
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 25, 2019 5:59 PM IST
बच्चे के जन्म के बाद महिलाएं गम्भीर मानसिक दबाव और भावनात्मक स्ट्रेस से गुज़रती हैं।
प्रेगनेंसी के दौरान की तकलीफें और डिलिवरी के वक़्त की परेशानियां झेलने के बाद जो समय आता है उसमें भी महिलाएं बहुत कुछ महसूस करती हैं। पोस्टपार्टम डिप्रेशन ( Postpartum Depression) या पोस्ट-प्रेगनेंसी स्ट्रेस (Post-pregnancy stress) इसी दौर में शुरु होता है। अपने बच्चे के साथ भावनात्मक रुप से बहुत ज़्यादा जुड़ने के बाद मां अपने ऑफिस और अपने प्रोफेशनल लाइफ में लौटना शुरु करती हैं और साथ ही अपने सोशल सर्किट में एक बार फिर एक्टिव होने लगती हैं।
यह दौर बहुत चुनौतिभरा होता क्योंकि यही वह वक़्त होता है, जब महिलाओं को उनके शरीर और फिटनेस से जुड़ी सलाहें मिलना शुरु हो जाती हैं। कभी-कभी लोग सलाह देते हैं कि प्रेगनेंसी के बाद वेट कंट्रोल करो,अपने कपड़ों पर ध्यान दो या अपना बॉडी शेप ठीक करो। लोगों को लगता है कि उन्होंने ऐसे मशविरे देकर सामने वाले का कल्याण करने की सोची है। लेकिन आपको यह समझना होगा कि प्रेगनेंसी के बाद आपकी बातें उस मां को दुखी कर सकती हैं। इसीलिए किसी भी यंग या न्यू मदर से भूलकर भी कुछ सवाल नहीं पूछने चाहिए-
अक्सर साथ काम करने वाले लोग इस तरह के सवाल पूछ बैठते हैं। लेकिन शायद ही उन्हें पता होता है कि बच्चा आने के बाद मां के पास खाना खाने का समय कभी नहीं होता। तो अगर आपको लगता है कि घर बैठे-बैठ टीवी देखने और चटर-पटर खाकर कोई मां खुद का वजन बढ़ा लेती है तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। पोस्ट-प्रेगनेंसी अपने शरीर को अपनाने और अपने वजन या बॉडी शेप को मेटेंन का कर पाने का दुख हर महिला को होता है। और वह इसे बदलने के लिए कुछ कर भी नहीं पाती। इसीलिए पहले से दुखी इंसान को और दुखी ना बनाएं।
मुझे नहीं लगता कि किसी भी महिला को यह पसंद आता है कि लोग बार-बार उसे उसके बढ़े हुए वजन की याद दिलाएं। एक्सपर्ट के मुताबिक आमतौर पर प्रेगनेंसी के दौरान 10-15 किलो तक वजन बढ़ता है। लेकिन हर महिला का शरीर अलग होता है। इसीलिए, कुछ महिलाओं का वजन इतना ज़्यादा नहीं बढ़ता। लेकिन जिनका वजन बढ़ता है उन्हें प्रेगनेंसी के बाद वजन घटाने में बहुत मुश्किलें भी होती हैं। अगर आप किसी महिला को बताते हैं कि उसका वजन बहुत बढ़ गया है तो यकिन मानिए उसे कोई नयी बात नहीं कहेंगे आप। उल्टे यह बॉडी-शेमिंग उसका दुख बढ़ाने का काम करेगी। यह पोस्ट-पार्टम डिप्रेशन बढ़ाने का काम करता है। ब्रेस्टफीडिंग मदर्स के लिए कुछ आजमाएं हुए नुस्खे जिनकी सलाह देती हैं भारतीय महिलाएं
सेलिब्रिटीज़ हमारे फिटनेस आइकॉन होते हैं और हम उनसे बहुत कुछ सीखते हैं। लेकिन उनकी लाइफस्टाइल और आम लोगों की लाइफस्टाइल बहुत अलग है। घर-किचन के काम, बच्चों की देखभाल, ‘मां का लाड़ला’ पति, घरवाले और ऑफिस में लगातार बढ़ता काम का बोझ! क्या आपने सोचा है कि इन सबके बीच किसी मां को जिम जाने या पार्लर जाकर कोई ब्यूटी ट्रीटमेंट लेने का समय मिलता होगा? अगर अब आपको अपने सवाल का जवाब मिल चुका है तो दोबारा किसी न्यू मदर से ना पूछिएगा।
स्ट्रेच मार्क्स कोई आम ब्यूटी प्रॉब्लम नहीं है। यह मातृत्व की निशानी है। तो कृपया उनका सम्मान करें।
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