ताकि लेबर रूम में जाने से पहले आपका मन इसके लिए पूरी तरह से तैयार हो और गलत चीजों को सुनकर मन अशांत न हो।
आपके साथ देने वाले आपके पास रहें- जयापाली का कहना है कि अक्सर डिलीवरी की प्रक्रिया आसान हो जाती है जब आपका साथ देने वाले आपका मानसिक और शारीरिक रूप से प्रेगनेंसी के पूरे दौर में आपका साथ दिया हो या साथ रहे हों। उनका साथ आपको हौसला देने के साथ तनाव को कम करने में पूरी तरह से मदद करता है।
सही डॉक्टर के संपर्क में रहें- बच्चे के जन्म देने का समय जितना पास आता है मां के मन में बहुत सारे सवाल उठने लगते हैं। इसके बारे में खुलकर डॉक्टर से बात करें कि नैचुरल बर्थ या बिना खतरे के जन्म देने की प्रक्रिया कैसी होती हैं आदि। लेकिन अगर आपको उनके सवालों से संतुष्टि नहीं मिल रही है तो आपको दूसरे डॉक्टर या हॉस्पिटल से बात करने की जरूरत है, क्योंकि वह आपके भावनाओं का सही तरह से कदर नहीं कर पा रही हैं जो बाद में समस्या उत्पन्न कर सकता है।
पेरिनियल मसाज नियमित रूप से करवायें- क्या आपको पता है कि सांतवे महीने से अगर गर्भवती महिला ये पेरिनियम मसाज करवाती हैं तो इससे लेबर, स्ट्रेस, सूजन मसल टेंशन और जोड़ो का दर्द कम होता है। पेरिनियम को मसाज करने से स्कीन स्ट्रेच होता है जिससे बच्चे के जन्म की प्रक्रिया आसान हो जाती है।
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अनुवादक: Mousumi Dutta
चित्र स्रोत: Shutterstock.
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