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अनुवादक :Mousumi Dutta
क्या आप प्रेगनेंट होने की इच्छा रखते हैं और उसके लिए नेट पर सर्च करके और किताबें पढ़-पढ़ कर तरह-तरह के आइडिया अपना-अपनाकर थक गए हैं? तो क्यों नहीं पुराना तरीका ही अपनाकर देख रहे हैं। शतावरी एक ऐसा हर्ब है जो सदियों से इस मामले में पूरी तरह से मदद करता है। आयुर्वेद के अनुसार शतावरी का सेवन करने से पुरूष और महिला दोनों की फर्टिलिटी क्षमता बढ़ने के साथ-साथ काम करने की उत्तेजना भी बढ़ती है। बस फिर क्या प्रेगनेंट होने की संभावना भी साथ ही बढ़ जाती है।
चलिये जानते हैं कि कैसे शतावरी महिलाओं में फर्टिलिटी की संभावना को बढ़ाता है
• हार्मोनल असंतुलन को संतुलित करती है- अक्सर महिलायें प्रजनन क्षमता के उम्र में पॉलिसिस्टिक ओवरियन सिन्ड्रॉम के अवस्था कर गुजरती है जिनके कारण वे हार्मोनल असंतुलन का प्रॉबल्म हो जाता है। शतावरी का सेवन करने से इसके लक्षण कम होते हैं, हार्मोनल संतुलित होते हैं और फर्टिलिटी की संभावना बढ़ती है।
• स्ट्रेस को कम करती है- क्या आपको पता है कि स्ट्रेस ज्यादा होने पर भी प्रेगनेंट होने में प्रॉबल्म होता है। स्ट्रेस के कारण ओेव्यलैशन में प्रॉबल्म, सूजन, प्रजनन प्रणाली के टिशु को क्षति पहुँचती है, फेलोपीन ट्यूब ब्लॉक हो जाता है, ओवरियन सिस्ट जैसे बहुत से समस्या उत्पन्न होते हैं जो कंसीव होने में बाधा उत्पन्न करते हैं। शतावरी का सेवन करने से शरीर में वाइट ब्लड सेल्स का उत्पादन बढ़ता है जिसके कारण इन सारे लक्षणों में सुधार आता है प्रेगनेंट होने की संभावना बढ़ती है।
• अंडोत्सर्ग या ओव्यलैशन की स्थिति बेहतर बनाती है- शतावरी में स्ट्रेडॉयल सैपोनीन (steroidal saponins) होता है जो एस्ट्रोजेन को नियंत्रित करके पीरियड के रिगुलेट करके कंसीव होने के संभावना को बढ़ाती है।
• सर्वाइकल म्यूकस के सिक्रेशन को बेहतर बनाती है- सर्वाइकल म्यूकस का सिक्रेशन कम होने के कारण भी प्रेगनेंसी में बाधा उत्पन्न् होती है। सर्वाइकल म्यूकस महिलाओं के रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट में स्पर्म जाकर अंडों के साथ मिलने में मदद करती है। शतावरी में म्यूसिलेज़ होता है म्यूसिलेज़ मेमब्रेन को प्रोटेक्ट करने और टॉनिक जैसा काम करने में मदद करती है।
• टॉक्सिस के उत्पादन को कम करती है- शरीर में जो टॉक्सिन उत्पादित होता है उसको बाहर निकालकर अंडा और वीर्य के मिलन का पथ बनाकर प्रेगनेंट होने में मदद करती है।
चित्र स्रोत: Shutterstock
संदर्भ
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[2] Rege N N, Nazareth H M, Isaac A A, Karandikar S M, Dahanukar S A. Immunotherapeutic modulation of intraperitoneal adhesions by Asparagus racemosus. J Postgrad Med [serial online] 1989 [cited 2015 Jun 24];35:199-203.
[3] Alok, S., Jain, S. K., Verma, A., Kumar, M., Mahor, A., & Sabharwal, M. (2013). Plant profile, phytochemistry and pharmacology of Asparagus racemosus (Shatavari): A review. Asian Pacific Journal of Tropical Disease,3(3), 242-251.