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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 6:09 PM IST
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अनुवादक: Anoop Singh
प्रेगनेंसी के दौरान या डिलीवरी के बाद भारतीय महिलाओं में यह देखा गया है कि वे खानपान पर विशेष ध्यान देती है क्योंकि ऐसा माना जाता है की बच्चे का स्वास्थ्य काफी हद तक माँ के खान पान पर ही निर्भर है। ऐसा देखा गया है कि डिलीवरी के बाद महिलायें अपने दूध की क्वालिटी अच्छी करने के लिए ख़ास हेल्दी डाइट का पालन करने लगती हैं। क्या सच में माँ के खाने का प्रभाव बच्चे पर पड़ता है? क्या इस दौरान माँ को ठंडी चीजें खानी चाहिये? ऐसे कई अनगिनत सवाल हैं जो हर माँ के मन में दुविधा पैदा करते हैं। हमने इस बारे में फोर्टिस मम्मा मिया की बिज़नस मैनेजर और आईबीसीएलसी की लैक्टेशन कंसलटेंट डॉ. गीतिका गंगवानी से विस्तार से बात की।
क्या माँ का खान पान उसके दूध की गुणवत्ता पर असर डालता है?
माँ का दूध बच्चे के लिये सर्वोत्तम आहार होता है। कई लोग ऐसा सोचते हैं कि माँ के खानपान का उसके दूध की गुणवत्ता पर असर पड़ता है। डॉ. गीतिका के अनुसार, माँ की डाइट से ब्रेस्ट मिल्क की गुणवत्ता पर कोई ख़ास असर नहीं पड़ता है क्योंकि जहाँ एक तरफ कुछ महिलायें सामान्य खाना ही खाती हैं वहीँ कुछ महिलायें मंहगे और पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को खाती हैं लेकिन उन दोनों के दूध की गुणवत्ता में ज्यादा अंतर नहीं होता है। पढ़ें: ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं की ब्रेस्ट में दर्द होने पर ये उपाय अपनाएं
क्या बच्चे को दूध पिलाते समय माँ को स्पेशल डायट लेनी चाहिए?
अगर आपके पास सिर्फ एक बेबी है तो आपको अतिरिक्त 500 कैलोरी की ज़रूरत पड़ती है वहीँ अगर जुडवा बच्चे हों तो 700-800 कैलोरी की एक्स्ट्रा ज़रूरत पड़ती है। उदाहरण के तौर पर अगर प्रेगनेंसी के दौरान माँ की डायट 2000-2400 कैलोरी थी तो अब दूध पिलाने के समय उनकी डायट 2500-2900 कैलोरी होनी चाहिये। इसके अलावा ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें प्रिजरवेटिव और मीठे के विकल्पों का इस्तेमाल किया गया हो उनका सीमित मात्रा में ही सेवन करें।
क्या माँ जो भी खाती है वो दूध के माध्यम से बच्चे को मिल जाता है?
माँ जो भी खाती है वो कार्बोहाइड्रेट, फैट, प्रोटीन और विटामिन में परिवर्तित हो जाता है बाद में ये पोषक तत्व खून के माध्यम से ब्रेस्ट तक पहुँच जाते हैं और दूध में मिल जाते हैं। इसका मतलब यह है कि जैसे अगर माँ ने पालक खाया है तो उसके दूध में आयरन और अन्य पोषक तत्व मौजूद होंगे। इसलिए अगर आप इस दौरान संतुलित आहार लेती हैं तो यह आपके बच्चे के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा। हालांकि अगर माँ ने संतुलित आहार नहीं लिए हैं या उनकी डायट में पोषक तत्वों की कमी है तो ब्रेस्ट मिल्क अपने आप ही माँ के शरीर से पोषक तत्वों को निकालने लगता है। ऐसे मामलों में बच्चे को तो सारे पोषक तत्व दूध के माध्यम से मिल जाते हैं लेकिन माँ की तबियत बिगड़ सकती है।
लैक्टेशन के दौरान ठंडे पेय पदार्थ पीना सही या गलत ?
डॉ. गीतिका बताती हैं कि ब्रेस्टफीडिंग के दौरान ठंडे पेय पीना माँ या बच्चे के शरीर पर कोई प्रभाव नहीं डालता है। जैसे ही आप कुछ ठंडा पेय पीती हैं तो यह पेट में पहुंचकर शरीर के तापमान के हिसाब से परिवर्तित हो जाता है और खून द्वारा अवशोषित हो जाता है। इसलिये पेय के तापमान से आपके शिशु पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
क्या ब्रेस्टफीडिंग के दौरान मसालेदार चीजें खाना गलत है?
भारत में महिलाओं को यह सलाह दी जाती है की डिलीवरी के अगले 40 दिनों तक मसालेदार चीजें न खाएं क्योंकि डिलीवरी के बाद महिलाओं में कब्ज़ जैसी समस्याओं के होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए अपने पाचन तंत्र को सही रखने के लिए आप डिलीवरी के बाद मसालेदार चीजों से परहेज करें। यह आपके और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिये बहुत ज़रूरी है।
चित्र स्रोत: Shutterstock