जन्म के बाद बच्चे को पहले मां का दूध पिलाया जाए या शहद?

क्या शहद और सौंफ का पानी जैसे पदार्थ बच्चे को दूध पिलाने से पहले चटाना ठीक है?

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Written By: Editorial Team | Updated : February 24, 2017 3:17 PM IST

पहली बार मां बन रही महिलाएं समझ नहीं पाती कि प्रीलैक्टिअल(prelacteal) चीजें और मां के दूध को एक साथ बच्चे को पिलाना चाहिए या न? विशेषकर इन बातों के लिए वह घर की बड़ी-बूढ़ी महिलाओं की बातें सुनती हैं। लेक्टेशन कंसल्टेंट, एजुकेशन मैनेजर, मेडेला इंडिया की विक्टोरिया कुमार सोरेन डाल रही हैं रोशनी कुछ ऐसी ही बातों पर जिनपर हम आंख मूंदकर विश्वास करते हैं। जानिये कैसे बनता है बच्चा मां के दूध से स्वस्थ और बुद्धिमान?

मिथक 1- शहद, सौंफ का पानी जैसी चीजें मां का दूध से पहले बच्चों को देना अच्छा होता है।

जन्म के बाद बच्चे को शहद और सौंफ का पानी चटाया जाता है। लेकिन यह सही नहीं हैं क्योंकि इससे कीटाणुओं का खतरा पैदा होता। आज हमारे परिसर में हर तरफ और हरेक वस्तु मे बैक्टेरिया, वायरस और फंफूद(फंगस) मौजूद हैं। इसीलिए इन चीजों को खिलाने से बच्चे को इंफेक्शन हो सकता है। इसकी बजाय नवजात शिशु को मां का दूध पिलाया जाए।

मिथक 2- पहला दूध या कोलेस्ट्रॉम ( Colostrum) खराब दूध होता है इसलिए उसे नहीं पिलाना चाहिए।

पहला दूध या कोलेस्ट्रॉम बच्चे के जन्म के बाद के दो-तीन दिनों में बनता है। जो कई प्रकार के पोषक और रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले तत्वों से भरपूर होता है। आंत के विकास के लिए 415प्रकार के प्रोटीन और 134 प्रकार के प्रोबायोटिक्स की ज़रूरत पड़ती है जो इस दूध से मिलते हैं। मां का पहला दूध पेट के अंदर एक सुरक्षा कवच बनाकर खतरनाक तत्वों को बच्चे के शरीर में प्रवेश करने के बाद खून में मिलने से रोकता है इसीलिए बच्चे को सबसे पहले मां का पहला दूध पिलाना चाहिए।  अपने premature बच्चे को ऐसे करें breastfeed।

मिथक 3- मां को जितना दूध बनता है वह बच्चे के लिए कम है।

बच्चा जब भी ता है तो उसकी मां यही सोचती है कि शायद बच्चे को भूख लगी होगी। लेकिन हर बार स्थिति ऐसी नहीं होती। हो सकता है बच्चे किसी तकलीफ में हो, जैसे उसे पेशाब औऱ शौच करने में परेशानी हो रही हो या उसके पेट में दर्द हो रहा हो। बच्चे के रोने का मतलब हर बार भूख ही नहीं होती। ध्यान में रखिए कि एक छोटे बच्चे को केवल 5 – 7 मिली दूध की ज़रूरत पड़ती है और इससे यह बात साबित हो जाती है कि मां की छाती में जितना दूध बनता है वह बच्चे के लिए पर्याप्त है।

मिथक 4- ब्रेस्टफीडिंग से मां मोटी हो जाती है और स्तनों का आकार बेडौल हो जाता है।

क्या आप जानते हैं कि ब्रेस्टफीड कराने से एक महिला 500 कैलोरी अधिक बर्न कर सकती है। जहां तक बात स्तनों के बेडौल होने की है तो आपको बता दें कि प्रेगनेंसी के दौरान हार्मोन्स के साथ-साथ ब्रेस्ट की बनावट में कई प्रकार के बदलाव आते हैं। मांसपेशियों, फैट और टिश्यू से बने ब्रेस्ट्स को अपने आकार में वापस आने में थोड़ा समय लगता है इसलिए अपने स्तनों को पहले जैसा बनने के लिए उन्हें थोड़ा समय दें। क्या आपको भी ब्रेस्टफीडिंग के दौरान निप्पल में दर्द होता है

मिथक 5- छोटे ब्रेस्ट में कम दूध बनता है।

यह भी एक मशहूर मिथक है कि बड़े आकार के ब्रेस्ट्स में ढ़ेर सारा दूध बनता है और छोटे स्तनों में कम। लेकिन सच्चाई इसके उलट है। दूध बनने और पिलाने के लिहाज से ब्रेस्ट के आकार की कोई भूमिका नहीं है। दिमाग से निकलने वाले हार्मोन्स दूध के उत्पादन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हैं। ब्रेस्ट में दूध जमा नहीं होता। जब बच्चा ब्रेस्ट से दूध खींचता है तो दिमाग दूध बनाने के लिए हार्मोन्स को निर्देश देता है।

मिथक 6- अगर स्तन भारी हैं तो इसका अर्थ यही है कि बच्चा भूखा रह गया।

बहुत-सी मांओं को लगता है दूध पिलाने के बाद भी उनके ब्रेस्ट भरे हुए हैं क्योंकि उनके बच्चे का पेट अच्छी तरह नहीं भरा होगा। तो कईयों को लगता है कि दूध का बहाव अच्छे से नहीं हो रहा। लेकिन यह सच नहीं है। दूध पीते समय बच्चा केवल 67% दूध ही पीता है। बच्चा उतना ही दूध पीता है जितने से उसका पेट भर जाए। इसलिए चिंता करने की कोई बात नहीं।

मिथक 7- स्तनपान के समय कुछ विशेष फलों और सब्ज़ियों से परहेज करना चाहिए।

ब्रेस्टफीडिंग कराते समय आप सबकुछ खा सकती हैं। यह भविष्य में बच्चे के लिए फायदेमंद ही होगा। बहुत –सी माताएं शिकायत करती हैं कि उनका बच्चा कोई एक विशेष फल या सब्ज़ी नहीं खाना चाहता। लेकिन शायद आप नहीं जानती कि स्तनपान के दौरान बच्चे के विभिन्न चीजों का स्वाद चखने और गंध महसूस करने का मौका मिलता है। जैसे अगर मां सेब खाती है तो बच्चे को मां के दूध से सेब का स्वाद और गंध पता चलती है। हालांकि अगर मां खाने-पीने में नखरे करती है तो बच्चे का व्यवहार भी वैसा ही हो जाता है। यही नहीं अगर मां सबकुछ खाती है लेकिन बच्चे को दूध नहीं पिला रही तो ज़ाहिर है बच्चे को उन तमाम चीजों का स्वाद पता नहीं चल पाएगा। ऐसे में हो सकता है कि आपके में बच्चे में असामान्य तरीके से खाने-पीने की आदतें पैदा हो जाएंगी।

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अनुवादक -Sadhna Tiwari

चित्र स्रोत- Shutterstock

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