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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 6:09 PM IST
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अनुवादक – Shabnam Khan
प्रेगनेंसी के दौरान जब महिलाओं को हाथ और पैर की सूजन का सामना करना पड़ता है, तो वो सोचती हैं कि उन्हें लिक्विड लेना कम कर देना चाहिए। ऐसा इसलिए, क्योंकि ये सूजन हाथ पैर में पानी के ठहर जाने से होती है। जब सेल से पानी लीक होकर हाथ पैर तक पहुंच जाता है तो इसे एडीमा कहते हैं। हाथ और पैर में सूजन के अलावा, कई बार चेहरा भी सूज जाता है। इसलिए महिलाएं सोचती हैं कि वो पानी कम पियें, ताकि सूजन न हो। जबकि ये बात सही नहीं है।
लोकमान्य तिलक मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर और सिओन हॉस्पिटल मुंबई के गायनाकॉलोजिस्ट वाय एस नंदनवार के अनुसार, ‘हमारे शरीर के लगभग 80% हिस्से में पानी है, जो शरीर की सामान्य गतिविधियों के लिए ज़रूरी है। कम या ज्यादा पानी पीने से खून के बहाव में असर पड़ सकता है। जिससे एडिमा होने का जोखिम बढ़ेगा। इसके अलावा, प्रेगनेंसी के दौरान प्रोजेस्टेरॉन (progesterone) हार्मोन रिलीज़ होता है, उसकी वजह से भी शरीर के कुछ हिस्सों में पानी जमा होता है और एडीमा की स्थिति आ जाती है। इससे साफ मालूम चलता है कि पानी कम पीने से स्थिति ठीक होने की जगह और ख़राब होगी।’
हालांकि शरीर में पानी जमा होने का सिर्फ यही कारण नहीं है। प्रोटीन की कमी, एनीमिया, दिल की बीमारी आदि के कारण भी ये स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए जब भी प्रेगनेंसी के दौरान आपके हाथ या पैर में सूजन आए तो अपने आप उसका इलाज न करें, बल्कि गायनाकॉलोजिस्ट को दिखाएं।
जहां तक पानी का सवाल है, डॉक्टर नंदनवार कहते हैं कि हर गर्भवती महिला को दिन में 10-12 ग्लास पानी पीना चाहिए। इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि कम पानी पीने से एडीमा ठीक नहीं होगा।
चित्र स्रोत - Shutterstock