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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 6:10 PM IST
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अनुवादक – Shabnam Khan
प्रेगनेंसी के शुरुआती महीनों में जब पेट ज्यादा नहीं बड़ा होता, तब पीठ के बल सोना ठीक है। लेकिन जब आप प्रेगनेंसी के बीच या आखिर के महीनों में होती हैं तो इस तरह से सोना मुमकिन नहीं होता, क्योंकि इस वक्त पेट बढ़ता है। इसके पीछे जो कारण है उसे समझना बहुत आसान है। जब आप पीठ के बल सीधा लेटते हैं तो आपका गर्भाशय दूसरे अंगों पर दबाव डालता है।ज्यादातर मामलों में गर्भाशय का दबाव नर्व्स (vena cava) पर पड़ता है जो शरीर के निचले भाग से ऊपर की तरफ ब्लड वापस लाता है।
इसके अलावा, ज्यादा वक्त तक सीधा लेटने से दिल और फेफड़ों जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर दबाव पड़ता है। इससे शिशु को पोषक तत्व और ऑक्सीजन कम मिल पाती है। इससे रीढ़ की हड्डी, आंतों और ज्यादातर ब्लड वेसल पर भी दबाव पड़ता है। इससे लोअर बैक पेन या हिप्स में पेन भी हो सकता है। रातभर पीठ के बल लेटने के बाद जब आप सुबह उठती हैं तो आपको चक्कर भी आ सकते हैं।
इसीलिए प्रेगनेंसी में सोने के दौरान पोज़िशन बदलने की सलाह दी जाती है। इससे आपको आराम मिलता है और शिशु सुरक्षित रहता है। बल्कि इस अवस्था में करवट लेकर सोने की सलाह सबसे ज्यादा दी जाती है। बायीं करवट पर लेटने से शिशु को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है और ब्लड सप्लाई होता है।कुछ दिनों में ही ज्यादातर महिलाओं को समझ आ जाता है कि उन्हें इस तरह से सोने में ज्यादा आराम मिलेगा। अगर फिर भी आपको आराम न मिल रहा हो तो दोनों पैरों के बीच तकिया दबा लें।
अगर आपको पीठ के बल लेटने का मन कर रहा है तो ऊंचा तकिया या दो तकिये सिर के नीचे रखें। लेकिन इस तरह से थोड़ी देर के लिए ही आराम करें। थोड़ी देर बाद करवट पर लेट जाएं। याद रखें, प्रेगनेंसी में आरामदायक नींद बहुत जरूरी होती है, इसलिए इस पोज़िशन को अपनाएं और आराम से सोएं।
चित्र स्रोत - Shutterstock
संदर्भ
Sabino, J., & Grauer, J. N. (2008). Pregnancy and low back pain. Current reviews in musculoskeletal medicine, 1(2), 137-141.