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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 6:09 PM IST
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अनुवादक – Usman Khan
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को कई स्वास्थ्य जटिलताओं का खतरा रहता है। दरअसल ये अवस्था महिला और होने वाले बच्चे दोनों के लिए बेहद नाजुक होती है। अधिकतर लोगों को बच्चा होने का दौर याद रहता है लेकिन इस बात को कोई ध्यान नहीं रखता है कि उससे पहले या बाद में मां की हालत कैसी है। दरअसल गर्भावस्था के दौरान बहुत सी महिलाओं को प्रसवोत्तर अवसाद (postpartum depression) का सामना करना पड़ सकता है। दुर्भाग्य से इस समस्या के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। खैर, गर्भावस्था के दौरान मुझे भी इस परेशानी का सामना करना पड़ा था। प्रसवोत्तर अवसाद से जुड़े कुछ तथ्य मैं आपसे साझा रही हूं, जिन्हें जानना आपके लिए बहुत ज़रूरी है। पढ़ें- गर्भावस्था में इन 8 सब्जियों को खाने से मां और शिशु रहेंगे स्वस्थ
1) नई माताओं को प्रसवोत्तर अवसाद से पीड़ित होने का एहसास नहीं होता
एक नई मां के लिए प्रसवोत्तर अवसाद से पीड़ित होना एक भ्रामक स्थिति होती है। वो मां बनने की खुशी का आनंद नहीं ले पाती है। इस स्थिति में वो अपनी फीलिंग्स को बयां नहीं कर पाती है। इसके कुछ लक्षण ये हैं- उदासीनता, खालीपन, सो नहीं पाना, स्वयं या बच्चे को नुकसान होने डर लगा रहना आदि।
2) मदद चाहती है लेकिन लेकिन किसी से कह कह नहीं पाती
कई बार जब आप इस समस्या के लक्षणों के बारे में डॉक्टर से बात करती हैं, तो वो आपको आराम की सलाह देते हैं। लेकिन कोई भी व्यक्ति आपको थेरेपिस्ट या साइकोलोजिस्ट से मिलने की सलाह नहीं देता है। यही कारण है कि आपको अगर इस संबंध में कुछ पता भी होता है लेकिन उसके बारे में किसे बताएं, ये समझ नहीं पाती हैं।
3) उपचार नहीं करने पर सालभर हो सकती है परेशानी
ये सत्य है। कई लोग ये समझते हैं कि प्रसवोत्तर अवसाद अपने आप खत्म हो जाता है लेकिन ये सच नहीं है। कई महिलाओं को ये समस्या कई सालों तक रहती है। इससे उसका सामाजिक जीवन और आपसी रिश्ते प्रभावित हो सकते हैं। पढ़ें- गर्भावस्था में किसी भी कीमत पर अपने खाने में शामिल करें ये 7 चीजें
4) मां-बच्चे के संबंध हो सकते हैं प्रभावित
इससे मां-बच्चे के बीच के संबंध प्रभावित हो सकते हैं। दरअसल इस समस्या से जूझ रही मां अपने बच्चे की सही से देखभाल नहीं कर पाती है, जिस वजह से उन दोनों के बीच बोन्डिंग नहीं बन पाती है।
5) मूड बदलना भी प्रसवोत्तर अवसाद का हिस्सा
प्रसवोत्तर अवसाद के दौरान मूड बदलना एक सामान्य लक्षण है। दरअसल इस दौरान आपको उदासी और अत्यधिक चिंता रहती है। इतना ही नहीं आप स्वयं, परिवार और बच्चे की देखभाल करने में असमर्थ होती हैं। वास्तव में मूड बदलना अवसाद चरण का एक हिस्सा है।
6) इसका इलाज है संभव
इससे जुड़ा एक साकारात्मक पहलु ये है कि इस समस्या का इलाज हो सकता है। आमतौर पर थेरेपी और कुछ मामलों में दवाओं के साथ इलाज संभव है। लेकिन थेरेपी और दवाओं को चिकित्सक की सलाह पर लेना चाहिए।
7) ये केवल हार्मोनल परिवर्तन से नहीं जुड़ा
पीपीडी केवल हार्मोनल परिवर्तन या एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन के असंतुलन से नहीं जुड़ा है। इन दोनों हार्मोन में गिरावट से ब्रेन में रासायनिक परिवर्तन की गति बढ़ती है, जिससे मूड बदलना, चिंता होना और अन्य लक्षण हो सकते हैं।
चित्र स्रोत - Shutterstock