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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 6:10 PM IST
इंफर्टिलिटी या बांझपन आज एक बड़ी समस्या बन गई है लेकिन अक्सर लोग इसकी तरफ ध्यान नहीं देते। अगर आंकड़ों के आधआर पर बात करें तो विश्व स्वास्थ्य संगठन या WHO (World Health Organization) के अनुसार इस समय विश्व के 8-10 प्रतिशत कपल्स बच्चा पैदा कर पाने में असक्षम हैं। यही नहीं, ऐसा भी बताया गया है कि भारत में शादीशुदा जोड़े भी इस समस्या का सामना कर रहे हैं और उनमें से अधिकांश को इसके मेडिकल कारणों के बारे में कोई जानकारी नहीं हैं।
मदर्स लैप आईवीएफ सेंटर की मेडिकल डायरेक्टर और आईवीएफ स्पेशलिस्ट, डॉ.शोभा गुप्ता कहती हैं कि इस समस्या का एक बेहतर तरीका है इन विट्रो-फर्टिलाइजेशन ( In-vitro fertilisation) या आईवीए। हालांकि बहुत-सी महिलाओं को इस तकनीक को अपनाने में डर लगता है क्योंकि वे आश्वस्त नहीं हो पाती कि वे गर्भधारण कर भी पाएंगी या नहीं।
प्रोफेसर एलिआहु लेविटास द्वारा की गयी एक स्टडी जिसे यूरोपियन सोसायटी ऑफ ह्यूमन रिप्डक्शन एंड एम्ब्रीआलजी (European society of Human Reproduction and Embryology) में छापा गया उसके अनुसार हिप्नोसिस की मदद से आईवीएफ को अधिक सफल बनाया जा सका है और इसीलिए आईवीएफ में हिप्नोसिस को इस्तेमाल किया जाने लगा। डॉ. शोभा गुप्ता ने यह भी बताया कि पिछले एक साल में हिप्नोसिस को एक अच्छी रिलैक्सिंग थेरेपी के रुप में जाना जाने लगा है। उनके आईवीएफ सेंटर में 206 महिलाओं पर इस थेरेपी का इस्तेमाल किया गया जिनमें से लगभग 68 प्रतिशत महिलाओं को गर्भधारण करने में आसानी हुई।
हिप्नोसिस क्या है?
आईवीएफ भ्रूण प्रस्थापन की एक प्रक्रिया है जिसमें 10-15 दिन का समय लगता है और यह मेडिकल तरीकों से होनेवाली प्रेगनेंसी को अधिक कारकर और सफल बनाने में मदद करती है। गर्भपात की अधिक संभावना जैसी अफवाहों के सहारे आईवीएफ को कमज़ोर और असफल होने की कई बातें कही जाती हैं। जिसके चलते आईवीएफ द्वारा गर्भधारण करने वाली महिला को काफी तनाव होता है। ऐसी स्थिति में हिप्नोसिस की मदद ली जाती है। हिप्नटिज़्म या सम्मोहन की ही तरह हिप्नोसिस में भी व्यक्ति अपनी वर्तमान स्थिति भूल जाता है और अवचेतन की स्थिति में चला जाता है। आईवीएफ के दौरान हिप्नोसिस करने से इम्प्लैन्टेशन के दौरान महिला को होनेवाली चिंता और तकलीफ कम की जा सकती है। यह आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान दिमाग को शरीर का साथ देने के लिए तैयार करता है। साथ ही आईवीएफ प्राकृतिक रुप से गर्भधारण में सहायता करता है।
हिप्नोसिस यूटरस को आराम देकर भ्रूण के प्रत्यर्पण को आसान बनाता है। जो हार्मोनल यूटरीन और इम्यून सिस्टम में बदलाव कर ब्लास्टोसिस्ट (बीजग्रह) और एन्डोमीट्रीअम (गर्भकला) के बीच के तालमेल को बेहतर बनाता है।
क्या यह सचमुच कारगर है?
डॉ. शोभा ने बताया शिल्पा जिंदल के बारे में (निवेदन पर नाम बदला गया)। जिन्होंने आईवीएफ के दौरान हिप्नोथेरेपी करायी। 31 वर्ष की महिला शिल्पा को 2013 में पता चला कि वे मां नहीं बन सकतीं। 2014 में उन्होंने मदर्स लैप आईवीएफ सेंटर में आईवीएफ कराया। गर्भधारण के दौरान होनेवाले तनाव के कम करने के लिए डॉक्टरों ने शिल्पा को प्रणायाम और ध्यान करने की सलाह दी।
साथ ही हिप्नोसिस थेरेपी के इस्तेमाल से शिल्पा को अवचेतन में ले जाया गया ताकि उन्हें लगे कि उनका बच्चा उनके पास ही है। यह तकनीक शिल्पा के लिए कारगर साबित हुई और उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया। इस तकनीक का मकसद यही है कि मन में आनेवाले बुरे या नकारात्मक विचारों को रोका जाए और गर्भधारण के समय महिला को महसूस होनेवाले भावनात्मक दबाव को कम किया जाए ताकि यह पूरी प्रक्रिया आराम से पूरी की जा सके।
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अनुवादक -Sadhna Tiwari
चित्र स्रोत: Shutterstock