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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 6:08 PM IST
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अनुवादक: Anoop Singh
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को काफी सावधानियां बरतनी चाहिए। इस दौरान उन्हें शराब और धूम्रपान से दूर रहना चाहिए। जहां तक सौंदर्य प्रसाधन या सफाई के उत्पादों की बात है, इनके बारे में स्पष्ट नहीं कहा जा सकता कि यह पूरी तरह सुरक्षित हैं। अध्ययन में पाया गया है कि कास्मेटिक पदार्थों में पैथालेट्स (phthalates),पैराबेन और लेड पाया जाता है। यह गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। गर्भवती महिलाओं को कुछ रसायनों के प्रति सावधानी बरतनी चाहिए।
सीसा(Lead): लिपस्टिक और आई शैडो जैसे सौंदर्य प्रसाधनों में यह रसायन काफी मात्रा में होता है। सौंदर्य प्रसाधनों में लेड की मात्रा 20 पीपीएम निर्धारित है लेकिन कई ब्रांड बहुतायत मात्रा में इसका प्रयोग करते हैं जिससे लेड प्वाइजनिंग (lead poisoning) का खतरा रहता है। इसके अलावा गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं में यह रसायन प्लेसेंटा और दूध ग्रंथियों से गुजरता है और भ्रूण के विकास को प्रभावित करता है।
आइसोट्रेटिनोइन(Isotretinoin) : आमतौर पर मुहांसे दूर करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसका उपयोग फाउंडेशन क्रीम बनाने में किया जाता है। जर्नल आर्काइव्ज में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में आइसोट्रेटिनोइन से शिशुओं में जन्मजात विकृतियों का खतरा बढ़ जाता है। इस दवा के इस्तेमाल से पहले डॉक्टर का परामर्श लेना चाहिए।
पैथालेट्स(Phthalates) : साबुन और शैंपू जैसे उत्पादों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। गर्भवती महिलाओं में लम्बे समय तक पैथालेट्स के संपर्क में रहने के कारण, गर्भावस्था के 5 और 13 सप्ताह के बीच गर्भपात भी हो सकता है। सिर्फ कारखानों में इसके संपर्क में आने वाली औरतें ही इससे प्रभावित नहीं होती बल्कि आम महिलाओं को भी प्रेगनेंसी के दौरान कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
ट्राईक्लोसन और ट्राईक्लोकार्बन(Triclosan and triclocarban): इनका प्रयोग कीटाणुनाशक उत्पादों में किया जाता है। साबुन, टूथपेस्ट के अलावा रोजाना इस्तेमाल होने वाले कई उत्पादों में भी इनका इस्तेमाल किया जाता है। ट्राईक्लोसन और ट्राईक्लोकार्बन गर्भवती महिलाओं में स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं और यहां तक कि नवजात शिशु के आकार को भी बदल सकते हैं।
अमोनिया : सिंथेटिक हेयर कलर उत्पादों में अमोनिया इस्तेमाल किया जाता है। इन उत्पादों में मौजूद अमोनिया, फेनेडियामाइन्स और रेसोर्सिनोल(phenediammines and resorcinol) आपके शरीर में एलर्जी उत्पन्न करते हैं। इसके अलावा इन रसायनों को कैंसरकारी तत्वों के रूप में भी जाना जाता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को अपने बालों को रंगने के लिए प्राकृतिक रंगों का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। इन पदार्थों की अधिकता या वायु प्रदूषण अपरिपक्व जन्म, जन्म के समय कम वजन, भ्रूण में जन्म दोष पैदा कर सकती है।
हालांकि गुडगाँव स्थित स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ नुपुर गुप्ता बताती है कि, ऐसा कोई ख़ास नियम नहीं है कि गर्भवती महिलाओं को कॉस्मेटिक्स चीजें नहीं इस्तेमाल करनी चाहिये। क्योंकि इससे होने वाले खतरे इस बात पर निर्भर करते हैं कि आप इन केमिकल्स के साथ कितने देर संपर्क में हैं और केमिकल किस तरह का है एवं उसकी क्षमता कितनी ज्यादा या कम है। उदहारण के तौर पर, अगर आप ऐसे शैम्पू का इस्तेमाल करती हैं जिसमें ये खतरनाक रसायन हैं फिर भी यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपके बालों ने इन्हें कितना अवशोषित किया। वैसे भी शैम्पू मुश्किल से 2 से 3 मिनट के लिये ही आपके बालों के संपर्क में आ पाता है। और जहाँ तक हम शोध की बात करें तो भारतीय संदर्भ में कॉस्मेटिक्स चीजों के प्रयोग और उससे होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में अभी सही जानकारी आना बाकी है। और अगर आप इन उत्पादों की थोड़ी सी मात्रा ही इस्तेमाल करती है तो प्रेगनेंसी के दौरान इनसे होने वाले खतरों की संभावना नगण्य हो जाती है।
हालांकि जो महिलायें सैलून या इस रसायनों को बनाने वाली कारखानों में काम करती हैं, और इन रसायनों के संपर्क में बहुत देर तक रहती हैं उनमें गर्भावस्था के दौरान इससे जुड़ी समस्याएं होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे मामलों में कोशिश करे कि आप इन केमिकल्स के संपर्क में ज्यादा देर न रहें और अगर मुश्किलें ज्यादा बढ़ गयी हैं तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।
चित्र स्रोत : Shutterstock