
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Published : May 19, 2026 8:03 AM IST
Medically Verified By: Dr. Rajesh Pathak
Anxiety in Pregnancy
प्रेग्नेंसी सिर्फ शरीर में होने वाला बदलाव नहीं होती, बल्कि यह मानसिक और भावनात्मक बदलावों का भी समय होती है। कई महिलाओं में इस दौरान चिंता, डर और एंग्जायटी महसूस की जाती है। कभी डिलीवरी को लेकर डर बना रहता है, तो कभी बच्चे की हेल्थ को लेकर मन परेशान रहता है। ऐसे में एक सवाल अक्सर पूछा जाता है कि क्या प्रेग्नेंसी में होने वाली एंग्जायटी का असर बच्चे के ब्रेन पर भी पड़ता है?
जयपुर स्थित नारायणा हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक एंड नियोनेटल सीनियर कंसल्टेंट डॉ. राजेश पाठक का कहना है कि हल्की चिंता सामान्य मानी जाती है, लेकिन लंबे समय तक बनी रहने वाली गंभीर एंग्जायटी मां और बच्चे दोनों की सेहत को प्रभावित करती है। अगर समय रहते इसे समझा और संभाला नहीं जाता, तो इसका असर बच्चे के मानसिक विकास पर भी देखा जाता है।
प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं। इसी वजह से मूड में उतार-चढ़ाव महसूस किया जाता है। इसके अलावा कई दूसरी बातें भी चिंता बढ़ाने का कारण बनती हैं, जैसे-
इन कारणों की वजह से महिला का दिमाग लगातार तनाव की स्थिति में बना रहता है।
जब मां लंबे समय तक तनाव या एंग्जायटी में रहती है, तब शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल ज्यादा बनने लगता है। यह हार्मोन प्लेसेंटा के जरिए बच्चे तक पहुंचता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर कॉर्टिसोल का स्तर लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो बच्चे के ब्रेन डेवलपमेंट पर असर देखा जाता है। कुछ रिसर्च में यह पाया जाता है कि ज्यादा तनाव की स्थिति में पैदा होने वाले बच्चों में आगे चलकर कुछ परेशानियां हो सकती हैं, जैसे-
बच्चों में इस तरह की परेशानी हो सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं होता कि हर तनावग्रस्त मां का बच्चा प्रभावित ही होगा। यहां एंग्जायटी की गंभीरता और उसकी अवधि बहुत मायने रखती है।
हर चिंता नुकसानदायक नहीं होती। हल्का तनाव सामान्य माना जाता है। लेकिन अगर महिला में ये लक्षण लगातार बने रहते हैं, तो इसे गंभीर एंग्जायटी माना जाता है:
अगर ये लक्षण दो हफ्तों से ज्यादा बने रहते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी माना जाता है।
डॉक्टर कहते हैं कि गर्भ में बच्चा सिर्फ शारीरिक रूप से ही नहीं बढ़ता, बल्कि वह आसपास के माहौल और मां की भावनाओं से भी प्रभावित होता है। अगर मां लगातार तनाव में रहती है, तो उसका असर बच्चे के नर्वस सिस्टम पर भी देखा जाता है। कुछ बच्चों में जन्म के बाद ज्यादा चौंकना, बेचैनी या मूड संबंधी बदलाव महसूस किए जाते हैं। हालांकि सही देखभाल और पॉजिटिव माहौल से इन प्रभावों को काफी हद तक कम किया जाता है।
प्रेग्नेंसी के दौरान मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना बहुत जरूरी माना जाता है। इसके लिए कुछ आसान उपाय मददगार साबित होते हैं-
पर्याप्त नींद लें- नींद पूरी होने से दिमाग शांत रहता है और तनाव कम महसूस किया जाता है।
नियमित हल्की एक्सरसाइज करें- वॉक, प्रेग्नेंसी योग और ब्रीदिंग एक्सरसाइज से मूड बेहतर बनाया जाता है।
मन की बात शेयर करें- परिवार, पार्टनर या करीबी दोस्त से बात करने पर मानसिक दबाव कम महसूस होता है।
इंटरनेट की गलत जानकारी से बचें- हर जानकारी सही नहीं होती। इसलिए सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर भरोसा करना जरूरी माना जाता है।
हेल्दी डाइट लें- संतुलित भोजन से शरीर और दिमाग दोनों को बेहतर सपोर्ट मिलता है।
जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग लें- अगर एंग्जायटी ज्यादा बढ़ती है, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लेना फायदेमंद माना जाता है।
अगर महिला को लगातार घबराहट, पैनिक अटैक, सांस लेने में परेशानी, बहुत ज्यादा उदासी या खुद को नुकसान पहुंचाने जैसे विचार आने लगते हैं, तो तुरंत मेडिकल मदद लेना जरूरी माना जाता है।
Disclaimer : प्रेग्नेंसी में हल्की चिंता सामान्य मानी जाती है, लेकिन लंबे समय तक बनी रहने वाली गंभीर एंग्जायटी मां और बच्चे दोनों की सेहत को प्रभावित करती है। इसका असर बच्चे के ब्रेन डेवलपमेंट और व्यवहार पर भी देखा जाता है। अच्छी बात यह मानी जाती है कि सही समय पर पहचान, परिवार का सहयोग और डॉक्टर की सलाह से एंग्जायटी को काफी हद तक कंट्रोल किया जाता है। ऐसे समय में मां का मानसिक रूप से स्वस्थ रहना बच्चे के बेहतर विकास के लिए बहुत जरूरी माना जाता है।