महिलाओं से जानिए लेबर के दौरान के उनके विचित्र अनुभव

कुछ महिलाओं ने हमसे साझा की प्रसव के दौरान उनके साथ हुई बातें।

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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 6:10 PM IST

अगर आप पहली बार प्रेगनेंट हैं तो आपने लेबर के साधारण लक्षणों के बारे में पढ़ा ही होगा। आपको पता है कि प्रसव से पहले आपका बच्चा जिस सुरक्षा कवच में होता है उसकी झिल्ली टूट जाती है और फ्लो होने लगता है जो वॉटर ब्रेक (water breaks) के नाम से जाना जाता है और संकुचन होने लगते हैं। लेकिन किताबों और वेबसाइट्स पर जो नहीं बताया जाता वह हैं वे तमाम हास्यापद, अजीब, अनोखे और डरावने अनुभव जो लेबर के दौरान होते हैं। यह भी सच है कि लेबर से जुड़ी दो कहानियां एक जैसी नहीं होगीं। यहां महिलाएं बता रही हैं उनके कुछ ऐसे ही अनुभव।

मैं बहुत ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रही थी

‘मैं बहुत अधिक दर्द महसूस कर रही थी और इसीलिए मैंने अपनी ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाना शुरु कर दिया। नर्स भागी-भागी मेरे पास आयी और उसने कहा कि मेरे इस तरह चिल्लाने से वहां मौजूद बाकी माएं डर रही हैं’। यह कहना है जेना का जिनके मुताबिक वह चिल्लाती ही रहीं और इंजेक्शन देने के बाद ही उनका चिल्लाना बंद हुआ।

मेरा वैजाइना नशे में था

‘संकुचन के दौरान कुछ देर तक सांस लेते रहने की कोशिशों के बाद, अंत में मैंने एपीड्यूरल के लिए कहा। उसके बाद मुझे कम दर्द महसूस होने लगा। ऐनिस्थीश़ियोजॉलिस्ट जब मेरे पास आया तो मैंने उससे कहा कि मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मेरा वैजाइना नशे में था। उसने पूरी कोशिश की लेकिन वह अपनी हंसी नहीं रोक सका’, लिंडा ने बताया।

बेवकूफाना ग़लती

‘नर्स मेरे नवजात बच्चे की साफ-सफाई को लेकर बहुत अधिक चिंतित थी जिसने गर्भनाल काटने से पहले ही उसे उठा लिया। मेरा मन किया मैं उस औरत को एक घूंसा मारकर गिरा दूं। भला लेबर रूम में इतनी तकलीफ कोई कैसे उठा सकता है यार’, रिशिका ने बताया।

भयानक दृष्य

'तब तक सब ठीक था लेकिन मेरे डॉक्टर ने मुझे गर्भनाल दिखायी और मुझे उल्टी महसूस होने लगी', ट्रेसी कहती हैं।

भावनात्मक अनुभव

अदिति कहती हैं, ‘जब मेरी बेटी पैदा हुई तो मैंने हॉस्पिटल की एक इंटर्न से कहा कि क्या वह डिलिवरी की पूरी प्रक्रिया को ध्यान से देख सकती है क्या। मुझे ज़्यादातर चीज़ें तो बर्दाश्त थी लेकिन मुझे अंदाज़ा नहीं था कि वह बच्चे के जन्म के समय रोने लगेगी। वह इतना ज़्यादा सिसक और रो रही थी, कि बाकी 'नर्सों को उसे कमरे से बाहर ले जाना पड़ा। सचमुच बच्चे का जन्म एक बहुत ही भावनात्मक अनुभव था’।

बच्चे की स्थिति ही बदल गयी

‘संकुचन के कुछ घंटों बाद मैं जिस तरह से लेटी थी उस तरह मेरा पेट एक पहाड़ और घाटी जैसा दिख रहा था। मेरे बच्चे की स्थिति की जांच की जा रही थी और ऐसा लग रहा था जैसे बच्चा एक तरफ सरक गया था। डॉक्टरों ने मुझे डिलिवरी तक बिस्तर पर ही रहने के लिए कहा था।’,कुछ ऐसा अनुभव रहा स्वप्ना का।

आसान रहा सबकुछ

‘अभी मेरा वैजाइना मुश्किल से 10 सेंटीमीटर ही फैला था, तभी नर्स ने मुझसे पूछा कि क्या मुझे दर्द हो रहा है। लेकिन मैंने कहा नहीं सब ठीक है। मैंने अपने दोस्तों को मैसेज किया और फोन पर अपने भाई से बात भी की। अचानक से मुझे बहुत अधिक दबाव महसूस हुआ मैंने अपना हाथ नीचे किया। मुझे लगा कि मैनें अपने बच्चे का सर छुआ है। मैंने तुरंत नर्स को बुलाया और आसानी से डिलिवरी हो गयी। मैंने तो हॉस्पिटल वालों से भी कहा कि उन्हें मेरी डिलिवरी के लिए कोई मेहनत नहीं करनी पड़ी इसलिए उन्हें मुझे पैसे वापस करने चाहिए।’,प्रभप्रीत ने हंसते हुए कहा।

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अनुवादक -Sadhna Tiwari

चित्र स्रोत- Shutterstock

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