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अनुवादक: Anoop Singh
प्रेगनेंसी का पूरा चक्र लगभग 40 हफ़्तों का होता है, लेकिन कुछ महिलायें समय से पहले ही बच्चे को जन्म दे देतीं हैं। हालांकि इसके पीछे कई कारण होते हैं जिसके बारे में आपके डॉक्टर ही आपको कुछ बता सकते हैं। लेकिन हाल ही में कई जगह देखा गया है कि कई लोग डॉक्टर से जान बूझकर कहते हैं कि उनके बच्चे को समय से पहले (36 हफ्ते पूरे हो जाने के बाद) ही पैदा किया जाए। इसके पीछे कई कारण बताये जाते हैं जैसे किसी ख़ास शुभ दिन पर अपने बच्चे को पैदा करवाना या परिवार के सारे लोगों का उस समय पर उपस्थित होना इत्यादि। हालांकि समय से पहले बच्चे को जन्म दिलाने से कई नुकसान होते हैं। आइये जानते हैं समय से पहले पैदा हुए बच्चों को किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। मुंबई स्थित क्लाउडनाइन हॉस्पिटल की मेडिकल डायरेक्टर डॉ शांतला वैदेयर बतातीं हैं कि भ्रूण में फेफड़ों का विकास 37 वें हफ्ते से 39 वें हफ्ते के बीच में ही होता है इसलिए अगर आप सिर्फ 36 हफ़्तों के बाद ही बच्चे को पैदा करवाते हैं तो वह अविकसित फेफड़ों के साथ पैदा होगा फिर उसे एनआईसीयू में निगरानी में रखना पड़ेगा। पढ़ें : प्री मैच्योर बेबी की घर में कैसे करें देखभाल
40 हफ़्तों या 280 दिनों में गर्भावस्था का चक्र पूरा होता है और उसके पहले पैदा हुए बच्चे को प्रीटर्म बेबी या अविकसित बच्चा कहते हैं। यहाँ हफ़्तों के हिसाब से प्रेगनेंसी टर्म को समझाया गया है।
इसलिये 37 वें हफ्ते से पहले पैदा हुए बच्चों को साँसों से जुड़ी समस्याएं, खुद को गर्म न रख पाने जैसे इत्यादि कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा प्रीटर्म इन्फैन्ट्स में डायबिटीज होने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिये बेहतर यही है कि आप गर्भावस्था का चक्र पूरा होने पर ही बच्चे की डिलीवरी करवायें। डॉ वैदेयर बताते हैं कि कुछ मामले ज़रूर ऐसे होते हैं जिनमे मजबूरी वश बच्चे को पहले ही पैदा कराया जाता है, लेकिन अगर कोई और चिकित्सकीय मजबूरी न हो तो 40 हफ़्तों का चक्र पूरा होने पर ही बच्चे की डिलीवरी करवायें।
चित्र स्रोत : Shutterstock